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रेड फोर्ट ब्लास्ट में दो मोबाइल वाला नया खुलासा, 'घोस्ट' सिम के सहारे पाक हैंडलरों से बात की

रेड फोर्ट ब्लास्ट में दो मोबाइल वाला नया खुलासा, 'घोस्ट' सिम के सहारे पाक हैंडलरों से बात की

संक्षेप:

पिछले साल 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। आरोपी फर्जी यानी घोस्ट सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे हैंडलरों के संपर्क में थे।

Jan 04, 2026 03:45 pm ISTGaurav Kala पीटीआई, नई दिल्ली
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दिल्ली के लाल किले के पास हुए विस्फोट की जांच में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा खुलासा हाथ लगा है। जांच में सामने आया है कि इस हमले से जुड़े आरोपियों ने ‘घोस्ट’ सिम कार्ड और एन्क्रिप्टेड मोबाइल ऐप्स के जरिए पाकिस्तान में बैठे आतंकी हैंडलरों से लगातार संपर्क बनाए रखा। मुजम्मिल, आदिल और अन्य ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए ‘ड्यूल फोन’ रणनीति अपनाई थी।

जांच अधिकारियों के मुताबिक आरोपी अत्यधिक पढ़े-लिखे थे और उन्होंने सुरक्षा एजेंसियों को चकमा देने के लिए ड्यूल मोबाइल रणनीति अपनाई। एक मोबाइल फोन को वे सामान्य निजी और पेशेवर इस्तेमाल के लिए रखते थे, जबकि दूसरा फोन सिर्फ आतंकी गतिविधियों और पाकिस्तानी हैंडलरों से संवाद के लिए इस्तेमाल किया जाता था।

दो फोन, दो पहचान

जांच में सामने आया है कि गिरफ्तार डॉक्टरों मुजम्मिल, आदिल और अन्य ने सुरक्षा एजेंसियों से बचने के लिए ‘ड्यूल फोन’ रणनीति अपनाई थी। हर आरोपी के पास दो से तीन मोबाइल फोन होते थे। एक “क्लीन फोन” जो, अपने नाम पर रजिस्टर्ड, निजी और पेशेवर काम के लिए। दूसरा “टेरर फोन” जो सिर्फ व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए पाकिस्तान स्थित हैंडलरों से संपर्क के लिए था। लाल किले के पास विस्फोटक से भरी गाड़ी चलाते समय मारे गए डॉ. उमर नबी भी इसी मॉड्यूल का हिस्सा था।

दिल्ली कार ब्लास्ट

फर्जी आधार कार्ड से लिए 'घोस्ट' सिम

अधिकारियों ने बताया कि इन दूसरे मोबाइल फोन में लगी सिम आरोपियों के नाम पर नहीं थीं। ये सिम कार्ड आम लोगों के नाम पर जारी किए गए थे, जिनके आधार विवरण का दुरुपयोग किया गया। कई मामलों में फर्जी आधार कार्ड का इस्तेमाल कर सिम हासिल की गई थी। यही वजह है कि इन सिम कार्डों को जांच एजेंसियां ‘घोस्ट सिम’ कह रही हैं।

जांच में चौंकाने वाले खुलासे

जांच में यह भी पता चला है कि आरोपी व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सिग्नल जैसे एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में मौजूद अपने हैंडलरों से निर्देश लेते थे। ऐप्स की ऐसी तकनीकी सुविधाओं का फायदा उठाया गया, जिनके जरिए बिना फिजिकल सिम के भी मैसेजिंग संभव थी।

पाक हैंडलरों से आईईडी और हमले की साजिश रचने के निर्देश

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पाकिस्तानी हैंडलरों ने आरोपियों को इंटरनेट और यूट्यूब के जरिए IED बनाने और हमले की साजिश रचने के निर्देश दिए। रेड फोर्ट के पास हुआ विस्फोट इसी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है। इस मामले की जांच फिलहाल राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) कर रही है।

Gaurav Kala

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गौरव काला: वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम सदस्य

संक्षिप्त विवरण: गौरव काला पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। वह विशेष रूप से हिमालयी राज्य उत्तराखंड के अलावा, दिल्ली-एनसीआर, मध्यप्रदेश, झारखंड समेत कई हिंदी बेल्ट के राज्यों की खबरें कवर कर रहे हैं।


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