

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने बुधवार को आरोप लगाया कि सरकार ने उनकी 26 दिन की भूख हड़ताल खत्म करने के दौरान ली गई तस्वीरें जारी करके अपना वादा तोड़ा है। उन्होंने कहा कि इस घटना ने उन्हें सभी पार्टियों के नेताओं से निराश कर दिया है। इंडिया टुडे के साथ एक खास इंटरव्यू में वांगचुक ने दावा किया कि यह साफ तौर पर तय हुआ था कि केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ आधी रात को हुई उनकी मीटिंग की कोई भी तस्वीर तब तक जारी नहीं की जाएगी, जब तक कि विपक्ष के नेता और छात्र प्रतिनिधि भी इस घोषणा में शामिल न हों।
59 साल के एक्टिविस्ट ने कहा कि मंत्रियों ने अपने फोटोग्राफर बुलाए थे। उन्होंने मुझसे वादा किया था कि वे तस्वीरें जारी नहीं करेंगे, लेकिन उन्होंने अपना वादा तोड़ दिया। वांगचुक ने इस बात पर जोर दिया कि इस पल को सिर्फ सत्ताधारी पार्टी के कार्यक्रम के तौर पर नहीं दिखाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मैंने उनसे कहा कि मैं चाहता हूं कि इसमें दूसरी राजनीतिक पार्टियों के सदस्य, उनके नेता और छात्र नेता भी शामिल हों। मैं चाहता था कि यह एक संयुक्त कार्यक्रम हो। चूंकि मंत्री आधी रात के बाद पहुंचे, इसलिए वांगचुक ने एक वैकल्पिक व्यवस्था का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि मैंने मंत्रियों से कहा कि मैं अपना अनशन तो तोड़ दूंगा, लेकिन इसकी खबर मेरी शर्तों पर जारी की जाएगी। इसमें विपक्ष के नेताओं और अगर संभव हो तो छात्र नेताओं की तस्वीरें भी साथ में हों, ताकि यह एक संयुक्त प्रयास लगे।
वांगचुक के मुताबिक, मंत्री इस प्रस्ताव पर सहमत हो गए और बैठक में मौजूद इंटेलिजेंस ब्यूरो के सीनियर अधिकारियों को इस समझौते का गवाह बनाया गया। उन्होंने कहा कि मैंने आईबी अधिकारियों से कहा कि आप इस समझौते के गवाह हैं। जब तक मैं सभी पार्टियों के प्रतिनिधियों के साथ मिलकर यह खबर सार्वजनिक नहीं करता, तब तक कोई भी मीडिया को तस्वीरें जारी नहीं करेगा। वे सहमत हो गए और उन्होंने यह वादा किया। वांगचुक का दावा है कि कुछ ही मिनटों में इस समझौते का उल्लंघन हो गया। उन्होंने याद करते हुए कहा कि मैं दूसरी पार्टियों के नेताओं की तस्वीरें इकट्ठा करने का इंतजार कर रहा था। पांच मिनट के भीतर ही आईबी का एक सीनियर अधिकारी हांफते हुए आया और बोला कि सर, मुझे नहीं पता कैसे, लेकिन ये तस्वीरें पहले ही टेलीविजन चैनलों पर चल रही हैं।
एक्टिविस्ट ने उन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने अपना अनशन खत्म करने के लिए सरकार के साथ आधी रात को कोई डील की थी। उन्होंने कहा कि मैं वह डील बहुत पहले कर सकता था। मुझे 26 दिन की भूख हड़ताल पर बैठने की जरूरत नहीं थी। मैं और भी बड़ी डील कर सकता था। मैं यह भी कह सकता था कि मुझे शिक्षा मंत्री बना दो। अगर मुझे डील करनी होती तो मेरे पास कई मौके थे। वांगचुक ने कहा कि इस घटना ने नेताओं पर से उनका भरोसा डिगा दिया है। उन्होंने अपना वादा तोड़ा। इसलिए इन सभी नेताओं पर से मेरा भरोसा उठ गया है।
सोनम वांगचुक नीट के मुद्दे पर अभिजीत दीपके की अगुवाई वाली कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए और 28 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू की। तबीयत बिगड़ने के बाद 18 जुलाई को पुलिस उन्हें जबरदस्ती पहले दिल्ली के सफदरगंज और बाद में गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल ले गई। उनकी पत्नी गीतांजलि जे. आंग्मो ने कोर्ट में याचिका दायर कर मांग की थी कि उनके पति को किसी प्राइवेट हॉस्पिटल में शिफ्ट किया जाए। इसके बाद 21 जुलाई को वांगचुक को गुरुग्राम के मेदांता हॉस्पिटल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां तीन दिन बाद जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह उनसे मिलने पहुंचे। पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानूनों और फास्ट-ट्रैक कार्रवाई के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देर रात जारी वीडियो मैसेज के बाद वांगचुक ने 24 जुलाई की देर रात अपना 26 दिन का अनशन खत्म किया। बाद में मंत्रियों द्वारा उन्हें सूप पिलाकर अनशन तुड़वाने की तस्वीरें भी सामने आईं।
सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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