
कार में बोनट के सहारे बांधा था विस्फोटक, लाल किला धमाके में बड़ा खुलासा
संक्षेप: लाल किले के पास हुए धमाके की जांच में आशंका जताई जा रही है कि विस्फोटक को कार के बोनट से रस्सी के सहारे बांधा गया था। सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि बोनट पार्किंग से निकलने के बाद ठीक से बंद नहीं था।
लाल किले के पास हुए धमाके की घटना की जांच में आशंका जताई जा रही है कि कार में बोनट के सहारे विस्फोटक को बांधा गया था। जांच में सीसीटीवी फुटेज एक-एक कर सामने आ रहे हैं, उससे यह साफ जाहिर होता है कि कार जब बदरपुर से दिल्ली में एंट्री लेती है तो उसका बोनट सही सलामत था। जब कार सुनहरी मस्जिद के पास की पार्किंग से निकली तो बोनट ठीक से बंद नहीं था और उसे एक रस्सी के सहारे बांधा गया था। इससे यह आशंका जताई जा रही है कि बोनट में विस्फोटक रखा गया था, जिससे धमाका किया गया है। वही विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि पूरी तरह से यह बम तैयार नहीं रहा होगा, नहीं तो यह और भी ज्यादा नुकसान करता।

बहरहाल फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल के आसपास से मंगलवार को कई सैंपल एकत्र किए हैं और इस विस्फोटक के लिए क्या-क्या सामान इस्तेमाल किया गया था, इसे लेकर जांच में जुट गई है।
वहीं, यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह विस्फोटक आखिरकार कार के बोनट में रखा गया तो कहां इसे रखा गया? कहीं ऐसा तो नहीं कि कार में विस्फोटक का सामान था, जिसे पार्किंग में आकर जल्दबाजी में असेंबल किया गया और फिर उसे बोनट में रख दिया गया। इसकी भी जांच की जा रही है। और इस आधार पर ही यह आशंका जताई जा रही है कि यह बम ठीक से असेंबल नहीं हो सकता था, जिसके कारण पूरी तरह से तैयार नहीं हो पाया था, नहीं तो यह और भी बड़ी तबाही मचाता।
साथ ही कार की पिछली सीट पर अत्यधिक वजन रखा गया था। इसमें विस्फोटक और लोहे के कबाड़ होने की आशंका जताई जा रही है। इस बात का खुलासा सीसीटीवी कैमरे की फुटेज से हुआ है। सूत्रों ने बताया कि कार का पिछला दोनों पहिया सामान्य से अधिक दबा हुआ था। वहीं, विस्फोट के बाद दूर-दूर तक छोटे-छोटे लोहे के टुकड़े गिरे हैं। इससे आशंका जताई जा रही है कि पिछली सीट पर विस्फोटक के साथ-साथ लोहे के कबाड़ आदि रखे गए थे। वहीं, इस विस्फोट के बाद कार का चेचिस और दो पहिया ही मौके पर बचा है।
दिल्ली में घूमता रहा शख्स
सूत्र ने बताया कि कार चालक कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, कमला मार्केट और दरियागंज में घूमता रहा। इसके बाद दरियागंज से होते हुए कार पार्किंग में आ कर करीब तीन घंटे तक खड़ी हो गई। उसे दिल्ली के बारे में पूरी जानकारी थी।





