सफदरजंग अस्पताल के डॉक्टर को घर बैठे ही दिखा सकेंगे, किन मरीजों के लिए नई सुविधा
दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में देश का पहला ऑनलाइन क्रिटिकल केयर फॉलो-अप क्लिनिक शुरू होने जा रहा है। यह ऑनलाइन फॉलो-अप क्लिनिक ई-संजीवनी ओपीडी पोर्टल के माध्यम से मंगलवार और गुरुवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक उपलब्ध रहेगा।

दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल में देश का पहला ऑनलाइन क्रिटिकल केयर फॉलो-अप क्लिनिक शुरू होने जा रहा है। यह ऑनलाइन फॉलो-अप क्लिनिक ई-संजीवनी ओपीडी पोर्टल के माध्यम से मंगलवार और गुरुवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक उपलब्ध रहेगा। पोर्टल का उद्घाटन अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल शनिवार को करेंगे।
दिल्ली स्थित सफदरजंग अस्पताल प्रशासन आईसीयू से डिस्चार्ज हुए मरीजों के लिए देश की पहली ऑनलाइन क्रिटिकल केयर फॉलो-अप क्लिनिक शुरू करने जा रहा है, जहां वे घर पर रहकर स्वास्थ्य लाभ के दौरान डॉक्टरों से सलाह ले सकेंगे।
पोर्टल पर लॉग इन करना होगा
एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि यह ऑनलाइन फॉलो-अप क्लिनिक ई-संजीवनी ओपीडी पोर्टल के माध्यम से मंगलवार और गुरुवार को सुबह 10 बजे से 11 बजे तक उपलब्ध रहेगा। पोर्टल का उद्घाटन अस्पताल के निदेशक डॉ. संदीप बंसल शनिवार को करेंगे। बयान में कहा गया है कि मरीज और उनके परिवार पोर्टल पर लॉग इन करके अस्पताल से क्रिटिकल केयर सलाह प्राप्त कर सकते हैं।
आईसीयू फॉलो-अप और क्रिटिकल केयर जरूरी
सफदरजंग अस्पताल के क्रिटिकल केयर विभाग के प्रमुख डॉ. अनिर्बन होम ने कहा कि भारत में आईसीयू फॉलो-अप और क्रिटिकल केयर बेहद जरूरी हैं क्योंकि हमारे कई मरीज बहुत दूर-दराज के इलाकों से आते हैं। वे दूर-दराज के क्षेत्रों से यात्रा करके आते हैं और इलाज के बाद घर लौटने पर उनके लिए फॉलो-अप के लिए दोबारा आना बहुत मुश्किल हो जाता है।
सीधे ऑनलाइन संपर्क कर सकेंगे
उन्होंने कहा कि हम यह भी जानते हैं कि डिस्चार्ज होने के बाद ये मरीज अक्सर पूरी तरह से सक्षम नहीं होते और उन्हें कुछ सहायता की जरूरत होती है। इस प्रणाली के माध्यम से वे हमसे सीधे ऑनलाइन संपर्क कर सकेंगे। इससे हमें उनकी समस्या का आकलन करने और उसकी गंभीरता का निर्धारण करने में मदद मिलेगी।
डॉ. अनिर्बन ने बताया कि अस्पताल तब यह तय करेगा कि उनका इलाज घर से किया जा सकता है या नहीं। उन्होंने कहा कि इससे आईसीयू से डिस्चार्ज हुए हजारों मरीजों को लाभ होने की संभावना है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


