दिल्ली में SIR: 47.62 लाख ने नहीं जमा किए पर्चे, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से कटेगा नाम

भाषा, नई दिल्ली
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दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में लगभग 47 लाख वोटर शामिल नहीं हो पाएंगे। ऐसा इसलिए क्योंकि केवल 67.18 फीसदी लोगों के फॉर्म ही जमा हो सके हैं। हालांकि ऐसे लोग 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच फॉर्म 6 भरकर अपना दावा पेश कर सकते हैं। 

SIR in Delhi
दिल्ली की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में 1.45 करोड़ में से लगभग 47 लाख लोग शामिल नहीं हो पाएंगे।

दिल्ली में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाने और उन्हें जमा कराने का चरण सोमवार को समाप्त हो गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से साझा की गई जानकारी के मुताबिक, दिल्ली के 1,45,10,299 मतदाताओं में से महज 97,47,879 ने ही गणना प्रपत्र जमा कराया है। यानी गणना प्रपत्र जमा नहीं कराने वाले 47.62 लाख मतदाताओं का नाम अब 24 अगस्त को जारी की जाने वाली मसौदा वोटर लिस्ट से कट जाएगा।

जिनके पर्चे जमा नहीं, उनको मिलेगा मौका

हालांकि, जिन मतदाताओं ने अपने पर्चे जमा नहीं किए हैं उनको 24 अगस्त को मसौदा सूची यानी ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रकाशित होने के बाद भी दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का मौका दिया जाएगा। ऐसे लोग 24 अगस्त से 23 सितंबर तक मतदाता इस ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे। दिल्ली की अंतिम वोटर लिस्ट 27 अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।

97.47 लाख ने जमा कराए पर्चे

दिल्ली के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय से जारी आंकड़ों के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी के 1.45 करोड़ मतदाताओं में से 97.47 लाख (67.18 फीसदी) ने अपने गणना प्रपत्र यानी पर्चे भर कर जमा करा दिए हैं। इन वोटर लिस्ट को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ ने डिजिटल स्वरूप में बदला गया है।

अल्पसंख्यक बहुल कई क्षेत्रों में देखा गया उत्साह

गौर करने वाली बात यह कि अल्पसंख्यक बहुल कई क्षेत्रों में जमा किए गए और सफलतापूर्वक डिजिटाइज किए गए प्रपत्रों की संख्या ज्यादा रही है। उत्तर पश्चिम दिल्ली के रोहिणी निर्वाचन क्षेत्र में 1,50,398 मतदाता हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक 83.43 फीसदी यानी 1,25,478 प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया गया है जबकि 24,920 प्रपत्रों को जमा नहीं किए जाने के तौर पर चिह्नित किया गया है।

शकूरबस्ती में 81.26 फीसदी डिजिटाइजेशन

प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के मामले में शीर्ष पर रहने वाले अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में शकूरबस्ती 81.26 फीसदी, राजौरी गार्डन 79.14 फीसदी, मंगोलपुरी 78.76 फीसदी और उत्तम नगर 77.76 फीसदी शामिल हैं।

सबसे फिसड्डी तुगलकाबाद

गणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण में सबसे फिसड्डी तुगलकाबाद 52.15 फीसदी रहा। इसी निर्वाचन क्षेत्र में जमा नहीं किए गए प्रपत्रों की संख्या सबसे अधिक 47.85 फीसदी रही। चांदनी चौक में भी प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की दर कम 61.02 फीसदी रही।

जिनके नहीं नाम, उनको मिलेंगे नोटिस

यही नहीं जिन अल्पसंख्यक बहुल अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में पर्चों के डिजिटलीकरण का फीसदी अपेक्षाकृत अधिक रहा। उनमें मुस्तफाबाद 71.91 फीसदी, मटिया महल 75.5 फीसदी, सीलमपुर 76.63 फीसदी, बाबरपुर 73 फीसदी और बल्लीमारान 67.35 फीसदी प्रमुख हैं। एक अधिकारी ने बताया कि जिन वोटरों के नाम ड्रॉफ्ट लिस्ट में शामिल नहीं होंगे उनको एएसडीडी (गैरहाजिर, स्थानांतरित, मृत और नाम दोहराव) के तहत गड़बड़ियों के लिए नोटिस मिलेंगे।

Krishna Bihari Singh

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Krishna Bihari Singh

कृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )


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कृष्ण बिहारी सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। कृष्ण बिहारी सिंह लाइव हिन्दुस्तान में कार्यरत हैं। वह स्टेट टीम के साथ काम कर रहे हैं। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय मीडिया जगत में केबी उपनाम से चर्चित हैं। यूपी के मऊ जिले से ताल्लुक रखने वाले केबी महाराष्ट्र और हरियाणा में पत्रकारिता कर चुके हैं। मौजूदा वक्त में वह दिल्ली-एनसीआर में सक्रिय हैं।


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शैक्षणिक पृष्ठभूमि: लॉ (एलएलबी) और साइंस (बी.एससी, बायोलॉजी) से ग्रेजुएट कृष्ण बिहारी सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से मास कम्युनिकेशन में एमए और एमफिल किया है। कृष्ण बिहारी सिंह भारतीय राजनीति और वैश्विक मामलों के साथ विधि विषय की गहरी समझ रखते हैं। अखबार से लेकर टेलीविजन और अब डिजिटल मीडिया के बदलावों के साक्षी रहे कृष्ण बिहारी सिंह पाठकों की पसंद और बदलते ट्रेंड को बारीकी से समझते हैं।

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