दिल्ली में स्वाइन फ्लू के दुर्लभ मामलों ने बढ़ाई चिंता, 3 दिन में 2 बहनों की मौत

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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राजधानी दिल्ली में मानसून के रफ्तार पकड़ने के साथ ही एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) और डेंगू के मामले बढ़ने लगे हैं। स्वाइन फ्लू से पिछले तीन दिन में दो बहनों की मौत ने चिंता बढ़ा दी है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राजधानी में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के 1349 और डेंगू के 1379 मामले सामने आ चुके हैं।

दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों ने बढ़ाई चिंता।
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों ने बढ़ाई चिंता।

राजधानी दिल्ली में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमण से दो मासूम बहनों की तीन दिन के भीतर मौत हो गई। दोनों बच्चियों में तेज बुखार और सर्दी-जुकाम जैसे शुरुआती लक्षण थे। पहले बड़ी बहन की जान गई और तीन दिन बाद करीब चार साल की छोटी बच्ची ने भी दम तोड़ दिया। इस घटना ने डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है।

बीएलके मैक्स अस्पताल के अनुसार, तीन अगस्त को तीन साल 11 महीने की बच्ची को बेहद गंभीर हालत में आपातकालीन विभाग में लाया गया था। जांच में इन्फ्लूएंजा ए (एच1एन1) संक्रमण की पुष्टि हुई। एमआरआई में उसके मस्तिष्क में एक्यूट नेक्रोटाइजिंग एन्सेफैलोपैथी (एएनईसी) के संकेत मिले। यह एच1एन1 संक्रमण से जुड़ी दुर्लभ, लेकिन जानलेवा दिमागी जटिलता मानी जाती है। अस्पताल ने बताया कि विशेषज्ञों की टीम ने गहन उपचार और सभी जरूरी जीवनरक्षक प्रयास किए, लेकिन बच्ची की हालत लगातार बिगड़ती गई। पांच अगस्त की सुबह 5:10 बजे उसकी मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि तीन दिन पहले ही बड़ी बेटी की मौत हुई थी, उसके लक्षण भी इसी तरह के थे। वहीं, सफदरजंग अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक जुलाई महीने में एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के 11 कंफर्म मरीज आए थे। इसी माह पांच पहुंचे हैं।

स्थिति पर नजर रख रही सरकार

दिल्ली में मानसून के रफ्तार पकड़ने के साथ ही एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) के मामले बढ़ने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राजधानी में इस साल अब तक स्वाइन फ्लू के 1,349 कंफर्म केस सामने आ चुके हैं। वहीं, डेंगू के 1379 मामले आए हैं। दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा कि सरकार एच1एन1 की स्थिति पर नजर रख रही है और सभी सरकारी अस्पतालों को इलाज की पर्याप्त सुविधाएं सुनिश्चित करने, प्रभावित व हॉटस्पॉट इलाकों पर कड़ी नजर रखने का निर्देश दिए गए हैं। अस्पताल इन दोनों बीमारियों का इलाज करने के लिए तैयार हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों को इस संक्रमण से खास सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।

स्वाइन फ्लू के मुख्य लक्षण

● तेज बुखार

● लगातार खांसी और गले में खराश

● शरीर और मांसपेशियों में तेज दर्द

● अत्यधिक थकान और कमजोरी

● सांस लेने में तकलीफ या सीने में दर्द

क्या करें और क्या न करें

● विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार साबुन से हाथ धोएं या सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें।

● खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रूमाल या कोहनी से ढकें।

● भीड़भाड़ वाली जगहों पर जरूरत पड़ने पर मास्क पहनें और संपर्क से बचें।

● बुखार या फ्लू जैसे लक्षण होने पर घर पर आराम करें और बिना डॉक्टर की सलाह के दवा न लें।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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