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नोएडा के 3 और सेक्टरों में बनेंगी पजल पार्किंग, जानें कहां-कहां मिलेगी सुविधा

नोएडा के 3 और सेक्टरों में बनेंगी पजल पार्किंग, जानें कहां-कहां मिलेगी सुविधा

संक्षेप:

नोएडा शहर के तीन और सेक्टरों में पजल पार्किंग बनेंगी। पहले से प्रस्तावित सेक्टर-63 की पजल पार्किंग के लिए जारी टेंडर में दो एजेंसियां आगे आईं हैं। अब इनके कागजातों की जांच की जाएगी। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।  

Jan 08, 2026 10:46 am ISTPraveen Sharma हिन्दुस्तान, नोएडा
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नोएडा शहर के तीन और सेक्टरों में पजल पार्किंग बनेंगी। पहले से प्रस्तावित सेक्टर-63 की पजल पार्किंग के लिए जारी टेंडर में दो एजेंसियां आगे आईं हैं। अब इनके कागजातों की जांच की जाएगी। इसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। शहर में पार्किंग बड़ी समस्या बनती जा रही है। सड़कों पर पार्किंग होने से जाम की समस्या हो रही है। इसको देखते हुए नोएडा प्राधिकरण ने पिछले साल कुछ जगह पजल पार्किंग बनाने का निर्णय लिया था।

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पहली पजल पार्किंग सेक्टर-63 में बनाने का निर्णय लिया गया था। इसके लिए जारी किए गए टेंडर में दो एजेंसी आगे आईं हैं। अधिकारियों ने बताया कि एजेंसियों के कागजातों की जांच के बाद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

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कहां-कहां बनेंगी पार्किंग

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि शहर में तीन और स्थानों पर पजल पार्किंग बनाई जाएंगी। दूसरी पार्किंग सेक्टर-124 में, तीसरी सेक्टर-15 अलका सिनेमा के पास और चौथी पार्किंग सेक्टर-62 की तरफ बनाने की तैयारी है। ऑटोमेटिड पजल पार्किंग एक पजल गेम की तरह है। इसमें जितने पार्किंग स्लॉट होते हैं, उतने ही स्टैंड होते हैं। जो ऊपर, नीचे, दाएं और बाएं होते रहते हैं। एक कार को इस पार्किंग में खड़ा करने में तीन से छह मिनट का समय लगता है। बहमुंजिला पार्किंग में यही समय 10-15 मिनट का होता है। नोएडा में 4 से 6 फ्लोर तक की ऑटोमेटिड पजल पार्किंग बनेंगी। इसके प्रत्येक फ्लोर पर 25 कार आसानी से खड़ी हो सकेंगी। इस तरह की पार्किंग के निर्माण में ज्यादा जगह की जरूरत नहीं होती। बहुत कम जगह में पांच से छह फ्लोर तक की बन सकती है। ये पूरी पार्किंग सेंसर बेस्ड होती है, इसलिए चोरी से लेकर टूट फूट का खतरा नहीं होता। इसके संचालन के लिए ज्यादा लोगों की जरूरत नहीं पड़ती।

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सेंसर के कारण हादसे का खतरा कम

दरअसल ये पार्किंग ऑटोमैटिड है। इसमें गाड़ियां ग्राउंड से एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर में शिफ्ट होती हैं। उसी तरह नीचे आती हैं। यह पूरा काम मशीनों के जरिये होता है, इसलिए इसमें सेंसर लगाए गए हैं। यदि कोई बच्चा या जानवर गलती से पार्किंग के अंदर आ जाए तो ऑटोमैटिक जहां कार है, वहीं स्थिर हो जाएगी। वह नीचे नहीं आएगी ताकि इसके नीचे कोई दब न जाए। इसकी एक सीमा तय की जा सकती है, जिसे पीली लाइन से इंडीकेट किया जा सकता है।

Praveen Sharma

लेखक के बारे में

Praveen Sharma
प्रवीण शर्मा लाइव हिन्दुस्तान में स्टेट टीम का हिस्सा हैं। एक दशक से भी अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे प्रवीण साल 2014 में डिजिटल पत्रकारिता में आने से पहले प्रिंट मीडिया में भी काम कर चुके हैं। प्रवीण ने अपने करियर की शुरुआत हरिभूमि अखबार से की थी और वर्ष 2018 में लाइव हिन्दुस्तान से जुड़े। प्रवीण मूलरूप से उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के निवासी हैं, लेकिन इनका जन्म और स्कूली शिक्षा दिल्ली से हुई है। हालांकि, पत्रकारिता की पढ़ाई इन्होंने हरियाणा के हिसार स्थित गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय से की है। वह दिल्ली-एनसीआर की सियासी घटनाओं के साथ ही जन सरोकार से जुड़ी सभी छोटी-बड़ी खबरों पर भी पैनी नजर रखते हैं। और पढ़ें
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