ऑनलाइन माफी क्या होती है? कर्नल सोफिया कुरैशी पर टिप्पणी मामले में मंत्री की याचिका पर सुनवाई करेगा SC
मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 जनवरी को सुनवाई कर सकता है। यह याचिका हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर किया गया है। हाई कोर्ट ने कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ 'गंदी भाषा' का प्रयोग करने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया है।

मध्य प्रदेश के मंत्री कुंवर विजय शाह की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 19 जनवरी को सुनवाई कर सकता है। यह याचिका हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ दायर किया गया है। हाई कोर्ट के आदेश में भारतीय सेना के अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ 'गंदी भाषा' का प्रयोग करने के आरोप में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता तथा जॉयमाल्य बागची की पीठ मंत्री की याचिका पर सुनवाई करेगी।
इससे पहले 28 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपनी टिप्पणियों पर सार्वजनिक माफी न मांगने के लिए शाह को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि वे अदालत के धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं। अदालत ने कहा था कि मंत्री का आचरण उनकी मंशा और नेकनीयती पर संदेह पैदा कर रहा है।
विजय शाह की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील के. परमेश्वर ने तर्क दिया कि मंत्री ने सार्वजनिक माफी जारी कर दी है, जिसे ऑनलाइन साझा किया गया है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ऑनलाइन माफी क्या होती है? हमें उनकी मंशा और ईमानदारी पर संदेह होने लगा है। आप माफी को रिकॉर्ड पर रखें। हमें इसे देखना होगा।
अदालत ने मंत्री के बयानों की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) को 13 अगस्त 2025 तक अपनी रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। एसआईटी का एक अधिकारी सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट लेकर अदालत में पेश हुआ था। इसमें कहा गया था कि जांच दल द्वारा पूछताछ किए गए 27 लोगों के बयान फिलहाल जांच के दायरे में हैं। पीठ ने कहा था कि शाह के बयानों के बजाय उन लोगों के बयान दर्ज किए जाने चाहिए थे, जिनकी भावनाएं आहत हुई थीं।
पिछले साल 28 मई को सुप्रीम कोर्ट ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ शाह की विवादास्पद टिप्पणियों के मामले में मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में चल रही कार्यवाही को बंद करने का आदेश दिया और एसआईटी से स्थिति रिपोर्ट मांगी।
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने विजय शाह को फटकार लगाई थी और उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया था। शाह उस वीडियो के वायरल होने के बाद विवादों में घिर गए, जिसमें उन्हें कथित तौर पर कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था। कर्नल कुरैशी ने एक अन्य महिला अधिकारी विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया ब्रीफिंग में राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि हासिल की थी।
हाई कोर्ट ने कर्नल कुरैशी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने और 'गंदी भाषा' का प्रयोग करने के लिए विजय शाह को फटकार लगाई। कोर्ट ने पुलिस को उनके खिलाफ शत्रुता और घृणा फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। इसके बाद विजय शाह ने खेद व्यक्त किया और कहा कि वह कर्नल कुरैशी का अपनी बहन से भी अधिक सम्मान करते हैं।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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