
राघव चड्ढा एक दिन के लिए बने ब्लिंकिट डिलीवरी एजेंट, घर-घर जाकर पहुंचाए ऑर्डर; देखें VIDEO
संसद से लेकर सड़क तक गिग वर्कर्स के हक के लिए लगातार आवाज बुलंद कर रहे ‘आप’ सांसद राघव चड्ढा ने अब एक नया तरीका अख्तियार किया है। उन्होंने ब्लिंकिट के डिलीवरी एजेंट के तौर पर बिताए अपने एक दिन के कुछ पलों का एक छोटा सा वीडियो शेयर सोशल मीडिया पर किया है।
संसद से लेकर सड़क तक गिग वर्कर्स के हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब एक नया तरीका अख्तियार किया है। राघव चड्ढा ने क्विक-कॉमर्स प्लैटफॉर्म ब्लिंकिट के डिलीवरी एजेंट के तौर पर बिताए अपने एक दिन के कुछ पलों का एक छोटा सा वीडियो शेयर सोशल मीडिया पर किया है।
‘आप’ सांसद का यह प्रयास डिलीवरी पार्टनर्स के सामने हर दिन होने वाली परेशानियों को समझने के लिए था। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे उन्होंने संसद के साथ ही पब्लिक प्लैटफॉर्म पर भी उठा चुके हैं। उन्होंने देश ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म की गिग इकॉनमी में सुधार और डिलीवरी वर्कर्स के लिए काम करने की बेहतर स्थितियों पर जोर दिया है।
संसद से लेकर सड़क तक गिग वर्कर्स के हक के लिए आवाज बुलंद कर रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने अब एक नया तरीका अख्तियार किया है। राघव चड्ढा ने क्विक-कॉमर्स प्लैटफॉर्म ब्लिंकिट के डिलीवरी एजेंट के तौर पर बिताए अपने एक दिन के कुछ पलों का एक छोटा सा वीडियो शेयर सोशल मीडिया पर किया है।
‘आप’ सांसद का यह प्रयास डिलीवरी पार्टनर्स के सामने हर दिन होने वाली परेशानियों को समझने के लिए था। यह एक ऐसा मुद्दा है जिसे उन्होंने संसद के साथ ही पब्लिक प्लैटफॉर्म पर भी उठा चुके हैं। उन्होंने देश ई-कॉमर्स प्लैटफॉर्म की गिग इकॉनमी में सुधार और डिलीवरी वर्कर्स के लिए काम करने की बेहतर स्थितियों पर जोर दिया है।
राघव चड्ढा द्वारा सोमवार को सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में वह ब्लिंकिट डिलीवरी एजेंट की पीली यूनिफॉर्म पहने, हेलमेट लगाए हैं और एक अन्य डिलीवरी वर्कर की स्कूटी पर पीछे बैठकर रात को शहरभर में सामानों की डिलीवरी करते हुए दिख रहे हैं।
राघव चड्ढा ने अपने दिनभर के वीडियो को शेयर करते हुए कैप्शन में लिखा, “बोर्डरूम से दूर, जमीनी स्तर पर मैंने उनका दिन जिया।”
'आप' सांसद का यह वीडियो गिग वर्कर्स की तरफ से पॉलिसी में बदलाव की बढ़ती मांगों के बीच आया है, जिसमें 10-मिनट मॉडल जैसी अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी टाइमलाइन को खत्म करने की मांग भी शामिल है, जिसके बारे में वर्कर्स का कहना है कि इससे दबाव और सुरक्षा जोखिम बढ़ते हैं।
गिग वर्कर्स के मुद्दों पर फोकस
गौरतलब है कि राघव चड्ढा पिछले कुछ महीनों से लगातार गिग वर्कर्स की स्थितियों के बारे में आवाज उठा रहे हैं। उन्होंने एक डिलीवरी एजेंट को लंच पर भी बुलाया था और वेतन, सुरक्षा और नौकरी की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को उजागर करने के लिए उसका इंटरव्यू लिया था।
उन्होंने हाल ही में क्विक कॉमर्स और फूड डिलीवरी प्लैटफॉर्म के बिजनेस मॉडल की आलोचना करते हुए कहा था कि अगर कंपनियों को काम करने के लिए पुलिस सपोर्ट की जरूरत पड़ती है, तो यह “इस बात का सबूत” है कि सिस्टम “काम नहीं करता”।
राघव चड्ढा की ये टिप्पणियां डिलीवरी वर्कर्स की हालिया हड़तालों के दौरान जोमैटो और ब्लिंकिट के फाउंडर दीपेंद्र गोयल की टिप्पणियों के बाद आईं। गोयल ने हड़ताल करने वाले वर्कर्स को “बदमाश” बताया था, और यह तर्क दिया था कि डिलीवरी प्लैटफॉर्म ने बड़े पैमाने पर नौकरियां पैदा की हैं।
चड्ढा ने ‘एक्स’ पर जवाब देते हुए, लिखा, “पूरे भारत में डिलीवरी पार्टनर्स ने बुनियादी सम्मान, उचित वेतन, सुरक्षा, तय नियमों और सोशल सिक्योरिटी की मांग को लेकर हड़ताल की। प्लैटफॉर्म की तरफ से जवाब में उन्हें ‘बदमाश’ कहा गया और मजदूरों की मांग को कानून-व्यवस्था का मामला बना दिया गया। यह न सिर्फ अपमानजनक है, बल्कि खतरनाक भी है।” उन्होंने आगे कहा, “उचित वेतन मांगने वाले वर्कर्स अपराधी नहीं हैं।”
नए साल की शाम की डिलीवरी
हड़तालों का सीमित असर होने के बाद, दीपेंद्र गोयल ने ‘एक्स’ पर कहा कि जोमैटो और ब्लिंकिट ने नए साल की शाम को रिकॉर्ड तेजी से डिलीवरी की, "पिछले कुछ दिनों में हममें से कई लोगों ने हड़ताल की जो अपीलें सुनीं, उनका कोई असर नहीं हुआ।"
उन्होंने रात के डिलीवरी आंकड़े शेयर करते हुए लिखा, “स्थानीय सुरक्षा एजेंसियों से मिले सपोर्ट से मुट्ठी भर बदमाशों को काबू में रखने में मदद मिली।”
राघव चड्ढा ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उन्होंने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान गिग वर्कर्स का मुद्दा पहले ही उठाया था और वे इसे आगे भी उठाते रहेंगे। उन्होंने कहा, "यह एक ऐसी लड़ाई है जिसे मैं पूरा करके रहूंगा। संसद में, संसद के बाहर, जब तक जवाबदेही तय नहीं हो जाती। जिन मजदूरों ने ऑर्डर दर ऑर्डर, किलोमीटर दर किलोमीटर ये प्लैटफॉर्म बनाए हैं, वे इंसान जैसा बर्ताव किए जाने की मांग करने पर 'बदमाश' कहलाने के बजाय बेहतर के हकदार हैं।"





