हम ऐसे अखाड़े में उतर आए जहां महाभारत भी बहुत छोटी...; संपत्ति विवाद में रानी कपूर की याचिका पर SC
सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर की याचिका पर 14 मई को सुनवाई करने पर सहमति जता दी है। रानी कपूर ने याचिका में अपनी बहू प्रिया कपूर और अन्य लोगों को मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक 'आरके फैमिली ट्रस्ट' के कामकाज में हस्तक्षेप से रोकने का अनुरोध किया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दिवंगत उद्योगपति संजय कपूर की मां रानी कपूर की याचिका पर 14 मई को सुनवाई करने पर सहमति जता दी है। रानी कपूर ने याचिका में अपनी बहू प्रिया कपूर और अन्य लोगों को मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक 'आरके फैमिली ट्रस्ट' के कामकाज में हस्तक्षेप से रोकने का अनुरोध किया है। इस विवाद में भारत के पूर्व सीजेआई डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया गया था।
डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ बनाया था
सुप्रीम कोर्ट ने सात मई को 80 साल की रानी कपूर और उनकी बहू प्रिया कपूर के बीच 'फैमिली ट्रस्ट' को लेकर जारी विवाद में भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया था। इस मामले का मंगलवार को जस्टिस जे बी पारदीवाला और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ के समक्ष उल्लेख किया गया। पीठ ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा लग रहा है कि हम ऐसे अखाड़े में उतर आए हैं जहां महाभारत भी बहुत छोटी लगेगी। इसके बाद पीठ ने याचिका को 14 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
रानी कपूर ने नई याचिका लगाई
अपनी नई याचिका में रानी कपूर ने आरोप लगाया है कि प्रिया कपूर और अन्य लोग विवादित पारिवारिक संपत्ति से जुड़ी कुछ कंपनियों और परिसंपत्तियों पर नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। याचिका में यह आशंका भी जताई गई है कि मध्यस्थता प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान संपत्तियों को बेचने या ट्रांसफर करने की कोशिश की जा सकती है।
प्रिया कपूर को रोकने की मांग
रानी कपूर ने शीर्ष कोर्ट से अनुरोध किया है कि मध्यस्थता प्रक्रिया पूरी होने तक प्रिया कपूर और अन्य लोगों को ट्रस्ट और परिवार से जुड़ी कुछ कंपनियों के कामकाज में हस्तक्षेप करने से रोका जाए। शीर्ष कोर्ट ने सात मई को कहा था कि सभी पक्ष खुले मन से मध्यस्थता प्रक्रिया में भाग लें। पीठ ने कहा था कि हम सभी पक्षों से अनुरोध करते हैं कि वे सार्वजनिक रूप से कोई बयान न दें और सोशल मीडिया पर भी कुछ न कहें। यह पारिवारिक मामला है, इसलिए सभी का प्रयास होना चाहिए कि विवाद जल्द सुलझे और पूरे मामले का अंत हो।
…तो यह सभी के हित में होगा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि दोनों पक्ष मध्यस्थ के समक्ष विवाद सुलझा लेते हैं तो यह सभी के हित में होगा, अन्यथा यह मुद्दा लंबी कानूनी लड़ाई में बदल सकता है। पीठ ने स्पष्ट किया था कि यह मध्यस्थता केवल वर्तमान मामले तक सीमित रहेगी। सुप्रीम कोर्ट ने 27 अप्रैल को प्रिया कपूर और अन्य से उस मुकदमे पर जवाब मांगा था, जिसमें संजय कपूर की मां ने परिवार के ट्रस्ट को अमान्य घोषित करने की मांग की है। पीठ ने रानी कपूर की उस याचिका पर प्रिया कपूर और अन्य को नोटिस जारी किया था, जिसमें आरोप लगाया गया था कि अक्टूबर 2017 में उनके नाम पर गठित ट्रस्ट जाली, फर्जी और धोखाधड़ीपूर्ण तरीके से बनाए गए दस्तावेजों का परिणाम है।
संपत्तियों पर यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध
संपत्ति और परिसंपत्तियों के नियंत्रण को लेकर कानूनी कार्यवाही दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है और सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में ट्रस्ट की सभी संपत्तियों के ट्रांसफर पर यथास्थिति बनाए रखने का अनुरोध किया गया है। रानी कपूर ने अपने मुकदमे में अदालत से अनुरोध किया है कि उनकी बहू और पोते पोतियों समेत प्रतिवादियों को 'आरके फैमिली ट्रस्ट' का किसी भी रूप में उपयोग या संचालन करने से स्थायी रूप से रोका जाए। याचिका में कहा गया है कि वह अपने दिवंगत पति सुरिंदर कपूर की पूरी संपत्ति की इकलौती उत्तराधिकारी हैं। सुरिंदर कपूर 'सोना ग्रुप ऑफ कंपनीज' सहित कई व्यवसायों के संस्थापक और संचालक थे।
'आरके फैमिली ट्रस्ट' में ट्रांसफर करते समय धोखाधड़ी
याचिका के अनुसार, उनकी संपत्तियों को 'आरके फैमिली ट्रस्ट' में ट्रांसफर करते समय उनके साथ धोखाधड़ी की गई। याचिका में दावा किया गया कि अपनी मृत्यु तक संजय कपूर ने कभी रानी कपूर को यह नहीं बताया कि उनसे उनके सभी अधिकार, संपत्तियां और विरासत छीन ली गई हैं और न ही उन्हें कथित आरके फैमिली ट्रस्ट की कोई प्रति दी गई।
इस बीच, अभिनेत्री करिश्मा कपूर के दोनों बच्चों द्वारा अपने दिवंगत पिता की कथित वसीयत की प्रामाणिकता को चुनौती देने वाली याचिका भी दिल्ली हाई कोर्ट में लंबित है। बच्चों ने प्रिया कपूर पर ‘लालची’ होने का आरोप लगाया है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
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