दिल्ली में PG हादसा मामले में फरार आरोपी की तलाश तेज, दबोचने के लिए पुलिस अपना रही अब यह तरीका
हादसे को लेकर गिरफ्तार ठेकेदार ने बताया था कि घटना वाले दिन ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने के लिए वहां बनी एक दीवार को हटाया गया था, जिसके बाद बाकी दीवारें इमारत का वजन नहीं झेल सकीं थीं और बिल्डिंग गिर गई थी।

दिल्ली के शांति निकेतन में पीजी की पांच मंजिला इमारत गिरने के मामले में पुलिस अबतक पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जबकि एक अन्य आरोपी शुभम त्यागी अबतक फरार है और पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। जिसके बाद अब पुलिस उसे दबोचने के लिए तकनीक का सहारा ले रही है। इस बारे में जानकारी देते हुए गुरुवार को पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच अधिकारी आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड और ऑनलाइन चैट हिस्ट्री की जांच कर रहे हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि घटना के तुरंत बाद क्या हुआ था और उन्होंने किन-किन लोगों से संपर्क किया था।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि त्यागी तक पहुंचने के लिए हमने उसके पार्टनर और गिरफ्तर में आ चुके सह-आरोपी सुधांशु लोवनीश का मोबाइल फोन जब्त करते हुए फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है। पुलिस ने बताया कि त्यागी और लोवनीश ने मिलकर गिर चुकी इमारत की चार मंजिलों को किराए पर लिया था और ये वहां पर 'हॉस्टल डेज' नाम से PG चला रहे थे। पुलिस ने बताया कि इन दोनों ने अगस्त 2025 में यह इमारत किराए पर ली थी और इसके बदले में वे 1.05 लाख रुपए प्रति माह किराए का भुगतान भी कर रहे थे।
लोवनीश का कॉल रिकॉर्ड छान रही पुलिस
सूत्रों के मुताबिक, पुलिस यह पता लगा रही है कि बिल्डिंग गिरने के बाद लोवनीश ने सबसे पहले किसे फोन किया, उसने घटना के बारे में क्या बात की, और उसकी बातचीत और चैट रिकॉर्ड के साथ-साथ डिवाइस में मौजूद अन्य डेटा की भी जांच कर रही है। पुलिस ने बताया कि त्यागी फरार है और उसे खोजने और गिरफ्तार करने के लिए हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और कई अन्य जगहों पर टीमें भेजी गई हैं।
पीजी हादसे में गई थी सात जानें, जिनमें पांच छात्र
बता दें कि रविवार दोपहर को दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला पीजी की इमारत गिरने के बाद इस हादसे में कुल सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि पांच अन्य घायल हो गए थे। मृतकों में पांच छात्र और दो मजदूर शामिल थे।
ठेकेदार ने कहा- दीवार तोड़ने की वजह से हुआ हादसा
हादसे को लेकर गिरफ्तार ठेकेदार ने बताया कि घटना वाले दिन ग्राउंड फ्लोर पर दुकान के लिए जगह बनाने के लिए वहां बनी एक दीवार को हटाया गया था, जिसके बाद बाकी दीवारें इमारत का वजन नहीं झेल सकीं और बिल्डिंग गिर गई। ठेकेदार ने बताया कि कमर्शियल मकसद से ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत और विस्तार का काम भी चल रहा था।
3 ट्रक मलबा डालकर बेसमेंट को भर दिया गया था
इसके अलावा बताया जा रहा है कि कई दिनों की बारिश के बाद बेसमेंट में जमा हुए कचरे और पानी को हटाने के बाद उसे मलबा डालकर भर दिया गया था। इस दौरान वहां भी 8 से 10 दिनों से मरम्मत का काम चल रहा था। खबरों के मुताबिक, बेसमेंट को ग्राउंड फ्लोर के बराबर लाने के लिए उसमें तीन ट्रक मलबा डाला गया था।
मामले में अबतक इन 5 लोगों को दबोच चुकी पुलिस
पुलिस ने इस घटना को लेकर पीजी इमारत के मालिक के बेटे महेश गुप्ता, लेबर कॉन्ट्रैक्टर सानोज कुमार और पेइंग-गेस्ट (PG) चलाने वाले सुधांशु लोवनीश को गिरफ्तार कर लिया है। जबकि बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता (81) और उनकी पत्नी उर्मिला (75) भी न्यायिक हिरासत में हैं।


