दिल्ली हाईकोर्ट से देवांगना को झटका, ट्रायल कोर्ट को अंतिम फैसला सुनाने से रोकने वाला आदेश रद्द
दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट को दिल्ली दंगों की साजिश के मामले में आरोपों पर अंतिम फैसला सुनाने पर रोक लगाई गई थी। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने 'पिंजरा तोड़' एक्टिविस्ट देवांगना कलिता की याचिका को खारिज करते हुए रोक हटा ली।

दिल्ली हाईकोर्ट ने शुक्रवार को उत्तर-पूर्वी दिल्ली हिंसा की कथित साजिश के मामले में आरोपी 'पिंजरा तोड़' एक्टिविस्ट देवांगना कलिता की याचिका खारिज कर दी। देवांगना कलिता ने अपनी याचिका में सीएए और एनआरसी के खिलाफ वर्ष 2020 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई सांप्रदायिक हिंसा से जुड़े दो मामलों में पुलिस को कुछ वीडियो और वॉट्सएप चैट देने का निर्देश देने की मांग की थी।
जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने साथ ही अदालत के पूर्व के उस अंतरिम आदेश को जारी रखने से भी इनकार कर दिया, जिसमें सत्र अदालत से कहा गया था कि वह अशांति के पीछे कथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले में आरोप तय करने पर आखिरी आदेश न दे। कलिता के वकील ने सिंगल बेंच से फिलहाल आरोप तय करने के आदेश पर रोक जारी रखने का आग्रह किया। बचाव पक्ष के वकील ने बेंच से कहा कि वह इस आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे, इसलिए आरोप तय करने पर रोक लगी रहने दी जाए। जस्टिस कृष्णा ने कहा कि वह ऐसा नहीं कर पाएंगी।
दस्तावेजों की जांच की मिली अनुमति
हालांकि बेंच ने कलिता की एक अलग याचिका को स्वीकार कर लिया। इस याचिका के तहत कलिता को इस बड़ी साजिश के मामले में बिना भरोसे वाले दस्तावेजों की जांच करने की अनुमति दे दी गई है। कलिता ने 2023 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इस याचिका में दावा किया गया था कि दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) व नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजंस (एनआरसी) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शनों को रिकॉर्ड करने के लिए कुछ लोगों को इसका भुगतान किया था। कलिता की मांग थी कि सत्र अदालत द्वारा आरोप तय करने पर दलीलें सुनने से पहले उन्हें फुटेज दी जानी चाहिए। कलिता का कहना था कि फुटेज से पता चलेगा कि वह शांति से विरोध कर रही थीं। वीडियो फुटेज के अलावा कलिता ने एक ग्रुप की पूरी वॉट्सएप चैट भी मांगी थी, जिसके चुनिंदा हिस्से कथित तौर पर याचिकाकर्ता के खिलाफ इस्तेमाल किए जा रहे थे। 12 सितंबर, 2024 को हाईकोर्ट की अलग बेंच ने मामले में एक अंतरिम आदेश पारित किया था। इसके तहत सत्र अदालत से कहा कि वह गैरकानूनी गतिविध (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत कथित बड़ी साजिश के मामले में आरोप तय करने पर आखिरी आदेश पारित न करे।
क्या है मामला
छात्र कार्यकर्ता कलिता, नताशा नरवाल, जामिया समन्वय समिति की सदस्य सफूरा जरगर, ‘आप’ के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन व कई अन्य लोगों पर उत्तर-पूर्वी दिल्ली में वर्ष 2020 में हुई साम्प्रदायिक हिंसा की साजिश रचने का आरोप है। इस हिंसा में फरवरी 2020 में 53 लोग मारे गए थे। इसके अतिरिक्त 700 से भी ज्यादा लोग जख्मी हुए थे।


