दिल्ली में हार और पंजाब से राघव चड्ढा-संदीप पाठक साइडलाइन; कैसे एक घटना ने AAP को तोड़ा?
राघव चड्ढा और संदीप पाठक समेत 7 सांसदों का 'आप' छोड़ना एक बड़ा झटका है। बागी सांसद विक्रमजीत साहनी ने स्पष्ट किया कि आंतरिक कलह ही इस बगावत की मुख्य वजह बनी। कैसे एक घटना ने AAP को तोड़ा? इस रिपोर्ट में जानें…

राघव चड्ढा ने शुक्रवार को अशोक मित्तल और संदीप पाठक समेत पार्टी के 7 राज्यसभा सदस्यों के साथ आम आदमी पार्टी (आप) को तगड़ा झटका दिया था। भले ही इसे एक बड़ा धमाका माना जा रहा है लेकिन आम आदमी पार्टी की राज्यसभा टीम में पिछले एक साल से अधिक समय से तनातनी बरकरार थी। पंजाब चुनाव में जीत के मुख्य रणनीतिकारों में शामिल संदीप पाठक को दिल्ली चुनावों में मिली हार के बाद धीरे-धीरे किनारे लगाया जाने लगा। इससे वह खुद को असहज पा रहे थे। बागी 7 सांसदों में शामिल विक्रमजीत सिंह साहनी ने बगावत की पूरी कहानी बयां की।
कैसे बढ़ी नाराजगी?
विक्रमजीत सिंह साहनी ने NDTV को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि आम आदमी पार्टी की पंजाब में सफलता के पीछे संदीप पाठक और राघव चड्ढा का हाथ था। नाराजगी की शुरुआत तब हुई जब संदीप पाठक को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया। उन्होंने मुझसे कहा कि वह पार्टी के रवैये से बहुत निराश हैं। उनको कोई काम नहीं दिया जा रहा है। सांसदों की नाराजगी तब और बढ़ गई जब राघव चड्ढा को संसद के ऊपरी सदन में पार्टी के उप-नेता पद से अचानक हटा दिया गया।
राघव चड्ढा और संदीप पाठक की नाराजगी की बड़ी भूमिका
विक्रमजीत ने बताया कि राघव चड्ढा और संदीप पाठक दोनों ही पार्टी से नाखुश थे। हमको लगा कि उन्हीं की वजह से हम राज्यसभा में तक पहुंचे हैं। वे ही आम आदमी पार्टी के मुख्य स्तंभ हैं। राघव चड्ढा का कहना था कि उनको किनारे कर दिया गया है। इसके बाद उन्होंने खुद को पार्टी की गतिविधियों से अलग कर लिया। राघव चड्ढा और संदीप पाठक दोनों की नाराजगी ने बगावत में बड़ी भूमिका निभाई। इसके साथ ही बगावत की एक और कहानी सामने आई।
धरा रह गया केजरीवाल का प्लान
वहीं सूत्रों की मानें तो अरविंद केजरीवाल ने कम से कम पांच नेताओं से कहा था कि यदि वे खुश नहीं हैं और अभी पार्टी छोड़ देते हैं तो उन्हें अगले कार्यकाल में चुनाव के लिए टिकट दिए जाएंगे। उन्होंने शुक्रवार शाम को इन नेताओं के साथ इस मामले पर चर्चा करने की योजना बनाई थी लेकिन सांसदों ने तय बैठक से कुछ घंटे पहले ही पार्टी छोड़ने का ऐलान कर दिया। साहनी की मानें तो वह बुधवार को केजरीवाल से मिले थे। उन्होंने उनको BJP में जाने की अपनी योजना के बारे में बताया था।
ऐसे हो गया खेल
साहनी ने कहा कि मैं बुधवार को अरविंद केजरीवाल से मिला। मैंने उनसे कहा कि यदि एक-दो सांसद (राज्यसभा से) इस्तीफा भी दे देते हैं तो भी किसी का कोई फायदा नहीं होगा। उस समय तक उनको यकीन नहीं था कि संदीप पाठक भी इस्तीफा दे देंगे। अगले दिन मुझे पता चला कि संदीप पाठक और दूसरे लोग भी BJP में जा रहे हैं। फिर मैंने सोचा कि क्यों ना पंजाब की भलाई के लिए मैं भी आगे बढ़ जाऊं।
हम पंजाब के साथ
साहनी ने सात बागी सांसदों को आम आदमी पार्टी की ओर से 'पंजाब का गद्दार' कहे जाने पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पार्टी तो कुछ भी कह सकती है। सच्चाई यह है कि हमने पंजाब के साथ गद्दारी नहीं की। हम पंजाब और पंजाबियों के लिए खड़े हैं। कुछ दिन पहले ही अमित शाह से मिले थे। हमने उनसे पंजाब की समस्याओं के बारे में बताया था। हमारा मानना है कि पंजाब का विकास तभी हो सकता है जब केंद्र सरकार का समर्थन मिले। राज्य और केंद्र के बीच टकराव से सूबे का भला नहीं हो सकता है।
लेखक के बारे में
Krishna Bihari Singhकृष्ण बिहारी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम का हिस्सा (दिल्ली-NCR, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, राजस्थान और गुजरात )
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