
वेश्यावृत्ति के लिए तुम्हारे नंबर का इस्तेमाल; धमकी से डरी लड़की ने घर बेचकर दिए 21 लाख
गुजरात के पाटन में साइबर ठगों ने मुंबई पुलिस अधिकारी बनकर एक भाई-बहन को मनी लॉन्ड्रिंग के नाम पर धमकाया और उन्हें सात दिन तक वीडियो कॉल पर नजरबंद रखकर, उनसे घर बेचकर जमा किए गए।
गुजरात के पाटन से डिजिटल अरेस्ट का बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक भाई-बहन ने साइबर ठगों के डर से अपना घर तक बेच दिया। ठगों ने उन्हें पूरे सात दिन तक वीडियो कॉल पर नजरबंद रखा और 21 लाख रुपये लूट लिए। पुलिस ने अब इस मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शुरुआत हुई एक फोन कॉल से
31 अक्टूबर को लड़की के फोन पर कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को मुंबई पुलिस का सिपाही बताया। उसने कहा कि लड़की के आधार से जुड़ा एक मोबाइल नंबर वेश्यावृत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग में इस्तेमाल हो रहा है। लड़की ने इनकार किया तो कॉल को कथित सीनियर अधिकारी को ट्रांसफर कर दिया गया।
'कैमरा ऑन, किसी से बात मत करो'
साइबर ठगों ने दोनों को फोन पर धमकाया। ठगों ने दोनों भाई-बहन को सख्त हिदायत दी कि एक ही जगह बैठे रहो, फोन का कैमरा हर समय चालू रखो। किसी से बात मत करो, वरना तुरंत गिरफ्तार कर लेंगे। ठगों ने फर्जी गिरफ्तारी वारंट, बैंक अकाउंट फ्रीज करने के ऑर्डर और लड़की के नाम का सहमति पत्र भी भेजा गया। डर इतना था कि दोनों हिल नहीं पाए।
'पैसे भेजो, नहीं तो सब कुछ जब्त'
ठगों ने कहा कि उनके नाम से 3.16 करोड़ रुपये का काला धन बरामद हुआ है। इसे साफ करने के लिए वेरिफिकेशन के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने पड़ेंगे। सात दिनों में भाई-बहन ने अपनी सारी सेविंग निकाल दी। सैलरी के पैसे भेज दिए और इतना ही नहीं घर बेचा और 11 लाख रुपये टोकन के रूप में लिए। 5 नवंबर तक कुल 20.93 लाख रुपये अलग-अलग अकाउंट में ट्रांसफर हो चुके थे।
ठगों ने कहा था कि पैसे आने के बाद शाम तक बेगुनाही का सर्टिफिकेट मिल जाएगा। लेकिन कोई सर्टिफिकेट नहीं आया। अगले दिन ठगों ने घर की रजिस्ट्री मांगी। इसके बाद उनका नंबर बंद हो गया और वॉट्सऐप अकाउंट गायब हो गया।
रिश्तेदारों को पता चला तो केस दर्ज
जैसे ही भाई-बहन ने घरवालों को बताया, सबको स्कैम का पता चल गया। उसी रात पाटन पुलिस में शिकायत दर्ज हुई। साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर भी संपर्क किया गया।
पुलिस ने BNS और IT एक्ट के तहत ठगी का केस दर्ज कर लिया है।पुलिस ने बताया कि ठग कई नंबर, वॉट्सऐप अकाउंट और वीडियो कॉल ऐप्स का इस्तेमाल करते हैं। लगातार निगरानी और डर दिखाकर पीड़ित को मानसिक रूप से कमजोर कर देते हैं। जांच जारी है।





