अभिजीत दीपके और सोनम वांगचुक में मतभेद? किस बात पर दोनों की सोच अलग
सोनम वांगचुक ने साफ कर दिया है कि वह हिंसा करने वाले प्रदर्शनकारियों का कानूनी बचाव नहीं चाहते हैं, वहीं, सीजेपी का कहना है कि आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति पर मुकदमा ना चले।

दिल्ली के जंतर-मंतर पर करीब एक महीने तक आंदोलन चलाकर केंद्र सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेने पर मजबूर कर देने वाले सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के फाउंडर अभिजीत दीपके के बीच क्या मतभेद उत्पन्न हो चुके हैं? अधिकतर मुद्दों पर अभी तक सुर में सुर मिलाते रहे वांगचुक और सीजेपी की राय एक विषय पर अलग है। आंदोलनकारियों पर पुलिस ऐक्शन को लेकर दोनों के विचारों में समानता नहीं है।
दरअसल, जंतर-मंतर पर 20 जून से शुरू हुए आंदोलन के बाद जब सीजेपी और सरकार के बीच बातचीत शुरू हुई तो दीपके और उनकी टीम ने तीन प्रमुख मांगें रखीं। पहली और सबसे प्रमुख मांग थी नीट पेपर लीक की जवाबदेही तय करते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लिया जाए। दूसरी मांग थी कि नीट पेपर लीक के बाद खुदकुशी करने वाले करीब 21 बच्चों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए। सीजेपी की तीसरी मांग थी कि आंदोलन में शामिल छात्रों पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई ना की जाए।
उधर, अनशन के 21वें दिन जंतर-मंतर से उठाकर पहले सफरदरजंग अस्पताल और फिर गुरुग्राम के मेदांता में शिफ्ट किए गए सोनम वांगचुक ने भी भूख हड़ताल खत्म करने के लिए कुछ मांगें सरकार के सामने रखीं। उन्होंने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर नरमी दिखाते हुए संसद में चर्चा की मांग की। इसके अलावा उन्होंने भी खुदकुशी करने वाले बच्चों के लिए मुआवजे और आंदोलनकारियों पर मुकदमा ना दर्ज करने की मांग रखी।
वांगचुक बोले- शरारती तत्वों पर हो कार्रवाई
बाद में जब सरकार और सोनम वांगचुक के बीच समझौता हुआ तो सामने आया कि सरकार ने कानूनी कार्रवाई नहीं करने वाली मांग में एक शर्त जोड़ी है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने जब वांगचुक को सरकार की ओर से मानी गई मांगों को पढ़कर सुनाया तो उन्होंने कहा कि शांतपूर्ण तरीके से आंदोलन में शामिल हुए छात्रों पर मुकदमा नहीं चलाया जाएगा। अनशन तोड़ने और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे वाले घटनाक्रम के बाद सोमवार को जब वांगचुक अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे तो उन्होंने साफ कर दिया कि वह शांतपूर्ण प्रदर्शन करने वाले आंदोलनकारियों पर ऐक्शन का विरोध करते हैं, लेकिन उन शरारती तत्वों का बचाव नहीं करेंगे जो जानबूझकर ऐसा करते दिखे हैं। गौरतलब है कि 20 जुलाई को आयोजित संसद मार्च के दौरान कई जगहों पर पथराव और पुलिस पर हमले जैसी घटनाएं सामने आईं।
सीजेपी की मांग- किसी पर ना हो ऐक्शन
एक तरफ जहां वांगचुक हिंसा करने वाले और अहिंसक प्रदर्शनकारियों के साथ अलग-अलग रुख चाहते हैं तो वहीं सीजेपी इस तरह की किसी शर्त की बात नहीं कर रही है। सीजेपी की मांग है कि छात्र आंदोलन में शामिल किसी भी व्यक्ति पर किसी तरह की कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। सीजेपी के प्रवक्ता सौरभ दाव और आशुतोष रांका ने बार-बार यह कहा है कि सरकार किसी भी आंदोलनकारी पर कानूनी कार्रवाई नहीं करने का वादा पूरा करे। हालांकि, सरकार की ओर तरफ से इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।


