राजनगर एक्सटेंशन में आउटर रिंग रोड बनाने की तैयारी, वैकल्पिक मार्ग भी बनेंगे
राजनगर एक्सटेंशन में 45 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड जल्द बनेगी। जीडीए को इस मार्ग के लिए तीन गांव की जमीन खरीदने की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति बुधवार को मिल गई है। अब प्राधिकरण एक हफ्ते के भीतर जमीन खरीदकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।

राजनगर एक्सटेंशन में 45 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड जल्द बनेगी। जीडीए को इस मार्ग के लिए तीन गांव की जमीन खरीदने की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति बुधवार को मिल गई है। अब प्राधिकरण एक हफ्ते के भीतर जमीन खरीदकर प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा।
राजनगर एक्सटेंशन में वाहनों का दबाव लगातार बढ़ रहा है, जिस कारण जाम की समस्या रहती है। इस समस्या को दूर करने के लिए जीडीए 45 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड बनाएगा। इसके लिए भूमि क्रय की प्रक्रिया शुरू होगी। जीडीए अधिकारी बताते हैं कि जमीन खरीदने के लिए प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृति मिल गई है।
लगभग 5.8 किलोमीटर लंबी होगी
अब 3.9582 हेक्टेयर (39 हजार 582 वर्ग मीटर) जमीन खरीदकर प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अधिकारी बताते हैं कि 45 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड लगभग 5.8 किलोमीटर लंबी होगी, जो क्षेत्र में यातायात सुगमता एवं समग्र शहरी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह मार्ग राजस्व ग्राम मोरटी, अधीर, आंबापुर, मोरटा तथा शाहपुर निजमोरटा की भूमि से होकर गुजरेगा।
आपसी सहमति से खरीदी जा रही जमीन
इस परियोजना के अंतर्गत राजस्व ग्राम मोरटी तथा आंबापुर की भूमि का अर्जन पूर्व में ही किया जा चुका है। शेष भूमि, जो राजस्व ग्राम अटौर, मोरटा एवं शाहपुर निजमोरटा में स्थित है, को भू-स्वामियों से आपसी सहमति के आधार पर खरीदा जा रहा है। बता दें कि जमीन खरीदने के लिए भू-स्वामियों से पूर्व में ही सहमति पत्र प्राप्त किए जा चुके हैं।
ये वैकल्पिक मार्ग भी बनेंगे
जीडीए राजनगर एक्सटेंशन में 2700 मीटर लंबी हम तुम रोड भी बनाएगा। इसके लिए किसानों से जमीन खरीदने के लिए सहमति बनाई जा रही है। ये मार्ग मेरठ रोड से आउटर रिंग रोड को जोड़ेगा। ऐसे में दिल्ली मेरठ रोड से वाहन राजनगर एक्सटेंशन की मुख्य सड़क की जगह इस मार्ग का भी इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा सिकरोड गांव के पीछे 900 मीटर लंबी 45 मीटर रोड तैयार होगी। 18 मीटर चौड़ी दूसरी रोड रिवर हाइट्स हाई-राइज़ कॉम्प्लेक्स के पीछे से जोड़ी जाएगी।
यातायात होगा बेहतर
जीडीए अधिकारी बताते हैं कि सड़क निर्माण से क्षेत्र को बेहतर यातायात सुविधा मिलेगी। राजनगर एक्सटेंशन का जाम भी कम हो सकेगा। साथ ही राजनगर एक्सेंटशन के मुख्य मार्ग से भी वाहनों का दबाव कम होगा, क्योंकि आने जाने के लिए कई वैकल्पिक मार्ग होंगे। इससे क्षेत्र में विकास भी तेजी होगा। साथ ही मानचित्र स्वीकृति कर क्षेत्र का सुनियोजित विकास भी होगा, जिससे राजस्व भी प्राप्त होगा। इससे क्षेत्र की अन्य सड़कों के विकास कार्यों पर खर्च किया जाएगा।
जीडीए के उपाध्यक्ष नंदकिशोर कलाल ने कहा कि राजनगर एक्सटेंशन में 45 मीटर चौड़ी आउटर रिंग रोड जल्द बनाई जाएगी। इसके लिए तीन गांव की शेष जमीन खरीदने की प्रक्रिया एक हफ्ते में पूरी की जाएगी। इस मार्ग के बनने से क्षेत्र में यातायात बेहतर होगा।
लेखक के बारे में
Subodh Kumar Mishraसुबोध कुमार मिश्रा पिछले 19 साल से हिंदी पत्रकारिता में योगदान दे रहे हैं। वर्तमान में वह 'लाइव हिन्दुस्तान' में स्टेट डेस्क पर बतौर चीफ कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। दूरदर्शन के 'डीडी न्यूज' से इंटर्नशिप करने वाले सुबोध ने पत्रकारिता की विधिवत शुरुआत 2007 में दैनिक जागरण अखबार से की। दैनिक जागरण के जम्मू एडीशन में बतौर ट्रेनी प्रवेश किया और सब एडिटर तक का पांच साल का सफर पूरा किया। इस दौरान जम्मू-कश्मीर को बहुत ही करीब से देखने और समझने का मौका मिला। दैनिक जागरण से आगे के सफर में कई अखबारों में काम किया। इनमें दिल्ली-एनसीआर से प्रकाशित होने वाली नेशनल दुनिया, नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी ग्रुप), अमर उजाला और हिन्दुस्तान जैसे हिंदी अखबार शामिल हैं। अखबारों के इस लंबे सफर में खबरों को पेश करने के तरीकों से पड़ने वाले प्रभावों को काफी बारीकी से समझने का मौका मिला।
ज्यादातर नेशनल और स्टेट डेस्क पर काम करने का अवसर मिलने के कारण राजनीतिक और सामाजिक विषयों से जुड़ी खबरों में दिलचस्पी बढ़ती गई। कई लोकसभा और विधानसभा चुनावों की खबरों की पैकेजिंग टीम का हिस्सा रहने के कारण भारतीय राजनीति के गुणा-भाग को समझने का मौका मिला।
शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो सुबोध ने बीएससी (ऑनर्स) तक की अकादमिक शिक्षा हासिल की है। साइंस स्ट्रीम से पढ़ने के कारण उनके पास चीजों को मिथ्यों से परे वैज्ञानिक तरीके से देखने की समझ है। समाज से जुड़ी खबरों को वैज्ञानिक कसौटियों पर जांचने-परखने की क्षमता है। उन्होंने मास कम्यूनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया है। इससे उन्हें खबरों के महत्व, खबरों के एथिक्स, खबरों की विश्वसनीयता और पठनीयता आदि को और करीब से सीखने और लिखने की कला में निखार आया। सुबोध का मानना है कि खबरें हमेशा प्रमाणिकता की कसौटी पर कसा होना चाहिए। सुनी सुनाई और कल्पना पर आधारित खबरें काफी घातक साबित हो सकती हैं, इसलिए खबरें तथ्यात्मक रूप से सही होनी चाहिए। खबरों के चयन में क्रॉस चेकिंग को सबसे महत्वपूर्ण कारक मानने वाले सुबोध का काम न सिर्फ पाठकों को केवल सूचना देने भर का है बल्कि उन्हें सही, सुरक्षित और ठोस जानकारी उपलब्ध कराना भी है।


