मां नहीं चाहती थीं चुनाव लड़ूं, फिर रखीं 2 शर्तें; राघव चड्ढा की राजनीति में आने की दिलचस्प कहानी
चुनावी राजनीति में कदम रखने से पहले राघव चड्ढा को अपने घर में ही सबसे बड़ी परीक्षा देनी पड़ी। जहां पिता ने तुरंत हरी झंडी दे दी, वहीं मां इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं थीं। उन्हें मनाने में पूरे छह महीने लग गए और जब आखिरकार मां मानीं, तो उन्होंने बेटे के सामने दो ऐसी शर्तें रखीं।

आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा इन दिनों राजनीतिक सुर्खियों में बने हुए हैं। चुनावी राजनीति में कदम रखने से पहले राघव चड्ढा को अपने घर में ही सबसे बड़ी परीक्षा देनी पड़ी। जहां पिता ने तुरंत हरी झंडी दे दी, वहीं मां इस फैसले से पूरी तरह सहमत नहीं थीं। उन्हें मनाने में पूरे छह महीने लग गए और जब आखिरकार मां मानीं, तो उन्होंने बेटे के सामने दो ऐसी शर्तें रखीं। जानिए राघव चड्ढा की मां ने क्या शर्तें रखीं थीं।
मां को मनाने में लगे 6 महीने
आप की अदालत में बातचीत के दौरान राघव चड्ढा ने बताया- मेरी पार्टी ने मुझसे कहा कि 2019 का लोकसभा चुनाव आपको लड़ना है। मैंने कहा- मैं मां-बाप से बात करके बताऊंगा। घर गया तो मेरे फादर साहब ने मुझे इजाजत दे दी। लेकिन मेरी मां को मनाने में छह महीने लग गए। राघव चड्ढा ने बताया- मां नहीं चाहती थी कि मैं चुनावी राजनीति में जाऊं। अंततः जब उन्होंने मुझे इजाजत दी, तो मेरे सामने 2 शर्ते रखीं।
मां ने पहली शर्त क्या रखी
राघव चड्ढा ने इन शर्तों का जिक्र करते हुए बताया- मां ने मुझसे दो शर्तें लिखवाईं कि तुमको ये शर्तें पूरी करनी होंगी, चाहे चुनाव का नतीजा जो भी आए। पहली शर्त थी- तुम अपने सीए के करियर की पीछे नहीं करोगे। उस पर ध्यान दोगे और उसे आगे बढ़ाओगे।
राघव ने इसके पीछे की वजह भी बताई। मां बोली- आज तुम्हारा परिवार साधन संपन्न है। ज्यादा पैसे-वैसे की जरूरत नहीं है। लेकिन, आगे जाकर परमात्मा न करे कि तुमको पैसे और संसधान की जरूरत पड़े। तो राजनीति से पैसे नहीं कमाना है। पैसे अपने सीए के प्रोफेशन से कमाने हैं।
मां ने दूसरी शर्त क्या रखी थी
इसके बाद राघव ने दूसरी शर्त बताई। दूसरा वादा मां ने ये लिया- अब तेरी उम्र हो गई है शादी की। चुनाव के बाद जो भी नतीजा आए, उसे देखे बगैर अच्छी सी लड़की से शादी कर लेना। इसी इंटरव्यू के दौरान राघव चड्ढा ने राजनीति में एंट्री और बचपन के सपने पर भी बात की।
नहीं पूरा हुआ बचपन का सपना
राघव चड्ढा ने बताया- मुझे याद है कि जब भी क्लास टीचर हम सब बच्चों को खड़ा करके पूछती थीं कि तुम जीवन में आगे चलकर क्या बनना चाहते हो। इस पर मैं हमेशा कहता था कि मैं फौज ज्वाइन करूंगा। मैं ऐसे परिवार से आया हूं, जहां बहुत फौजी रहे हैं। इसलिए हमेशा से मन था कि इंडियन आर्मी ज्वाइन करनी है।
फिर शामिल हो गए आप में
राघव ने अफसोस जाहिर करते हुए कहा- हालांकि वो सपना (फौजी बनने का) तो पूरा नहीं हुआ। लेकिन फिर सीए बना। फिर कुछ हालात ऐसे बने कि अन्ना हजारे आंदोलन खड़ा हुआ, जहां साधारण वॉलिंटियर की तरह मैं भी आगे खड़ा हो गया योगदान देने। इसके बाद एक राजनीतिक दल बन गया, उसके फाउंडिंग मेंबर बन गए और फिर कहानी चल पड़ी।
लेखक के बारे में
Ratan Guptaरतन गुप्ता एक डिजिटल हिंदी जर्नलिस्ट/ कॉन्टेंट प्रोड्यूसर हैं। वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान की स्टेट न्यूज टीम के साथ काम कर रहे हैं। वह क्राइम, राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर न्यूज आर्टिकल और एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखते हैं।
रतन गुप्ता वर्तमान में लाइव हिन्दुस्तान (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में कंटेंट प्रोड्यूसर के तौर पर स्टेट न्यूज टीम में काम करते हैं। इस टीम में हिंदी पट्टी के 8 राज्यों दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, गुजरात से जुड़ी खबरों की कवरेज करते हैं। उनका लेखन खास तौर से क्राइम, राजनीति और सामाजिक मुद्दों पर केंद्रित रहता है।
लाइव हिंदुस्तान में बीते 2 साल से काम करते हुए रतन ने ब्रेकिंग न्यूज, राजनीतिक घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी खबरों पर लगातार लेखन किया है। इसके साथ ही वह एक्सप्लेनर स्टोरीज लिखने में भी विशेष रुचि रखते हैं, जहां जटिल मुद्दों को सरल और तथ्यपरक भाषा में पाठकों के सामने रखते हैं।
रतन गुप्ता ने बायोलॉजी में ग्रेजुएशन किया है, जिसके बाद उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान, नई दिल्ली से हिंदी पत्रकारिता की पढ़ाई की है। साइंस बैकग्राउंड होने के कारण उनकी न्यूज और एनालिसिस स्टोरी में साइंटिफिक टेंपरामेंट, लॉजिकल अप्रोच और फैक्ट-बेस्ड सोच साफ दिखाई देती है। वह किसी भी मुद्दे पर रिपोर्टिंग करते समय दोनों पक्षों की बात, मौजूद तथ्यों और आधिकारिक स्रोतों को प्राथमिकता देते हैं, ताकि यूजर तक संतुलित और भरोसेमंद जानकारी पहुंचे।
इसके साथ ही आईआईएमसी की एकेडमिक पढ़ाई ने उन्हें रिपोर्टिंग, न्यूज प्रोडक्शन, मीडिया एथिक्स और पब्लिक अफेयर्स की गहरी समझ दी है। इसका सीधा असर उनके लेखन की विश्वसनीयता और संतुलन में दिखाई देता है।
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