मंत्री प्रवेश वर्मा का बड़ा आरोप, बोले- भगवंत मान ने फर्जी रिपोर्ट तैयार कराने की कोशिश की; शेयर किया सीसीटीवी फुटेज
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने कहा था, 'सिख संगत की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए, आज पांच सिंह साहिबों की सभा ने मान को 'गुरु द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित कर दिया है। साथ ही गुरु खालसा पंथ को निर्देश दिया जाता है कि वे उनसे कोई संबंध न रखें।'

दिल्ली सरकार के कैबिनेट मंत्री प्रवेश वर्मा ने मंगलवार रात को सोशल मीडिया के जरिए पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने और इस काम के लिए पंजाब के दो अधिकारियों का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया। इस बारे में शेयर की अपनी पोस्ट में वर्मा ने कहा कि अकाल तख्त साहिब के 15 जून को आए आदेश के बाद भगवंत मान ने लुधियाना के सीपी और एसपी को अपने पक्ष में एक फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार करवाने का काम सौंपा था।
वर्मा ने आगे बताया कि इसी काम के सिलसिले में ये दोनों अधिकारी एक दिन बाद 10 लाख रुपए लेकर गुरुग्राम आए थे और फॉरेंसिक लैब के मालिकों से मुलाकात भी की थी। वर्मा ने बताया कि अब इस मामले में गुरुग्राम पुलिस ने लैब मालिकों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। अपने दावे के समर्थन में वर्मा ने कथित रूप से गुरुग्राम के क्राउन प्लाजा होटल का सीसीटीवी फुटेज भी शेयर किया।
पुलिस ने लैब मालिकों को गिरफ्तार किया: प्रवेश वर्मा
अपनी इस पोस्ट में वर्मा ने लिखा, ‘15 जून को, श्री अकाल तख्त साहिब के भगवंत मान के खिलाफ आदेश के बाद, भगवंत मान ने लुधियाना के सीपी स्वपन शर्मा और एसपी जसनदीप को अपने पक्ष में एक फर्जी फॉरेंसिक रिपोर्ट तैयार कराने का काम सौंपा। 16 जून को स्वपन शर्मा और जसनदीप गुरुग्राम आए और 10 लाख रुपए की डील करने के लिए क्राउन प्लाजा, गुरुग्राम में एक फॉरेंसिक लैब के मालिकों से मुलाकात की। यह क्राउन प्लाजा की सीसीटीवी फुटेज है, जिसमें स्वपन शर्मा, जसनदीप और लैब मालिकों के बीच हुई बैठक दिखाई दे रही है। गुरुग्राम पुलिस द्वारा अब FIR दर्ज कर दोनों लैब मालिकों को गिरफ्तार कर लिया गया है।’
अकाल तख्त ने मान को घोषित किया था गुरुद्रोही
बता दें कि वर्मा ने 15 जून के अकाल तख्त साहिब के भगवंत मान के खिलाफ सुनाए जिस आदेश का जिक्र किया उसमें सिखों की इस सबसे बड़ी धार्मिक संस्था अकाल तख्त ने एक कथित आपत्तिजनक वीडियो के मामले में झूठ बोलने को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान को 'गुरु द्रोही' और 'खालसा पंथ विरोधी' घोषित किया था और सिख समुदाय को मान से 'अपना संबंध तोड़ देने' का निर्देश दिया था।
मान पर था आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप
यह मामला इस साल जनवरी में अकाल तख्त द्वारा मान को समन किए जाने से जुड़ा है। उन पर 'गुरु की गोलक' (गुरुद्वारे का दान-पात्र) के बारे में कथित तौर पर टिप्पणी करने और एक वीडियो क्लिप में 'सिख गुरुओं' व मारे गए चरमपंथी जरनैल सिंह भिंडरांवाले की तस्वीरों के साथ आपत्तिजनक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप था। उस वीडियो में दिख रहा व्यक्ति कथित तौर पर मान जैसा दिख रहा था।
अकाल तख्त ने वीडियो की जांच कराई तो असली निकला वीडिया
इस विषय पर सवाल-जवाब के लिए 15 जनवरी को जब मान को अकाल तख्त के सचिवालय में बुलाया गया था, तो इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि वीडियो फर्जी है और इसे कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल करके बनाया गया था। इसके बाद अकाल तख्त सचिवालय ने केंद्र सरकार से मान्यता प्राप्त दो लैब से उस वीडियो की जांच करवाई। दोनों फोरेंसिक प्रयोगशालाओं ने उस वीडियो को 'असली' पाया। लैब ने बताया कि वीडियो से न तो छेड़छाड़ की गई थी और न ही एआई से बनाया गया था।
मान पर लगा अकाल तख्त के सामने झूठ बोलने का आरोप
अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज ने आपत्तिजनक हरकत का जिक्र करते हुए कहा, 'गुरु खालसा पंथ किसी भी हालत में ऐसी हरकतें बर्दाश्त नहीं कर सकता।' गड़गज ने कहा, 'मुख्यमंत्री का पद सम्मानजनक होता है। लेकिन मुख्यमंत्री भगवंत सिंह (मान) ने अकाल तख्त के सामने (वीडियो के बारे में) झूठ बोला।' उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर गुरु और सिख समुदाय के हित में फैसले लेने की उनकी क्षमता पर भी सवाल उठाए।


