रॉबर्ट वाड्रा ने खटखटाया HC का दरवाजा; निचली अदालत के समन को दी चुनौती
रॉबर्ट वाड्रा ने हरियाणा जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में समन के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ED ने स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी की ओर से कम दाम में जमीन खरीदकर भारी मुनाफे में बेचने के आरोप में चार्जशीट दाखिल की है।

रॉबर्ट वाड्रा ने हरियाणा के शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने सत्र अदालत के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें 16 मई को पेश होने के लिए समन जारी किया गया था। यह मामला 2008 का है, जब वाड्रा की कंपनी ने 7.5 करोड़ रुपये में जमीन खरीदी और 2012 में उसे डीएलएफ को 58 करोड़ रुपये में बेच दिया। ईडी ने इस मामले में रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया है, जिसे लेकर उनसे पूछताछ भी हो चुकी है। अब जस्टिस मनोज जैन की पीठ इस याचिका पर सुनवाई करेगी।
रॉबर्ट वाड्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी लगाई है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें समन भेजा गया था। यह मामला हरियाणा के शिकोहपुर में हुए एक जमीन सौदे से जुड़ा है। इसमें मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं। इस याचिका पर गुरुवार को जस्टिस मनोज जैन सुनवाई करेंगे। ट्रायल कोर्ट ने 15 अप्रैल को ईडी की चार्जशीट पर गौर करते हुए रॉबर्ट वाड्रा और अन्य लोगों को 16 मई को कोर्ट में पेश होने का आदेश दिया था।
ईडी ने पिछले साल जुलाई में यह चार्जशीट दायर की थी। यह पहली बार था जब किसी जांच एजेंसी ने 57 वर्षीय वाड्रा के खिलाफ किसी आपराधिक मामले में चार्जशीट दायर की थी। ED ने अप्रैल 2025 में उनसे लगातार 3 दिनों तक पूछताछ की थी। संज्ञान आदेश में विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा ने कहा था कि चार्जशीट और दस्तावेजों की शुरुआती जांच से वाड्रा और 8 अन्य आरोपियों के खिलाफ आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त सबूत मिले हैं।
7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी जमीन
रॉबर्ट वाड्रा के खिलाफ चल रही जांच गुरुग्राम जिले के मानेसर-शिकोहपुर (अब सेक्टर 83) में हुए जमीन सौदे से जुड़ी है। यह जमीन सौदा फरवरी 2008 में 'स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी प्राइवेट लिमिटेड' नाम की एक कंपनी ने किया था। इसमें रॉबर्ट वाड्रा पहले डायरेक्टर थे। इस जमीन सौदे के तहत कंपनी ने शिकोहपुर में 'ओंकारेश्वर प्रॉपर्टीज' से 3.5 एकड़ जमीन 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी।
IAS अधिकारी अशोक खेमका रद्द कर दिया था म्यूटेशन
तब हरियाणा में भूपिंदर सिंह हुड्डा की अगुवाई वाली कांग्रेस की सरकार थी। 4 साल बाद सितंबर 2012 में कंपनी ने वह जमीन रियल एस्टेट की बड़ी कंपनी DLF को 58 करोड़ रुपये में बेच दी थी। अक्टूबर 2012 में IAS अधिकारी अशोक खेमका ने इस सौदे को राज्य के चकबंदी अधिनियम और कुछ संबंधित प्रक्रियाओं का उल्लंघन बताते हुए इसका 'म्यूटेशन' (स्वामित्व हस्तांतरण) रद्द कर दिया था। इससे यह जमीन सौदा विवादों में घिर गया था। अशोक खेमका 'भूमि चकबंदी और भूमि अभिलेख-सह-पंजीकरण महानिरीक्षक' के पद पर तैनात थे।
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