दिल्ली के शालीमार बाग में गरज रहे बुलडोजर, छावनी बना इलाका, ड्रोन से भी नजर
Shalimar Bagh Demolition : दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के निर्वाचन क्षेत्र शालीमार बाग में आज अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन हो रहा है। यहां 157 अवैध मकानों को ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए इलाके में बड़ी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं।

उत्तर-पश्चिमी दिल्ली के शालीमार बाग गांव में आज सुबह से ही अतिक्रमण के खिलाफ बुलडोजर ऐक्शन जारी है। इसके लिए इलाके में भारी संख्या में दिल्ली पुलिस के जवानों के साथ-साथ अर्धसैनिक बल भी तैनात किए गए हैं। डीसीपी, एसीपी और कई जिलों के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद हैं। पुलिस द्वारा ड्रोन के जरिये आसपास के इलाके में नजर रखी जा रही है। वहीं, प्रशासन की कार्रवाई के आगे लाचार नजर आ रहे लोग बेबस होकर सड़कों पर अपने सामान के साथ चुपचाप आशियानों को उजड़ते देख रहे हैं।
सीएम रेखा गुप्ता का निर्वाचन क्षेत्र है शालीमार बाग
जानकारी के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण के लिए लगभग 150 अधिक मकानों के खिलाफ तोड़फोड़ की कार्रवाई की जानी है। नोटिस की अवधि समाप्त होने के बाद आज तोड़फोड़ की यह कार्रवाई शुरू हुई है। दिल्ली हाईकोर्ट ने शालीमार बाग गांव के पास सड़क चौड़ी करने के लिए 157 अवैध मकानों को 30 मई को ध्वस्त करने का आदेश दिया था। बता दें कि, शालीमार बाग दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का निर्वाचन क्षेत्र है।
डीसीपी नॉर्थ-वेस्ट आकांक्षा यादव ने शालीमार बाग इलाके में बुलडोजर कार्रवाई को लेकर कहा, "सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने के लिए एक डेमोलिशन ड्राइव चलाई जा रही है। यह अभियान आज सुबह 6 बजे शुरू हुआ था और हमारा अनुमान है कि यह शाम 6 बजे तक पूरा हो जाएगा। इस ऑपरेशन के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा बलों की दस कंपनियां तैनात की गई हैं, जिनमें RAF, BSF, CRPF और दिल्ली पुलिस के जवान शामिल हैं।
डीसीपी ने बताया कि इसके अलावा ड्रोन कैमरों और वीडियोग्राफी के जरिये भी निगरानी की जा रही है। मोबाइल साइबर यूनिट और कंट्रोल रूम की टीमें भी मौके पर तैनात की गई हैं। हम सोशल मीडिया और अन्य तकनीकी इनपुट पर भी नजर रख रहे हैं। सभी इंतजाम पूरे हैं, कानून-व्यवस्था सुचारू है और स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण में है।
'इन घरों में 50 सालों से रह रहे थे लोग'
स्थानीय लोगों ने बताया कि इन इमारतों में छह हजार लोग और 600 से अधिक परिवार गुजर बसर करते हैं। घरों को तोड़ने से बेघर हो जाएंगे। सभी लोग 50 वर्षों से अधिक समय से रह रहे हैं। हमारे पास अपने मकानों की रजिस्ट्री, पावर ऑफ अटॉर्नी और अन्य कानूनी दस्तावेज मौजूद हैं। स्थानीय लोगों का दावा है उन्हें शालीमार बाग से 30 से 35 किलोमीटर दूर घेवरा में डूसिब के बने फ्लैटों पर 11 महीने के रेंट के हिसाब से रहने के लिए बोला जा रहा है।
शालीमार बाग गांव के निवासी और घर बचाओ आंदोलन समिति के संयोजक मुकेश कुमार पासवान ने बताया कि हमने कई बार सरकार, स्थानीय प्रशासन से अपने मकानों को बचाने के लिए गुहार लगाई। कई महिलाओं और लोगों ने अपने घरों को बचाने के लिए धरना भी दिया। क्रमिक भूख हड़ताल भी की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
केंद्र ने दिल्ली की 1511 अनधिकृत कॉलोनियों को दी थी राहत
बता दें कि, बीते महीने केंद्र सरकार ने दिल्ली में स्थित 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में ‘जैसा है जहां है’ के आधार पर संपत्तियों को नियमित करने के लिए एक नई नीति की घोषणा की थी। इसके तहत अब सभी भवनों को दिल्ली नगर निगम से मंजूरी प्राप्त करना अनिवार्य होगा। इस कदम से इन इलाकों में रहने वाले 10 लाख परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नए नियमों के अनुसार, लोगों को अब अपनी संपत्ति रजिस्टर्ड कराने के लिए क्षेत्र का लेआउट प्लान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और वे केवल एमसीडी द्वारा सूचीबद्ध किसी भी आर्किटेक्ट द्वारा तैयार किया गया भवन योजना ही दे सकते हैं। इसके अनुसार अब डीडीए नहीं, बल्कि राजस्व विभाग स्वामित्व अधिकार के लिए ट्रांसफर डीड जारी करेगा। एमसीडी नए निर्माणों की पहचान करने के लिए नियमित ड्रोन सर्वे करेगी। नगर निगम 'नियमितीकरण प्रमाण पत्र' जारी करेगा और नागरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए खाली प्लॉटों का सर्वेक्षण भी करेगा। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस नीति की घोषणा को शहरवासियों के लिए एक बड़ा दिन बताते हुए कहा था कि इस कदम से ऐसी कॉलोनियों के लगभग 50 लाख निवासियों को लाभ होगा।
20 अनधिकृत कॉलोनियों को नई नीति से क्यों रखा बाहर
खट्टर ने कहा था 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों को अनुमोदित लेआउट योजनाओं की आवश्यकता के बिना 'जैसा है, जहां है' के आधार पर नियमित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इन कॉलोनियों में सभी प्लॉटों और भवनों के भूमि उपयोग को आवासीय माना जाएगा। कुल 220 अनधिकृत कॉलोनियां नई नीति के दायरे में नहीं आएंगी क्योंकि वे निषिद्ध भूमि पर स्थित हैं, जैसे कि अधिसूचित वन, प्राचीन स्मारक और पुरातात्विक स्थल और अवशेष अधिनियम, 1958 के तहत संरक्षित क्षेत्र, जोन-ओ (यमुना बाढ़ का मैदान), सड़कों का मार्ग, हाई टेंशन लाइन, दिल्ली के रिज क्षेत्र, या किसी भी कानून के तहत संरक्षित भूमि। इसके अतिरिक्त, 69 समृद्ध अनधिकृत कॉलोनियों को भी इसमें शामिल नहीं किया गया है।
(भाषा के इनपुट के साथ)


