
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे LFD की जमीन पर बन सकेंगी सोसाइटी, 7 गांवों के किसानों को मिलेगा मुआवजा
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे लैंड फॉर डेवलपमेंट (एलएफडी) की 500 हेक्टेयर भूमि पर सोसाइटी, खेल परिसर और व्यावसायिक केंद्र बनाने का रास्ता साफ हो गया है। प्राधिकरण ने सात गांवों के किसानों को भी 80 करोड़ रुपये मुआवजा वितरण की तैयारी कर ली है।
यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे लैंड फॉर डेवलपमेंट (एलएफडी) की 500 हेक्टेयर भूमि पर सोसाइटी, खेल परिसर और व्यावसायिक केंद्र बनाने का रास्ता साफ हो गया है। प्राधिकरण ने उन सात गांवों के किसानों को 80 करोड़ रुपये मुआवजा वितरण की तैयारी कर ली है, जिनकी जमीन का एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहण हुआ था।
ग्रेटर नोएडा से आगरा तक 165 किलोमीटर लंबे यमुना एक्सप्रेसवे को जेपी इंफ्राटेक ने वर्ष 2012 में 12,000 करोड़ की लागत से तैयार किया था। एक्सप्रेसवे को बनाने के लिए 10 हजार किसानों की जमीन अधिग्रहित की गई थी। ये किसान करीब 14 वर्षों से बढ़े हुए 64.7 प्रतिशत मुआवजे की मांग कर रहे थे। इन 10 हजार किसानों को करीब 1689 करोड़ रुपये मुआवजा मिलना है। इनमें 1335 करोड़ रुपये सुरक्षा रियलटी को देने हैं, जबकि 355 करोड़ प्राधिकरण को अपनी तरफ से देने हैं।
राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) ने सुरक्षा को यह रकम चार किस्तों में चुकाने का आदेश दिया था। कंपनी ने यमुना प्राधिकरण को पहली किस्त के अनुसार 254 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया है। एक्सप्रेसवे पर यमुना क्षेत्र माइलस्टोन 7.3 किलोमीटर पर शुरू होता है। यहां से 22.6 किलोमीटर तक आने वाली भूमि के किसानों को प्राधिकरण 80 करोड़ रुपये मुआवजा देगा। इसके लिए शिविर लगाए जाएंगे। प्राधिकरण ने दो महीने में किसानों को मुआवजा देने की योजना तैयार की है।
इन गांवों के किसानों को पहले मुआवजा मिलेगा
दनकौर, जगनपुर-अफजलपुर, सलारपुर, मिर्जापुर, निलौनी शाहपुर, अच्छेजा और रौनीजा।
एलएफडी भूमि पर विकास कार्य हो सकेंगे
जेपी इंफ्राटेक को यमुना एक्सप्रेसवे के किनारे कुल 2500 हेक्टेयर एलएफडी (विकास हेतु भूमि) विकसित करने का अधिकार दिया गया था। इनमें से तीन एलएफडी गौतमबुद्ध नगर और एक-एक अलीगढ़ और आगरा में हैं। नोएडा में जेपी विश टाउन एलएफडी के तहत ही विकसित हो रहा है। इसी तरह से अन्य क्षेत्रों में भी विकास किया जाना है, लेकिन मुआवजा न मिलने के कारण यमुना सिटी की एलएफडी पर किसानों का कब्जा है। अब मुआवजा मिलने के बाद भूमि को कब्जा मुक्त कराया जा सकेगा, जिसके बाद यहां ग्रुप हाउसिंग, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स, व्यावसायिक केंद्र बन सकेंगे।
आरके सिंह, सीईओ, यमुना विकास प्राधिकरण, सात गांवों के किसानों को 80 करोड़ रुपये मुआवजा वितरित किया जाएगा। इसके लिए सुरक्षा समूह से प्राधिकरण को 254 करोड़ रुपये मिल हो चुके हैं। इन किसानों की जमीन यमुना एक्सप्रेसवे के लिए अधिग्रहित हुई थी।''





