'मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए, सरकार से पूछिए कि...' दीपके से सोनम वांगचुक
शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल 17वें दिन में प्रवेश कर गया। इस बीच कई नेताओं ने उनसे भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की है। वांगचुक ने कहा कि मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए। सरकार से पूछिए कि वे बातचीत क्यों नहीं कर रहे हैं।

शिक्षाविद् और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल खत्म करने की मांगें बढ़ गई हैं। इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने उनकी सेहत के बारे में जानकारी दी। दीपके ने एक्स पर बताया कि वांगचुक के शरीर की मांसपेशियां कम होने लगी हैं और उन्हें बहुत ज्यादा दर्द हो रहा है। सीजेपी के फाउंडर ने बताया कि वांगचुक का वजन 8.5 किलो कम हो गया है और उनका ब्लड प्रेशर 109/70 है।
दीपके ने वांगचुक के साथ हुई अपनी एक छोटी सी बातचीत का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने वांगचुक से भूख हड़ताल खत्म करने की गुजारिश की थी। दीपके ने बताया कि उनके शरीर की मांसपेशियां कम होने लगी हैं और उन्हें बहुत दर्द हो रहा है। बाकी लोगों की तरह मैंने भी उनसे अपना अनशन खत्म करने की विनती की। इस पर उन्होंने शांति से जवाब दिया कि मुझसे अनशन खत्म करने के लिए मत कहिए। सरकार से पूछिए कि वे बातचीत क्यों नहीं कर रहे हैं। आज (मंगलवार, 14 जुलाई) वांगचुक की भूख हड़ताल का 17वां दिन है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के खिलाफ सीजेपी के विरोध-प्रदर्शन का 25वां दिन है।
8 किलो से ज्यादा वजन घटा
दीपके ने बताया कि सोमवार को भूख हड़ताल के 16वें दिन सोनम वांगचुक का ब्लड प्रेशर 107/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया और भूख हड़ताल शुरू होने के बाद से उनका कुल वजन 8.2 किलो कम हो गया है। दीपके ने एक्स पर जानकारी दी कि वांगचुक के कुल वजन में 8.2 किलो की कमी, ब्लड ग्लूकोज लेवल- 67 और ब्लड प्रेशर 107/70 है।
सरकार से गुजारिश
दीपके ने सरकार से यह भी अपील की कि वे इस विरोध-प्रदर्शन को अहंकार की लड़ाई न बनने दें, क्योंकि इसमें इंसानी जानें दांव पर लगी हैं। उन्होंने कहा कि यह विरोध-प्रदर्शन सिर्फ जवाबदेही की मांग करता है। कहा कि मैं सरकार से गुजारिश करता हूं कि इसे अहंकार की लड़ाई न बनाए, क्योंकि यहां इंसानी जानें दांव पर लगी हैं। अपनी गलती मानना कमजोरी की निशानी नहीं है। यह परिपक्वता, जवाबदेही और अपनी राह सुधारने की इच्छाशक्ति की निशानी है।
नेताओं का समर्थन मिला
सोनम वांगचुक और सीजेपी संगठन को कई राजनीतिक दलों के नेताओं का समर्थन मिला है। टीएमसी नेता महुआ मोइत्रा ने भी वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने और विरोध जारी रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि सोनम सर, आपके उपवास ने इस देश के युवाओं को न्याय की लड़ाई के लिए एकजुट कर दिया है। आपका मकसद पूरा हो गया है। सरकार को आपकी या करोड़ों युवाओं की जिंदगी की परवाह नहीं है। लेकिन आपकी जिंदगी हमारे लिए मायने रखती है। प्लीज उपवास खत्म करें और लड़ाई जारी रखें।
आतिशी भी मिलने पहुंची
दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी सोमवार को विरोध स्थल का दौरा किया और आंदोलन के प्रति एकजुटता जताई। सीपीआई(एम) सांसद अमरा राम ने आंध्र प्रदेश और राजस्थान के वरिष्ठ पार्टी नेताओं के साथ विरोध स्थल का दौरा किया और मांगों का समर्थन किया। इन नेताओं ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च को भी अपना समर्थन दिया।
उद्धव ठाकरे ने समर्थन दिया
महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने भी सीजेपी को अपना समर्थन दिया। एक्स पर एक पोस्ट में ठाकरे ने कहा कि हम शिवसेना की ओर से सोनम वांगचुक और अभिजीत दीपके के आंदोलन को अपना समर्थन देने की घोषणा करते हैं। हालांकि, उन्होंने वांगचुक से अपनी भूख हड़ताल वापस लेने की अपील भी की।
भूख हड़ताल खत्म करने की अपील
दीपके ने एक्स पर शिवसेना नेता के साथ हुई बातचीत की जानकारी शेयर की और इस मुश्किल समय में सीजेपी के साथ खड़े रहने के लिए उनका धन्यवाद किया। दीपके ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा कि शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से बातचीत हुई। उन्होंने सोनम सर की तेजी से बिगड़ती सेहत पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने सोनम सर से अपनी भूख हड़ताल खत्म करने की अपील की और कहा कि उनकी सेहत सबसे ज्यादा जरूरी है। दीपके ने लिखा कि हम उद्धव सर का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं कि उन्होंने हमदर्दी दिखाई। इस मुश्किल समय में हमारे साथ खड़े रहे और सीजेपी तथा 20 जुलाई को संसद तक हमारे मार्च को अपना समर्थन दिया।
28 जून से भूख हड़ताल पर हैं वांगचुक
बता दें कि सीजेपी ने 20 जून को अपना विरोध प्रदर्शन शुरू किया था। सोनम वांगचुक 28 जून को इस आंदोलन में शामिल हुए और तब से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। यह संगठन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और उन छात्रों के परिवारों के लिए एक करोड़ रुपए के मुआवजे की मांग कर रहा है, जिनकी कथित तौर पर परीक्षा में गड़बड़ियों के कारण आत्महत्या कर ली थी।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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