काम की बात: दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वालों को पीएम उदय सेल से मिल सकेगा मालिकाना हक
दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को पीएम उदय योजना के तहत उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा। इसके लिए राजस्व विभाग में पीएम उदय शाखा और दिल्ली के सभी 13 जिलों में पीएम उदय सेल का गठन किया जा रहा है।

राजधानी दिल्ली की अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लाखों लोगों को पीएम उदय योजना के तहत उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिलेगा। इसके लिए राजस्व विभाग में पीएम उदय शाखा और दिल्ली के सभी 13 जिलों में पीएम उदय सेल का गठन किया जा रहा है। एडिशनल डिविजनल मजिस्ट्रेट (एडीएम) की निगरानी में इस प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा।
45 दिन के भीतर मिलेगा संपत्ति का मालिकाना हक
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास मौजूद सभी आवेदन भी अब राजस्व विभाग को भेज दिए जाएंगे। इसके बाद लोगों को आवेदन स्वीकार होने के 45 दिन के भीतर उनकी संपत्ति का मालिकाना हक मिल जाएगा।
पीएम उदय योजना के तहत दिल्ली की 1500 से ज्यादा कच्ची कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को उनके मकान का मालिकाना हक दिया जा रहा है। पहले यह काम डीडीए कर रहा था। बीते दिनों आवास एवं शहरी मामलों के केन्द्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने इसकी जिम्मेदारी दिल्ली सरकार के राजस्व विभाग को सौंपने का निर्णय लिया था।
राजस्व विभाग होगा नोएडा एजेंसी
उपराज्यपाल की मंजूरी से दिल्ली सरकार का राजस्व विभाग इस योजना के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेगा। उपराज्यपाल के निर्देश पर इसके लिए गाइडलाइंस बनाई गई हैं। इसके तहत प्रत्येक जिले के एडीएम को यह शक्ति होगी कि वह आवेदन को स्वीकर या अस्वीकार कर सकता है। संपत्ति में विवाद को लेकर वह स्वयं या न्यायिक जांच करा सकते हैं।
योजना की यह होगी प्रक्रिया
● आवेदक पीएम उदय पोर्टल या मोबाइल ऐप पर जाकर अपनी और संपत्ति की सामान्य जानकारी देकर रजिस्ट्रेशन करेंगे। इससे उन्हें रसीद जारी होगी। जिसमें डीडीए से अधिकृत जीआईएस एजेंसियों के नंबर मिल जाएंगे।
● पोर्टल पर उपलब्ध फॉर्म में कॉलोनी, मकान, फ्लोर, जमीन, मालिकाना हक की जानकारी देनी होगी। इससे आवेदक को एसएमएस और मेल से केस आईडी मिल जाएगी।
● अधिकृत जीआईएस एजेंसी से अपने मकान का सर्वे कराना होगा।
● आवेदक को संपत्ति की जीपीए चेन, वसीयतनामा, भुगतान रसीद, बिजली का बिल, पेन कार्ड, आधार कार्ड और खाली पेपर पर हस्ताक्षर कर दस्तावेज तैयार करने होंगे।
● प्रॉपर्टी की चेन न होने पर बॉन्ड देना होगा। फिर आगे की प्रक्रिया होगी।
स्वामित्व अधिकार और निर्माण कार्य के नियम सरल बनाए गए
गौरतलब है कि, बीते 7 अप्रैल को केंद्र सरकार ने दिल्ली की कुल 1,731 अनधिकृत कॉलोनियों में से 1,511 अनधिकृत कॉलोनियों में "जैसा है, जहां है" पात्रता मानदंड के आधार पर संपत्तियों को नियमित करने के लिए एक नई नीति की घोषणा की थी। इसके तहत अब सभी भवनों को दिल्ली नगर निगम से स्वीकृति प्राप्त करनी अनिवार्य होगी। इस कदम से इन इलाकों में रहने वाले 10 लाख परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नई नियमों के अनुसार, निवासियों को अब अपनी संपत्ति रजिस्टर्ड कराने के लिए क्षेत्र का लेआउट प्लान जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी और वे केवल एमसीडी द्वारा सूचीबद्ध किसी भी वास्तुकार द्वारा तैयार किया गया भवन योजना ही दे सकते हैं। इसके अनुसार अब डीडीए नहीं, बल्कि राजस्व विभाग स्वामित्व अधिकार के लिए ट्रांसफर डीड जारी करेगा। एमसीडी नए निर्माणों की पहचान करने के लिए नियमित ड्रोन सर्वे करेगी। नगर निगम 'नियमितीकरण प्रमाण पत्र' जारी करेगा और नागरिक बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए खाली प्लॉटों का सर्वे भी करेगा।


