
BJP सांसद योगेंद्र चांदोलिया को झटका, दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप बरकरार रखे
दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को भाजपा सांसद योगेंद्र चांदोलिया की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने 2020 में एक ट्रैफिक पुलिस अधिकारी पर कथित रूप से हमला करने के लिए उनके खिलाफ आरोप तय करने के ट्रायल कोर्ट के आदेश को चुनौती दी थी।
दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने भाजपा सांसद योगेंद्र चांदोलिया की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने ट्रायल कोर्ट द्वारा उनके खिलाफ आरोप तय करने के आदेश को चुनौती दी थी। चांदोलिया पर 2020 में एक ट्रैफिक पुलिस कर्मी पर हमला करने के मामले में आरोप तय किए गए थे। कोर्ट ने माना कि चांदोलिया ने ड्यूटी कर रहे एक सरकारी कर्मचारी को डराने और उसके काम में बाधा डालने के इरादे से आपराधिक बल का प्रयोग किया था।

हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, राउज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने उत्तर-पश्चिमी दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद योगेंद्र चांदोलिया द्वारा दायर एक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। चांदोलिया ने 3 मई को ड्यूटी पर तैनात एक सरकारी कर्मचारी पर हमला करने और आपराधिक बल प्रयोग करने से संबंधित आरोप तय करने के आदेश के खिलाफ यह याचिका दायर की थी।
क्या है पूरा मामला
यह मामला 7 अक्टूबर 2020 का है, जब करोल बाग ट्रैफिक सर्किल पर तैनात हेड कॉन्स्टेबल राज ने आरोप लगाया था कि सांसद चंदोलिया ने अतिक्रमणकारी दोपहिया वाहन को हटाने के दौरान उनके काम में बाधा डाली। एफआईआर के अनुसार, जब हेड कॉन्स्टेबल राज एक दोपहिया वाहन को हटाने की कार्रवाई कर रहे थे, तभी चांदोलिया ने उनसे बहस की। उन्हें क्रेन से नीचे खींचने की कोशिश की और जब कॉन्स्टेबल ने घटना की रिकॉर्डिंग शुरू की तो उनका फोन छीनने का प्रयास किया गया। चांदोलिया के एक साथी ने कथित तौर पर कॉन्स्टेबल का फोन छीन भी लिया।
जज दिग विनय सिंह ने कहा कि शिकायतकर्ता के बयान से सांसद के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला स्थापित होता है। अदालत ने कहा, "शिकायतकर्ता को डराने या परेशान करने के इरादे से आपराधिक बल का इस्तेमाल किया गया था। यह लोक सेवक को अपने कर्तव्य का निर्वहन करने से रोकने के इरादे से किया गया था।"
उन्होंने आगे कहा कि लगाए गए आरोप "पूरी तरह से न्यायोचित" थे क्योंकि अपराध के होने का पर्याप्त संदेह था।
बचाव पक्ष की इस दलील को खारिज करते हुए कि कोई प्रत्यक्षदर्शी या सीसीटीवी साक्ष्य नहीं थे, अदालत ने कहा कि इस स्तर पर ऐसे मुद्दे प्रासंगिक नहीं हैं।
योगेंद्र चांदोलिया के वकील हरिओम गुप्ता ने दावा किया था कि मामला राजनीति से प्रेरित था और उनकी प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से किया गया था।





