दिल्ली में AAP दफ्तर के बाहर क्यों लगाए गए कुमार विश्वास के बड़े-बड़े पोस्टर, केजरीवाल की पार्टी का भी जिक्र
आप के संस्थापकों में रहे कवि कुमार विश्वास ने अपने एक कार्यक्रम में 'आप' को शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है। दिल्ली के पार्टी कार्यालय पर लगे होर्डिंग्स में विश्वास ने 'अपने-अपने राम' कार्यक्रम के लिए इशारों-इशारों में बुलावा 'आप' को भी बुलाया है। यह कार्यक्रम दिल्ली विधानसभा में होने जा रहा है।

आम आदमी पार्टी के संस्थापकों में से एक रहे कवि कुमार विश्वास ने अपने एक कार्यक्रम में 'आप' को शामिल होने के लिए निमंत्रण दिया है। दिल्ली के पार्टी कार्यालय पर लगे एक होर्डिंग में विश्वास ने 'अपने-अपने राम' कार्यक्रम के लिए इशारों-इशारों में बुलावा 'आप' को भी बुलाया है। यह कार्यक्रम दिल्ली विधानसभा में होने जा रहा है।
दिल्ली विधानसभा में होगा आयोजन
दिल्ली विधानसभा में 6 मई को 'अपने-अपने राम' नामक संगीतमय 'राम कथा' का आयोजन होने जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य औचित्य, सत्य और कर्तव्य जैसे आदर्शों को जन-चेतना तक पहुंचाना है साथ ही समाज को सांस्कृतिक एवं नैतिक मूल्यों से जोड़ना है। दिल्ली के आम आदमी पार्टी के दफ्तरों के बाहर इस कार्यक्रम से जुड़े पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास के होर्डिंग्स लगाए गए हैं। दिल्ली विधानसभा में आयोजित होने वाले 'अपने-अपने राम' कार्यक्रम के लिए कुमार विश्वास ने निमंत्रण दिया है। इन होर्डिंग पर लिखा है कि 'आप' भी आमंत्रित हैं।
शुरुआती दौर के बड़े नेता रहे हैं विश्वास
दिल्ली विधानसभा में होने जा रहे इस सांस्कृतिक कार्यक्रम से जुड़े कुमार विश्वास के होर्डिंग्स पर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। विश्वास ने यह कदम उस समय उठाया है जब राघव चड्ढा और संदीप पाठक सहित सात सांसदों की बड़ी टूट से आम आदमी पार्टी से जुड़ी गतिविधियां इन दिनों चर्चा में हैं।पिछले 14 साल में आम आदमी पार्टी के ज्यादातर संस्थापक सदस्य पार्टी को छोड़ चुके हैं। कुमार विश्वास पार्टी के शुरुआती दौर के एक बड़े नेता रहे हैं। पार्टी से अलग होने के बाद भी पार्टी की गतिविधियों पर बयान देते रहते हैं।
अन्ना हजारे के करीबी
कुमार विश्वास, अन्ना हजारे के भी काफी करीब रहने वालों में से हैं। उनका नाम एक बार फिर आप के दफ्तर तक लौट आया है। नई दिल्ली में आम आदमी पार्टी के दफ्तर के बाहर लगे उनके होर्डिंग्स ने सियासी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। कुमार विश्वास, अरविंद केजरीवाल के साथ अन्ना हजारे के आंदोलन से निकली आम आदमी पार्टी की नींव रहे हैं। पार्टी की स्थापना में विश्वास ने अहम भूमिका निभाई थी। यहां तक कि उन्हें पार्टी का वैचारिक और वैकल्पिक चेहरा भी माना जाता रहा।
पार्टी पर सवाल
‘आप' के टिकट पर अमेठी से चुनाव लड़ने और हारने के बाद पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे। कुमार विश्वास ने कई बार दावा किया कि आम आदमी पार्टी धीरे‑धीरे अपने मूल सिद्धांतों और अपनी विचारधारा से भटक रही है। यह दावा करते हुए कि पार्टी में आंतरिक लोकतंत्र खत्म हो चुका है, फैसले एक व्यक्ति के इर्द‑गिर्द सिमट गए हैं और ईमानदार कार्यकर्ताओं की आवाज दबाई जा रही है, उन्होंने पार्टी छोड़ दी। हालांकि, उनके इन आरोपों को आम आदमी पार्टी ने बार‑बार नकारा है।
ऐसे कार्यक्रम बेहद जरूरीः विजेंद्र गुप्ता
वहीं, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा है कि एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक संध्या। 6 मई 2026 को विधानसभा परिसर में रामधुन 'अपने-अपने राम'- एक संगीतमय रामकथा की गूंज सुनाई देगी। गुप्ता ने लिखा कि सुप्रसिद्ध रामकथा मर्मज्ञ कुमार विश्वास जी अपनी ओजस्वी शैली में इसका वर्णन प्रस्तुत करेंगे। इसका आयोजन शाम 5 बजे से किया जाएगा।
विजेंद्र गुप्ता ने यह भी कहा कि बदलते सामाजिक परिवेश में ऐसे कार्यक्रम बेहद जरूरी हैं, जो युवाओं को अपनी जड़ों और मूल्यों से जोड़ सकें। गुप्ता के मुताबिक, भगवान राम के जीवन का मूल संदेश ‘मर्यादा’ है, जो हर व्यक्ति को जिम्मेदारी और अनुशासन का पाठ सिखाता है।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


