गाजियाबाद के होटल में जिस्मफरोशी का धंधा, दूसरे राज्यों से बुलाते थे लड़कियां; 11 हिरासत में
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का भंडाफोडृ किया है। एक निजी होटल में लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चल रहा था। छापेमारी के दौरान मौके से 11 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। होटल प्रबंधन और रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का भंडाफोडृ किया है। एक निजी होटल में लंबे समय से देह व्यापार का धंधा चल रहा था। छापेमारी के दौरान मौके से 11 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। होटल प्रबंधन और रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच की जा रही है।
उत्तर प्रदेश में गाजियाबाद जिला के कौशांबी थाना क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़े सेक्स रैकेट का भंडाफोडृ किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र के एक निजी बड़े होटल में लंबे समय से देह व्यापार का अवैध धंधा संचालित किया जा रहा है।
पुलिस द्वारा कार्यवाई के संबंध में बुधवार को जानकारी दी गई। पुलिस ने बताया कि सूचना के आधार पर थाना कौशांबी पुलिस टीम ने योजनाबद्ध तरीके से होटल में छापा मारा। छापेमारी के दौरान मौके से 11 महिलाओं को हिरासत में लिया गया, जबकि होटल प्रबंधन और रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस द्वारा जांच पड़ताल में सामने आया कि होटल में बाहरी राज्यों से महिलाओं को बुलाकर देह व्यापार कराया जा रहा था। मौके से आपत्तिजनक सामग्री भी बरामद होने की सूचना है। सभी हिरासत में ली गई महिलाओं से पूछताछ की जा रही है और उनके बयान दर्ज किए जा रहे हैं।
थाना कौशांबी पुलिस का कहना है कि मामले में अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही है। होटल संचालक और रैकेट के मास्टरमाइंड के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। फिलहाल पुलिस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि इस अवैध धंधे से जुड़े सभी लोगों को कानून के शिकंजे में लाया जा सके।
डॉक्टर ने लड़की से छेड़छाड़ की
दिल्ली में रहने वाली एक युवती ने इंदिरापुरम थाना क्षेत्र में क्लीनिक चलाने वाले दोंतों के एक डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाया है। डॉक्टर ने युवती से भाई के साथ मारपीट भी की, जिसमें वह घायल हो गए। शिकायत पर पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है। युवती का कहना है कि छह जनवरी को शिप्रा मॉल गई थीं। इसके बाद वह पास में स्थित रूवाती डेंटल क्लीनिक में गईं। आरोप है कि क्लीनिक पर मौजूद डॉ. रजनीश ने उनके साथ छेड़खानी की। उसे गलत तरीके से छुआ। युवती ने विरोध किया तो मारपीट की गई।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


