दिल्ली-कश्मीर में बड़े धमाके की साजिश रच रहा था शब्बीर लोन, ऐप पर LeT के कमांडर से लेता था निर्देश
Delhi News : दिल्ली और कोलकाता में राष्ट्र-विरोधी पोस्टर लगाने के मामले में गिरफ्तार लश्कर से जुड़े आठ संदिग्धों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया कि आतंकी शब्बीर अहमद लोन इस पूरे मॉड्यूल का मुख्य हैंडलर है।

Delhi News : दिल्ली और कोलकाता में राष्ट्र-विरोधी पोस्टर लगाने के मामले में गिरफ्तार लश्कर से जुड़े आठ संदिग्धों से पूछताछ में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया कि आतंकी शब्बीर अहमद लोन इस पूरे मॉड्यूल का मुख्य हैंडलर है, जो दिल्ली और कश्मीर में बड़े धमाकों की साजिश रच रहा था।
वह एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिये लश्कर कमांडर अबू हुजैफा से निर्देश लेता था और बांग्लादेश से नेटवर्क संचालित कर रहा था। शब्बीर अहमद लोन का आतंकी सफर दो दशक पुराना है। जांच अधिकारियों के अनुसार, वह साल 2004 में ही लश्कर-ए-तैयबा के संपर्क में आ गया था।
जम्मू-कश्मीर के गांदरबल स्थित कांगन गांव का रहने वाला शब्बीर उस समय लश्कर के खूंखार आतंकी अबू हुजैफा, अबू बकर और फैसल के लिए रसद और भोजन का इंतजाम करता था। इसी दौरान अबू हुजैफा ने उससे संगठन में शामिल कर लिया। तब से वह लगातार राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में लिप्त रहा है।
2007 में भी गिरफ्तार किया था
शब्बीर का आपराधिक रिकॉर्ड काफी लंबा है। साल 2007 में उसे गैरकानूनी गतिविधियों और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस दौरान उसके पास से भारी मात्रा में हथियार बरामद हुए थे, जिसके लिए उसे छह साल की जेल की सजा भी हुई थी। हालांकि, जेल से बाहर आने के बाद उसने सुधार के बजाय अपने आतंकी संपर्कों को और मजबूत करना शुरू कर दिया था।
बांग्लादेश में ‘लॉन्चिंग पैड’ और दूसरी शादी
2025 में इस मॉड्यूल ने अपनी रणनीति बदली। सुमामा बाबर के निर्देश पर शब्बीर अपनी पत्नी और बच्चों के साथ अवैध रूप से सीमा पार कर बांग्लादेश के सैदपुर चला गया। वहां उसने आतंकी गतिविधियों के लिए एक ‘लॉन्चिंग पैड’ तैयार किया। स्थानीय समाज में अपनी पैठ जमाने और पहचान छिपाने के लिए उसने पहले से शादीशुदा होने के बावजूद एक बांग्लादेशी महिला से निकाह कर लिया। यहीं से उसने पश्चिम बंगाल और अन्य राज्यों के युवाओं को भर्ती करना शुरू किया। शब्बीर ने गुरुग्राम में उमर फारूक नाम के युवक को अपने जाल में फंसाया, जो बाद में ‘सुप्रीम कोर्ट मेट्रो’ मामले में भी सह-आ आरोपी बना। जांच में यह भी सामने आया कि शब्बीर नेपाल के रास्ते चोरी-छिपे भारत में दाखिल हुआ था ताकि सुरक्षा एजेंसियों को चकमा दे सके। फरवरी 2026 में एक गुप्त ऑपरेशन के दौरान स्पेशल सेल ने इस मॉड्यूल के 8 सदस्यों को दबोच लिया, जिनमें 7 बांग्लादेशी नागरिक और एक भारतीय (उमर फारूक) शामिल था। मुख्य आरोपी शब्बीर लोन एक मध्यमवर्गीय परिवार से है और उसने 8वीं तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद बटमालू के सलफिया अरबी कॉलेज से इस्लामिक कोर्स किया है।
पोस्टर से परखी आतंकी की वफादारी
दिल्ली-कोलकाता में लगाए गए देश विरोधी पोस्टर लश्कर के मॉड्यूल का एक ‘टेस्ट’ थे। सुमामा बाबर ने ये पोस्टर शब्बीर को भेजे थे, ताकि नए भर्ती किए गए गुर्गों की वफादारी परखी जा सके। मालदा निवासी उमर फारूक और बांग्लादेशी नागरिक रोबी उल इस्लाम ने इन्हें सार्वजनिक स्थानों पर चिपकाया। इसके अलावा, दोनों ने दिल्ली और कोलकाता के भीड़भाड़ वाले व्यापारिक व धार्मिक स्थलों की रेकी भी की। एजेंसियों के अनुसार, उनका मकसद भविष्य में बड़े आतंकी हमलों की तैयारी करना था। मॉड्यूल ने कोलकाता के ‘हाथी यारा गोथे’ इलाके में सुरक्षित ठिकाना बनाया था, जबकि तमिलनाडु के तिरुपुर में भी अपनी जड़ें मजबूत कर ली थीं।
भर्ती की जिम्मेदारी थी
साल 2016 में शब्बीर को सज्जाद गुल के साथ परिमपोरा (जम्मू-कश्मीर) में आर्म्स एक्ट के तहत फिर गिरफ्तार किया गया। रिहाई के बाद उसका साथी सज्जाद गुल पाकिस्तान भाग गया और वहां से लश्कर की शाखा 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' का संचालन करने लगा। पूछताछ में शब्बीर ने कुबूल किया कि वह एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए लगातार पाकिस्तान में बैठे लश्कर कमांडर सुमामा बाबर के संपर्क में था। सुमामा ने ही उसे कश्मीर और भारत के अन्य राज्यों में युवाओं को कट्टरपंथी बनाने और उन्हें लश्कर के कैडर में भर्ती करने की जिम्मेदारी सौंपी थी।
लेन-देन की जांच जारी
वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियां शब्बीर के डिजिटल पदचिह्नों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि इस नेटवर्क को फंडिंग कहां से मिल रही थी और क्या भारत के अन्य शहरों में भी इनके 'स्लीपर सेल' सक्रिय हैं। पुलिस का मानना है कि इस गिरफ्तारी से लश्कर के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने में सफलता मिली है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बन गया था।


