
तब वह 16 साल की थी; नाबालिग पत्नी संग संबंध बनाने वाले पति को दिल्ली HC ने नहीं दी राहत
दिल्ली हाई कोर्ट ने उस शख्स के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट का मुकदमा हटाने से इनकार किया है जिस पर आरोप है कि उसने 18 साल की कम उम्र की पत्नी के साथ संबंध बनाए। आरोपी की पत्नी ने कहा कि संबंध उसकी सहमति से बनाए गए थे, इसके बावजूद अदालत ने माफी नहीं दी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने उस शख्स के खिलाफ पॉक्सो ऐक्ट का मुकदमा हटाने से इनकार किया है जिस पर आरोप है कि उसने 18 साल की कम उम्र की पत्नी के साथ संबंध बनाए। आरोपी की पत्नी ने कहा कि संबंध उसकी सहमति से बनाए गए थे, इसके बावजूद अदालत ने माफी नहीं दी और बताया कि क्यों ऐसा करना उचित नहीं होगा। आरोपी के खिलाफ यह मुकदमा 2023 में दर्ज किया गया था। अदालत ने कहा कि जिस कानून में नाबालिग से सेक्स को अपराध बताया गया है उसमें से अपवाद नहीं निकाला जा सकता है।
जस्टिस संजीव नरूला की बेंच ने कहा कि प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस ऐक्ट (पॉक्सो) के तहत 18 साल से कम के व्यक्ति की सहमति कोई मायने नहीं रखती है। अदालत ने कहा कि संसद की ओर से 18 साल की आयु निर्धारित की गई है जिससे कम होने पर कानून सहमति से संबंध को मान्यता नहीं देता है। बेंच ने कहा, 'इसलिए अदालतें उन मामलों में ‘सहमति से संबंध’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने में सावधान रहती हैं, जहां एक पक्ष कानून के अनुसार बच्चा हो।'
आरोपी पति और उसके माता पिता ने पॉक्सो ऐक्ट और बाल विवाह निषेध कानून के तहत दर्ज आपराधिक मामले को खत्म करने की मांग की थी। आरोपी की पत्नी ने कहा कि उसका कभी यौन उत्पीड़न नहीं हुआ क्योंकि उसने सहमति से संबंध बनाए थे। अब बालिग हो चुकी पत्नी बच्चे के साथ अदालत में पेश हुई और कहा कि वह पति पर कार्रवाई नहीं चाहती है।
अदालत ने कहा कि इस स्थिति में आपराधिक कार्यवाही को खत्म कर देने से यह संदेश जाने का जोखिम है कि 'सहमति और शादी की रस्मों के आधार पर बाल विवाह और संबंध बनाना अपराध नहीं है। आरोपी के खिलाफ यह मुकदमा तब दर्ज किया गया जब घरेलू हिंसा की एफआईआर दर्ज की गई थी। पुलिस को जांच के दौरान पता चला कि शादी के समय लड़की महज 16 साल 5 महीने की थी।





