कर्तव्य पथ पर पहली बार दिखाई देगी सेना की 'बैटल एरे' की दुर्लभ झलक, क्या होता है यह
गणतंत्र दिवस परेड में इस बार कर्तव्य पथ पर पहली बार सेना की रणभूमि व्यूह रचना यानी 'बैटल एरे' की दुर्लभ झलक दिखाई देगी। इसके तहत सेना अपने सशक्त और भविष्य के किसी भी तरह के युद्ध के लिए अपनी तैयारी का प्रदर्शन करेगी। यह ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को श्रद्धांजलि होगी।

गणतंत्र दिवस परेड में इस बार ऐतिहासिक कर्तव्य पथ पर पहली बार सेना की रणभूमि व्यूह रचना यानी 'बैटल एरे' की दुर्लभ झलक दिखाई देगी। इसके तहत सेना अपने सशक्त और भविष्य के किसी भी तरह के युद्ध के लिए अपनी तैयारी का प्रदर्शन करेगी। यह ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को श्रद्धांजलि होगी।
इसके अंतर्गत सेना के जवान पहली बार एक विशिष्ट और अनोखी रणभूमि व्यूह रचना "बैटल एरे" फार्मेशन में दिखाई देंगे। इसमें दर्शकों को आधुनिक युद्धक्षेत्र में एकीकृत,नेटवर्क-सक्षम और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी से लैस बल के रूप में सेना की तैनाती और युद्ध प्रणाली की दुर्लभ झलक देखने को मिलेगी।
सेना की झांकी में क्या-क्या होगा
सेना की झांकी में एक एकीकृत संचालन केंद्र को प्रदर्शित किया जाएगा, जो "सुदर्शन चक्र" के सुरक्षा कवच के अंतर्गत संयुक्त योजना, सटीक लक्ष्य निर्धारण और वायु रक्षा को दर्शाएगा तथा यह बताएगा कि आधुनिक युद्धों की योजना और उस पर उसी समय कैसे अमल किया जाता है।
परेड के इतिहास में पहली बार भारतीय सेना के मार्चिंग और यांत्रिक कॉलम को युद्ध-केंद्रित आक्रामक फार्मेशन में दिखाया जाएगा, जिसमें यह पता चलेगा कि सैन्य अभियानों के दौरान बलों का उपयोग किस क्रम में किया जाता है।
'बैटल एरे' क्या है
'बैटल एरे' एक तैयार, सक्षम और त्वरित जवाबी कार्रवाई करने वाली भारतीय सेना को प्रतिबिंबित करता है, जिसमें खुफिया, निगरानी और टोही तत्त्व, यांत्रिक बल, विमानन संसाधन, स्पेशन फोर्स, तोपखाना, वायु रक्षा और लॉजिस्टिक्स को एक सुसंगठित संचालन ढांचे में एकीकृत किया गया है।
यह व्यूह रचना डेटा-केंद्रित अभियानों, लंबी दूरी की सटीक मारक प्रणालियों और स्वदेशी प्लेटफार्मों के माध्यम से शत्रु क्षेत्र में गहराई तक निगरानी, निर्णय लेने और प्रहार करने की भारतीय सेना की क्षमता को दर्शाती है। साथ ही बहुस्तरीय वायु रक्षा कवच द्वारा पूर्ण सुरक्षा भी सुनिश्चित करती है।
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता को भी श्रद्धांजलि
' बैटल एरे' ऑपरेशन सिंदूर की उल्लेखनीय सफलता को भी श्रद्धांजलि है जो भारतीय सेना की युद्ध तत्परता, सहयोगी सेवाओं के साथ संयुक्तता तथा आत्मनिर्भर भारत के तहत विकसित स्वदेशी प्रणालियों पर बढ़ती निर्भरता को रेखांकित करता है।
रणभूमि व्यूह रचना भी दिखाई जाएगी
रणभूमि व्यूह रचना में टी-90 भीष्म और अर्जुन मुख्य युद्धक टैंक, बीएमपी-II सारथ और नामिस-II मिसाइल सिस्टम, एएलएच ध्रुव, रुद्र, अपाचे एएच-64ई और एलसीएच प्रचंड सहित विमानन संसाधन, एटैग्स, धनुष, सूर्यास्त्र, ब्रह्मोस सहित लंबी दूरी का तोपखाना तथा मिसाइल प्रणालियां और आकाश तथा मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल (एम आर सैम) वायु रक्षा प्रणालियां शामिल होंगी।
कई प्लेटफॉर्म और इकाइयां पहली बार भाग लेंगी
इसके अलावा कई प्लेटफॉर्म और इकाइयां पहली बार गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा लेंगी जो सेना के तेजी से हो रहे आधुनिकीकरण और तकनीकी परिवर्तन को प्रदर्शित करेंगी। इनमें भैरव बटालियन, शक्तिबाण रेजिमेंट और दिव्यास्त्र बैटरी, एडवांस्ड टोइड आर्टिलरी गन सिस्टम - 155 मिमी, लंबी दूरी की प्रहार क्षमता वाला यूनिवर्सल रॉकेट लॉन्चर सिस्टम, मानव रहित जमीनी वाहन, रोबोटिक डॉग, ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन से सुसज्जित युद्धक प्लेटफॉर्म और विशेष रूप से प्रशिक्षित बैक्ट्रियन ऊँट, जांस्कर टट्टू, शिकारी पक्षी और स्वान शामिल हैं।
परेड में सेना की छह मार्चिंग टुकड़ियां
परेड में सेना की छह मार्चिंग टुकड़ियां भाग लेंगी जिनमें संचालन भूमिका में मिश्रित स्काउट टुकड़ी, राजपूत रेजिमेंट, असम रेजिमेंट, जम्मू एवं कश्मीर लाइट इन्फैंट्री रेजिमेंट, रेजिमेंट ऑफ आर्टिलरी और भैरव बटालियन टुकड़ी शामिल है।
परेड में कुल 6065 सैनिक शामिल होंगे
इनके साथ नौसेना, वायुसेना, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों और दिल्ली पुलिस की टुकड़ियां भी शामिल होंगी। परेड में कुल 6,065 सैनिक शामिल होंगे और इसका नेतृत्व लेफ्टिनेंट जनरल भावनिश कुमार करेंगे। परेड में 12 सैन्य बैंड और 8 पाइप बैंड भी शामिल होंगे।

लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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