काम की बात: दिल्ली में एसआईआर: पुराना पता बदला तो फिर से जुड़वा सकेंगे अपना नाम, ये काम करने होंगे

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग अपना मकान बदलते रहते हैं। एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोग अपना नाम मतदाता सूची में नहीं जुड़वा सके। ऐसे मतदाताओं को अब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नए सिरे से फार्म-6 भरकर जमा करना होगा।

वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए नए सिरे से फार्म-6 भरना होगा।
वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए नए सिरे से फार्म-6 भरना होगा।

दिल्ली में एसआईआर प्रक्रिया में बड़ी संख्या में ऐसे लोग मतदाता सूची में नाम नहीं जुड़वा सके हैं, क्योंकि उनके पते बदल गए हैं। दिल्ली के कई विधानसभा और लोकसभा चुनाव में मतदान करने के बावजूद उन्हें एसआईआर का फार्म ही नहीं मिला या उनका गणना प्रपत्र किसी और पते पर भेज दिया गया। स्थानांतरित (शिफ्टेड) श्रेणी में डाल दिए जाने के कारण अब एसआईआर की ड्राफ्ट मतदाता सूची में इनका नाम शामिल नहीं हो पाएगा। ऐसे मतदाताओं को अब मतदाता सूची में नाम जुड़वाने के लिए नए सिरे से फार्म-6 भरकर जमा करना होगा।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के मुताबिक दिल्ली में बड़ी संख्या में मतदाता अपने पते पर नहीं मिल पाए हैं। ऐसे मतदाताओं को अनुपस्थित मतदाता की श्रेणी में डाल दिया गया है। वहीं, पता बदल जाने के कारण न मिलने वाले मतदाताओं को शिफ्टेड श्रेणी में दर्शाकर उनका नाम एसआईआर से फिलहाल हटा दिया गया है।

घर-घर जाकर गणना प्रपत्र भरवाने के बाद अब 31 अगस्त को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय दिल्ली की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी करेगा। सीईओ कार्यालय का कहना है कि इसमें अब समाधान का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता यह है कि मसौदा मतदाता सूची जारी होने के बाद मतदाता को सबसे पहले अपना नाम जांचना चाहिए। अगर सूची में नाम नहीं है, तो दावे और आपत्तियां दाखिल करने का अवसर दिया गया है। मसौदा सूची में नाम नहीं होने पर फॉर्म-6 के साथ घोषणा पत्र और निर्धारित सहायक दस्तावेज देकर नाम शामिल कराने का दावा किया जा सकता है।

पुराना नाम है, लेकिन नया पता हो गया है तो यह करें

● नए पते वाले विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-6 भरें।

● फॉर्म-6 में शिफ्टिंग फ्रॉम अनदर कॉस्टीट्यूएंसी का विकल्प चुनें।

● वर्तमान यानी नए पते की पूरी जानकारी दें।

● पुराने विधानसभा क्षेत्र/पते की जानकारी भी दें, ताकि पुरानी प्रविष्टि हटाई जा सके।

● एसआईआर के दौरान इसे दावे-आपत्तियों की अवधि में ऑनलाइन या ऑफलाइन जमा किया जा सकता है।

पहली बार नाम जुड़ना है तो

●अगर व्यक्ति पहले कभी मतदाता सूची में नहीं था, तो फॉर्म-6 से नए पते पर नाम जुड़वाया जा सकता है।

● इस फार्म के साथ एक घोषणा पत्र देना होगा, जिसमें अपने माता-पिता का मतदाता ब्योरा देना होगा।

● माता-पिता का ब्योरा नहीं है तो स्कूल प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र समेत निर्धारित 12 दस्तावेजों से सूची में नाम जुड़ समता है।

● गलती से हटे नाम के लिए भी फॉर्म -6 के माध्यम से दावा किया जा सकता है।

● नाम, पता या अन्य विवरण में गलती हो तो संबंधित सुधार प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

● डुप्लीकेट नाम होने की स्थिति में पुराने स्थान की प्रविष्टि हटाने की प्रक्रिया अपनानी होगी।

(31 अगस्त को जारी होगी ड्राफ्ट मतदाता सूची, इसके बाद भरकर जमा करा सकेंगे फॉर्म-6)

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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