काम की बात: दिल्ली में नई शर्तों के साथ 15 मई से ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन, 10 दिन का ट्रेनिंग भी लेना होगा
दिल्ली में 15 मई से ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन फिर से शुरू होने जा रहा है। इसके लिए कुछ नई शर्तें भी लागू होंगी ताकि बिना अनुमति वाले ई-रिक्शा के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जा सके। एक लाइसेंस धारक के नाम पर सिर्फ एक ई-रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन होगा। 10 दिन की एक अनिवार्य ट्रेनिंग भी पूरी करनी होगी।

दिल्ली में 15 मई से ई-रिक्शा का रजिस्ट्रेशन फिर से शुरू होने जा रहा है। इसके लिए कुछ नई शर्तें भी लागू होंगी ताकि बिना अनुमति वाले ई-रिक्शा के खिलाफ सख्ती से कार्रवाई की जा सके। एक लाइसेंस धारक के नाम पर सिर्फ एक ई-रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन होगा। साथ ही 10 दिन की एक अनिवार्य ट्रेनिंग भी पूरी करनी होगी।
दिल्ली सरकार द्वारा संशोधित व्यवस्था के तहत एक लाइसेंस धारक के नाम पर सिर्फ एक ई-रिक्शा का ही रजिस्ट्रेशन करने की अनुमति होगी। अधिकारियों के मुताबिक, इस कदम का मकसद उस चलन पर रोक लगाना है जिसमें एक ही व्यक्ति के नाम पर कई वाहन रजिस्टर करवाकर उन्हें बाद में दूसरों को सबलेट कर दिया जाता है।
नवंबर में रजिस्ट्रेशन रोक दिए गए थे
दिल्ली परिवहन विभाग ने पिछले साल नवंबर में रजिस्ट्रेशन रोक दिए थे। अधिकारियों ने बताया कि ई-रिक्शा चालकों को ट्रेनिंग सर्टिफिकेट जारी करने और रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन पोर्टल 15 मई को फिर से खुल जाएगा। परिवहन मंत्री पंकज सिंह ने कहा कि ये बदलाव दिल्ली में ई-रिक्शा के संचालन को रेगुलेट करने और बिना अनुमति वाले वाहनों और ट्रैफिक जाम से जुड़ी चिंताओं को दूर करने के प्रयासों का हिस्सा हैं।
10 दिन की अनिवार्य ट्रेनिंग
मंत्री ने कहा कि हर व्यक्ति के लिए सिर्फ एक ई-रिक्शा रजिस्टर्ड होने से मालिकाना हक भी बढ़ेगा और नियमों का उल्लंघन भी कम होगा। शहर में बिना इजाजत चल रहे ई-रिक्शा अब निगरानी में रहेंगे। जो आवेदक रजिस्ट्रेशन करवाना चाहते हैं, उन्हें 10 दिन की एक अनिवार्य ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। यह ट्रेनिंग तय केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।
हालांकि, प्रति लाइसेंस धारक के लिए एक वाहन की यह पाबंदी रजिस्टर्ड ट्रांसपोर्ट कंपनियों या किसी संस्थान के परिसर के अंदर काम करने वाले ई-कार्ट ऑपरेटरों पर लागू नहीं होगी। ऐसी संस्थाओं को एक ही नाम के तहत कई वाहनों को रजिस्टर करने की अनुमति पहले की तरह ही मिलती रहेगी।
रजिस्ट्रेशन की समीक्षा की जाएगी
अधिकारियों ने आगे बताया कि विभाग एक ऐसी व्यवस्था पर भी काम कर रहा है, जिससे उन लोगों की पहचान की जा सके जिनके नाम पर पहले से ही कई ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। सालाना फिटनेस जांच के दौरान इन रजिस्ट्रेशन की समीक्षा की जा सकती है या उन्हें रद्द भी किया जा सकता है।
गैर-कानूनी ई-रिक्शों के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी
अधिकारी बिना वैध रजिस्ट्रेशन के चल रहे गैर-कानूनी ई-रिक्शों के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने की भी योजना बना रहे हैं। परिवहन विभाग ने दिल्ली सरकार की मंजूरी के लिए एक ई-रिक्शा नीति का मसौदा तैयार किया है। अधिकारियों ने बताया कि इस नीति का मकसद शहर में ई-रिक्शों की संख्या को व्यवस्थित करना और अलग-अलग इलाकों में उनका ज्यादा संतुलित वितरण सुनिश्चित करना है।
रूट तय करने पर भी विचार
अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस मसौदा नीति में दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में मांग और ट्रैफिक की स्थिति के आधार पर ई-रिक्शों के रूट और उनकी तैनाती को नियंत्रित करने के उपाय भी सुझाए गए हैं। परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि पूरे शहर में ई-रिक्शे मौजूद हैं, लेकिन उनकी संख्या पर कोई खास नियंत्रण नहीं है। हम उनके लिए रूट तय करने और मांग के आधार पर उनकी संख्या को व्यवस्थित करने पर भी विचार कर सकते हैं।
सोसाइटी ने स्वागत किया
इस कदम का ईवी मैन्युफैक्चरिंग सोसाइटी ने स्वागत किया है। यह सोसाइटी रजिस्ट्रेशन के निलंबन और ड्राइवरों के ट्रेनिंग सर्टिफिकेशन से जुड़े मुद्दों को लेकर दिल्ली सरकार के साथ लगातार बातचीत कर रही थी। सोसाइटी के महासचिव राजीव तुली ने कहा कि संगठन ने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को फिर से शुरू करने की मांग को लेकर परिवहन विभाग के साथ कई बैठकें की थीं।
तुली ने कहा कि हम दिल्ली सरकार का शुक्रिया अदा करते हैं कि उन्होंने रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को फिर से शुरू किया और ट्रेनिंग सर्टिफिकेट के लिए पोर्टल को फिर से खोल दिया। इस रोक की वजह से ई-रिक्शा के डीलरों और ड्राइवरों पर असर पड़ रहा था।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


