'पहले हड्डियां तोड़ीं और अब FIR दर्ज कर रहे' राहुल गांधी ने मोदी-शाह को सावधान किया

लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता ने कहा कि पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं। अब आप FIR दर्ज कर रहे हैं। आप भारत के भविष्य के साथ कैसा बर्ताव करते हैं। कांग्रेस नेता ने सरकार को सावधान रहने की सलाह भी दी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी।

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर अपना हमला तेज कर दिया है। कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि सरकार FIR दर्ज करके और सोशल मीडिया अकाउंट्स को हटाकर 'जेन जेड' की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। एक्स पर एक पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह- आप 'जेन जेड' को डरा-धमकाकर चुप नहीं करा सकते। उन्होंने कहा कि पहले आपने उनकी हड्डियां तोड़ीं। अब आप FIR दर्ज कर रहे हैं और उनके अकाउंट्स बंद करवा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने कहा कि आप भारत का अतीत हैं। भारत के भविष्य के साथ कैसा बर्ताव करते हैं, इसे लेकर सावधान रहें।

गुरुवार को राहुल गांधी ने छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी वाली एक स्वतंत्र और उच्च-स्तरीय समिति बनाने की मांग की। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 20 जुलाई को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की निष्पक्ष जांच की मांग की। गांधी ने एक्स पर कहा कि छात्र न्याय के हकदार हैं। हमारे छात्रों के खिलाफ हुई बर्बरता की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र उच्च-स्तरीय समिति बनाई जानी चाहिए।

राहुल गांधी ने एक वीडियो भी शेयर किया जिसमें कथित तौर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई दिखाई गई है। वीडियो में पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज करते दिख रहे हैं। साथ ही क्लिप में सादे कपड़ों में एक आदमी तिरंगा लिए हुए एक छात्र प्रदर्शनकारी को पुलिस कार्रवाई के दौरान सड़क पर जोर से पटकते हुए भी दिखाई दे रहा है।

विपक्षी सांसदों ने गुरुवार को संसद परिसर में मकर द्वार पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर में चंदे के कथित गबन को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इंडिया ब्लॉक की कई पार्टियों के सांसद सुबह करीब 10:30 बजे मकर द्वार पर जमा हुए। उन्होंने हाथ में प्लेकार्ड लिए हुए यह सवाल उठाया कि 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का आदेश किसने दिया था।

सांसदों ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि मंदिर के लिए दिए गए दान में कथित वित्तीय गड़बड़ियों और छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग को लेकर केंद्र से जवाबदेही की मांग करते हुए नारे भी लगाए। यह विरोध प्रदर्शन राज्यसभा में 'सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026' पर विचार और उसे पारित करने की प्रक्रिया शुरू होने से कुछ घंटे पहले हुआ।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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