ईसाई या इस्लाम अपनाने वाले आदिवासियों को एसटी सूची से हटाएं; दिल्ली में बड़ी लामबंदी
दिल्ली के लाल किला मैदान में 'जनजाति सुरक्षा मंच' की ओर से आयोजित विशाल 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' में देश भर से आए लाखों आदिवासियों ने ईसाई या इस्लाम धर्म अपनाने वाले धर्मांतरित आदिवासियों को ST सूची से बाहर करने की मांग की।

नई दिल्ली के लाल किला मैदान में देश भर के विभिन्न आदिवासी समुदायों के लाखों लोग एक बड़े सांस्कृतिक समागम में शामिल हुई। यह कार्यक्रम RSS से जुड़े 'जनजाति सुरक्षा मंच' की ओर से आयोजित किया गया। कार्यक्रम का मकसद उन आदिवासियों को अनुसूचित जनजाति (एसटी) की सूची से हटाना है जिन्होंने ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है। आयोजकों ने दावा किया कि करीब 500 समुदायों के 1.5 लाख लोगों ने 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' में हिस्सा लिया।
इंदिरा गांधी के सामने भी उठा था मुद्दा
जनजाति सुरक्षा मंच, असम प्रांत के मालया जिगडुंग ने अपने संबोधन में कहा कि इस कार्यक्रम का मकसद अनुसूचित जनजाति श्रेणी से धर्मांतरित आदिवासियों को हटाने की हमारी लंबे समय से लंबित मांग के पक्ष में आवाज बुलंद करना है। उन्होंने दावा किया कि यह मुद्दा आदिवासी नेता कार्तिक उरांव जी के दौर से ही चला आ रहा है। आदिवासी नेता कार्तिक उरांव ने 1960 के दशक के आखिर में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सामने इस मुद्दे को उठाया था।
1967 और 1970 में उठी थी ऐसी मांग
बिहार के दिग्गज आदिवासी नेता और कांग्रेस के पूर्व सांसद कार्तिक उरांव ने 1967 और 1970 में सैकड़ों सांसदों के दस्तखत वाले ज्ञापन दिए थे। इनमें मांग की गई थी कि उन आदिवासियों से अनुसूचित जनजाति (एसटी) का दर्जा छीन लिया जाना चाहिए जिन्होंने ईसाई या इस्लाम धर्म अपना लिया है। बता दें कि 'जनजाति सुरक्षा मंच' का गठन 2006 में किया गया था। इसका मकसद उन आदिवासियों से ST दर्जा छीनने के लिए आवाज बुलंद करना था जिन्होंने दूसरे धर्म अपना लिए हैं।
धर्म बदलने वालों को आदिवासी दर्जे से हटाएं
जनजाति सुरक्षा मंच के नेता मालया जिगडुंग ने कहा कि यह लामबंदी अनुच्छेद 342 के तहत संवैधानिक संशोधन के लिए व्यापक राष्ट्रीय समर्थन जुटाने में मददगार साबित होगी। यह मुद्दा हमारी सबसे पुरानी मांगों में से एक है। जनजाति सुरक्षा मंच के गठन किए जाने के पीछे भी यही मकसद है। इस विशाल आयोजन के जरिए हमने धर्म बदलने वाले आदिवासियों को एसटी सूची से हटाने के अपने आंदोलन के पक्ष में राष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद की है।
रैलियों से समागम की शुरुआत
इस 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' की शुरुआत दिल्ली के 5 स्थानों - राजघाट चौक, रामलीला मैदान, अजमेरी गेट चौक, कश्मीरी गेट के पास कुदसिया बाग और शास्त्री पार्क बस डिपो के पास श्यामगिरी मंदिर से निकली सांस्कृतिक शोभायात्राओं के साथ हुई। लगभग 2.5 से 3.5 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद आदिवासी संगठनों की ये रैलियां लाल किला मैदान में मिलीं। आदिवासी समाज के युवाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में झंडे लहराए, ढोल बजाए और लोक नृत्य प्रस्तुत किए।
कई राज्यों के आदिवासी संगठन शामिल
इस विशाल समागम में असम, त्रिपुरा, बिहार, झारखंड, ओडिशा, अंडमान और निकोबार समेत कई राज्यों के आदिवासी संगठनों ने हिस्सा लिया। आयोजकों ने 'जनजाति सांस्कृतिक समागम' को अपनी तरह का सबसे बड़ा आदिवासी सांस्कृतिक समागम करार दिया। असम के कार्बी आंगलोंग जिले के 'नॉर्थ ईस्ट जनजाति धर्म संस्कृति सुरक्षा मंच' के संगठन सचिव बलराम फांगचो ने अपने संबोधन में कहा कि हमें आदिवासी समुदायों के अस्तित्व की रक्षा करनी होगी।
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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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