बिना सूचना फीस नहीं बढ़ा पाएंगे प्राइवेट स्कूल, 60 दिन पहले देनी होगी जानकारी; लिमिट भी तय

Subodh Kumar Mishra हिन्दुस्तान, गाजियाबाद
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गाजियाबाद जिले के निजी स्कूल अब फीस बढ़ोतरी को लेकर मनमानी नहीं कर पाएंगे। स्कूलों की लूट को रोकने के लिए विभाग ने नया नियम बनाया है, जिसके तहत स्कूलों को फीस बढ़ाने से दो महीने पहले शिक्षा विभाग को जानकारी देनी होगी। इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति का गठन होगा।

बिना सूचना फीस नहीं बढ़ा पाएंगे प्राइवेट स्कूल, 60 दिन पहले देनी होगी जानकारी; लिमिट भी तय

गाजियाबाद जिले के निजी स्कूल अब फीस बढ़ोतरी को लेकर मनमानी नहीं कर पाएंगे। स्कूलों की लूट को रोकने के लिए विभाग ने नया नियम बनाया है, जिसके तहत स्कूलों को फीस बढ़ाने से दो महीने पहले शिक्षा विभाग को जानकारी देनी होगी। इसकी निगरानी के लिए जिला स्तर पर समिति का गठन होगा।

जिले में दो हजार से अधिक सरकारी और निजी स्कूलों का संचालन हो रहा है। इसमें करीब 1700 निजी स्कूल हैं। अधिकतर स्कूल फीस में मनमानी बढ़ोतरी और हर साल यूनिफॉर्म बदल देते हैं, जिससे अभिभावकों को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। स्कूलों की इसी मनमानी और लूट को रोकने के लिए शासन ने सख्त निर्देश दिए हैं। अब जिला शुल्क नियामक समिति स्कूलों की निगरानी करेगी।

अब कोई भी स्कूल बिना बगैर सूचना के फीस नहीं बढ़ा पाएगा। 60 दिन पहले स्कूलों को पोर्टल पर इसकी जानकारी और कारण स्पष्ट करना होगा। इसमें किस क्लास में कितनी फीस है इसका पूरा ब्योरा अपलोड करना होगा। फीस में केवल पांच प्रतिशत की ही बढ़ोतरी होगी। कर्मियों का वेतन बच्चों की फीस शुल्क में नहीं शामिल किया जाएगा। अपनी वेबसाइट के साथ जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में भी इसकी रिपोर्ट जमा करानी होगी। कोई स्कूल अगर सत्र के बीच में या अधिक फीस बढ़ाएगा तो कार्रवाई की जाएगी।

पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म में नहीं होगा बदलाव

स्कूलों द्वार पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदलने का नियम है, लेकिन विभाग की हीलाहवाली से कई स्कूल यूनिफॉर्म में हर साल मामूली बदलाव कर मुनाफा कमाते हैं। कोई भी स्कूल पांच वर्ष से पहले यूनिफॉर्म नहीं बदल पाएगा।

सत्र के बीच में फीस बढ़ाने पर रोक

स्कूल दाखिले के बाद यानि सत्र के बीच में फीस नहीं बढ़ा सकेंगे। शासन के निर्देशों के मुताबिक सभी बोर्ड के स्कूलों को इन नियमों का पालन करना होगा। शुल्क का विवरण वेबसाइट के साथ नोटिस बोर्ड भी लगाना होगा। पूरे साल की फीस लेने पर भी रोक रहेगी। ऐसा न करने पर कार्रवाई होगी।

शिकायत पर इस प्रकार से की जाएगी कार्रवाई

जिला शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी और सचिव जिला विद्यालय निरीक्षक होंगे। छात्र या अभिभावक मामले की शिकायत जिला विद्यालय निरीक्षक या जिलाधिकारी से कर सकते हैं। स्कूल पर पहली बार एक लाख रुपए और दूसरी बार पांच लाख रुपये का जुर्माना लग सकता है। वहीं, तीसरी बार उल्लंघन करने में स्कूल की मान्यता भी रद्द की जा सकती है।

जिला विद्यालय निरीक्षक धर्मेंद्र शर्मा ने कहा कि स्कूल अगर नियमों के विपरीत जाकर मनमानी फीस बढ़ाते हैं या फिक्स दुकानों से कोर्स लेने को मजबूर करेंगे तो उन पर कार्रवाई होगी। छात्र या अभिभावक इसकी शिकायत जिला विद्यालय निरीक्षक कार्यालय में कर सकते हैं।

Subodh Kumar Mishra

लेखक के बारे में

Subodh Kumar Mishra

सुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।

ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।

शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।

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