राजीव गांधी फाउंडेशन को RTI के दायरे में लाने की मांग खारिज; दिल्ली HC का बड़ा फैसला
दिल्ली हाई कोर्ट ने राजीव गांधी फाउंडेशन को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने वाली याचिका खारिज कर दी। याचिका में सरकारी फंडिंग और सार्वजनिक कार्यों का हवाला देकर संस्था से जानकारी मांगी गई थी।

हेमलता कौशिक, नई दिल्ली
दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार को राजीव गांधी फाउंडेशन को सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी। जस्टिस स्वर्ण कांता की पीठ ने साल 2011 की याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ता कई तारीखों पर पेश नहीं हुआ। आरटीआई कानून के तहत हर सार्वजनिक प्राधिकरण को अपने सभी रिकॉर्ड रखने होते हैं। अपने फैसलों को सही ठहराना और समझाना होता है।
CIC के आदेश को दी गई थी चुनौती
यदि किसी संस्था को सार्वजनिक प्राधिकरण घोषित किया जाता है तो वह कानूनन पारदर्शिता एवं जानकारी देने की बाध्यताओं के दायरे में आ जाती है। यह याचिका दिल्ली के वकील षणमुगा पात्रो ने दायर की थी। उन्होंने मुख्य सूचना आयोग (सीआईसी) के 15 अक्टूबर, 2010 के उस आदेश को चुनौती दी थी जिसमें उनकी याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी गई थी कि फाउंडेशन सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है।
मांगा था सालाना ऑडिटेड रिकॉर्ड
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले राजीव गांधी फाउंडेशन (आरजीएफ) से अपने सालाना ऑडिटेड अकाउंट्स रिकॉर्ड पर रखने को कहा था ताकि यह तय किया जा सके कि संस्था आरटीआई कानून के दायरे में आती है या नहीं। पीठ ने वंचित वर्गों के कल्याण के लिए काम करने वाली संस्था आरजीएफ को निर्देश दिया था कि वह अपनी शुरुआत से लेकर 2010-2011 तक के ऑडिटेड अकाउंट्स साल-दर-साल जमा करे।
याचिका में क्या दलील?
याचिकाकर्ता के अनुसार, फाउंडेशन को सरकार से फंड मिल रहा है। वह बड़े पैमाने पर सार्वजनिक गतिविधियों में शामिल है। ऐसी गतिविधियों के कारण उसने सार्वजनिक प्राधिकरण का स्वरूप ले लिया है। पात्रों ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत एक आवेदन दायर करके आरजीएफ के संविधान की कॉपी, फाउंडेशन के अपडेटेड उप-नियमों, नियमों व कानूनों की प्रति व उसके संगठनात्मक ढांचे को दिखाने वाले दस्तावेजों की कॉपी मांगी थी।
आरजीएफ की क्या दलीलें?
साल 2009 में आरजीएफ ने पात्रों को जानकारी देने से इनकार कर दिया था, यह कहते हुए कि फाउंडेशन सार्वजनिक प्राधकिरण नहीं है। आरजीएफ के वकील ने दावा किया कि फाउंडेशन किसी अधिसूचना या सरकारी आदेश से नहीं बनाया गया था। इसलिए यह सार्वजनिक प्राधिकरण नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि फाउंडेशन को सरकार से केवल चार प्रतिशत फंडिंग मिली है, जो आरजीएफ के कुल बजट की तुलना में बहुत कम है। इसलिए यह आरटीआई कानून की धारा 2(एच) के दायरे में नहीं आता है।
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Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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