बेटा है या नहीं? लाश पर निशान ढूंढ रही थी मां; रुला देगी सत्य निकेतन के परिवारों की कहानी
सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे में जान गंवाने पांच छात्रों के परिवारों की जिंदगी उजड़ गई। उनके बच्चे बड़े सपने लेकर दिल्ली पहुंचे थे। एक की मां ने बर्थमार्क से बेटे का शव पहचाना। कोई रक्षाबंधन मनाकर लौटा था।

Satya Niketan Victims: कोई बड़े शहर में पढ़कर सपने पूरा करने दिल्ली आया था, कोई छुट्टियां मनाकर कुछ घंटे पहले ही लौटा था तो कोई नया-नया पीजी में रहने लगा था। इन परिवारों को क्या पता था कि साथ बिताई खुशियां उनकी आखिरी याद बन जाएंगी। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में रविवार को पांच मंजिला पीजी इमारत ढहने से पांच छात्रों समेत सात लोगों की मौत हो गई। हादसे में जान गंवाने वाले छात्रों में कोई सीए बनने की तैयारी कर रहा था तो कोई बीकॉम और बीएससी की पढ़ाई कर रहा था। ये त्रासदी से कम नहीं। इन बच्चों के परिवारों ने हादसे में अपना सब कुछ गंवा दिया। एक मां ने बेटे की डेडबॉडी की पहचान बर्थ मार्क से की तो किसी को मलबे से निकले अपने बच्चे की मौत की खबर मिली।
सत्य निकेतन इलाके में पीजी बिल्डिंग रविवार को भरभराकर गिर गई थी। दो दिन तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन में बचाव दल ने 7 शव निकाले और 12 लोगों को जिंदा बचाया। जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया। उनका दुख कभी कम नहीं किया जा सकता। इनमें एक 18 साल का अर्पित है। अर्पित मध्य प्रदेश के देवास का रहने वाला था और रक्षाबंधन मनाकर हादसे वाले दिन ही दिल्ली लौटा था। हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में अर्पित के पिता अपने आंसू पोंछते हुए कहते हैं कि अर्पित के बड़े सपने थे और वह उन्हें पूरा करने के लिए मेहनत कर रहा था। वह बड़े शहर में पढ़ना चाहता था, इसलिए हमने उसे दिल्ली भेजा था। वह अपनी मां का बहुत लाडला था।
रविवार को हुए हादसे ने एक झटके में पांच परिवारों को झकझोर कर दिया। हादसे में मरने वालों में पांच छात्रों के अलावा एक मजदूर और एक अन्य व्यक्ति की भी जान चली गई। हादसे में घायल कम से कम दो लोगों की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका एम्स में इलाज चल रहा है। दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास हुए इस हादसे ने राजधानी की इमारतों की सुरक्षा और मौजूदा नियमों के पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
उसी दिन दिल्ली लौटा था अर्पित
18 वर्षीय अर्पित रक्षाबंधन की छुट्टी में वह परिवार के साथ मध्य प्रदेश स्थित अपने घर देवास गया था। उसके पिता भूपेंद्र जहाज कैब चलाते हैं। उन्होंने कहा, “हमने रक्षाबंधन की छुट्टी साथ में मनाई थी। उसे खुश और मस्ती करते हुए देखा था। अब हम उसे शव के रूप में देख रहे हैं।” अर्पित चार्टर्ड अकाउंटेंट की परीक्षा की तैयारी कर रहा था। बीकॉम के दूसरे वर्ष का छात्र था। रविवार रात अर्पित के दोस्त ने उसके परिवार को इमारत गिरने की जानकारी दी। पिता ने बताया, “जब तक हम यहां पहुंचे, सब कुछ खत्म हो चुका था। मेरा बेटा जा चुका था।”
मां ने बर्थमार्क से बेटे का शव पहचाना
अर्पित के दोस्त रातभर मलबे में उसे तलाशते रहे। बाद में पता चला कि उसकी मौत हो चुकी है। अस्पताल ने एक शव के अर्पित होने की पुष्टि की, लेकिन परिवार के लिए शव की पहचान करना आसान नहीं था। अर्पित के दोस्त युवराज ने बताया, “जब हम पहचान के लिए गए तो शव की पहचान मुश्किल थी। सोमवार सुबह करीब 6:30 बजे परिवार अस्पताल पहुंचा। उसकी मां ने जन्म के निशान देखकर उसकी पहचान की।”
परिवार ने अर्पित की आंखें दान की
अर्पित करीब डेढ़ साल से इसी पीजी में रह रहा था। उसके पिता ने कहा, “हर कोई हमें बता रहा है कि पीजी की हालत कितनी खराब थी। काश, मेरे बेटे ने मुझे पहले बताया होता। मैं उसे वहां कभी नहीं रहने देता।” पोस्टमार्टम के बाद अर्पित के परिवार ने अस्पताल में उसकी आंखों को दान कर दी। परिवार ने कहा, “हमने उसकी आंख इसलिए दान की ताकि किसी और की जिंदगी में रोशनी आ सके। शायद वह दुनिया को देख पाए, भले ही हमारा बेटा अब हमारे साथ नहीं है।”
सीए की तैयारी कर रहा था युवराज सोनी
अर्पित की तरह युवराज सोनी भी चार्टर्ड अकाउंटेंट की तैयारी कर रहा था। वह मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम के दूसरे वर्ष का छात्र था। युवराज कुछ दिन पहले ही नॉर्थ कैंपस से इस पीजी में रहने आया था। उसके दोस्त आर्यन ने कहा, “युवराज अभी-अभी इस पीजी में रहने आया था और यह जगह उसे हमसे छीन ले गई।” युवराज की बहन निक्की और भाई विवेक अस्पताल में मौजूद थे। लेकिन हादसे से वे इतने सदमे में थे कि उनके पास अपना दर्द बयां करने के लिए शब्द नहीं थे।
अक्षत सिंह यादव छुट्टी के बाद दिल्ली लौटा था
सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वालों में 19 वर्षीय अक्षत सिंह यादव भी था। उसने भी रक्षाबंधन की छुट्टियां अपने परिवार के साथ मध्य प्रदेश के कटनी में बिताई थीं। वह छुट्टी खत्म होने के बाद दिल्ली लौटा था। उसके पिता मंता सिंह यादव ने बताया, “हमारे लिए सब कुछ सामान्य था। वह छुट्टी के बाद घर से दिल्ली आया और अपनी पढ़ाई में लौटने की तैयारी कर रहा था। तभी उसके एक दोस्त का फोन आया कि इमारत गिर गई है और अक्षत घायल हो गया है।” अक्षत पीजीडीएवी कॉलेज में बीकॉम के दूसरे वर्ष का छात्र था।
उसके पिता के मुताबिक, वह 16 अगस्त 2025 से इस पीजी में रह रहा था। उन्होंने कहा, “हमें पता ही नहीं था कि पीजी की इमारत में कोई समस्या थी। उसने हमें कभी नहीं बताया। हमें लगता था कि हमारा बच्चा हमसे दूर रहते हुए सुरक्षित है।”
अभिषेक कुमार ने अस्पताल में दम तोड़ा
उत्तर प्रदेश के वाराणसी का रहने वाला अभिषेक कुमार मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीकॉम के दूसरे वर्ष का छात्र था। मलबे से निकाले जाने के समय वह बेहोश था। गंभीर चोटों के कारण कुछ घंटे बाद अस्पताल में उसकी मौत हो गई। उसके परिवार के दोस्त कृष्ण कंडारी ने आरोप लगाया कि पीजी अंदर से काफी खराब हालत में था। उन्होंने कहा, “मैं उसके साथ वहां दो दिन भी नहीं रह सका। पीजी मालिक और इस हादसे के लिए जिम्मेदार दूसरे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।” हादसे की जानकारी मिलने के बाद कृष्ण भी दिल्ली पहुंचे थे। उन्होंने कहा, “हम बचपन से साथ थे। वह मेरे लिए भाई जैसा था।”
जान गंवाने वालों में यूपी का पवन कुमार भी
पवन कुमार दिल्ली सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले सबसे कम उम्र के छात्रों में से एक था। वह मोतीलाल नेहरू कॉलेज में बीएससी कर रहा था। उत्तर प्रदेश के औरैया का रहने वाला पवन भी इसी पीजी में रह रहा था। एम्स अधिकारियों के मुताबिक, सोमवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद उसके परिवार ने शव ले लिया।
हादसे में जान गंवाने वाले अन्य दो लोग कौन थे
75 वर्षीय सुरिंदर सिंह को रविवार रात एम्स लाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। दिल्ली के अर्जुन नगर निवासी सुरिंदर सिंह मजदूरी करते थे। सत्य निकेतन हादसे में जान गंवाने वाले सातवें व्यक्ति का नाम पवन लाल कोरी था। 30 वर्षीय पवन भी मजदूरी करते थे।


