
OTT सब्सक्रिप्शन के नाम पर विदेश में NRI लोगों से करते थे ठगी, 24 साल की सरगना समेत 6 अरेस्ट
नोएडा पुलिस ने विदेश में रह रहे एनआरआई लोगों को ठगने वाले कॉल सेंटर का भंडाफोड़ कर गिरोह की सरगना युवती समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोपी भारत-पाकिस्तान और अन्य देशों के ओटीटी प्लैटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन देने के नाम पर 100 से 300 डॉलर तक की ठगी करते थे।
नोएडा फेज-वन थाना पुलिस ने गुरुवार को एनआरआई से ठगी के लिए कॉल सेंटर चलाने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया। टीम ने गिरोह की सरगना युवती समेत छह लोगों को दबोचा। आरोपी भारत-पाकिस्तान और अन्य देशों के ओटीटी प्लैटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन देने के नाम पर 100 से 300 डॉलर तक की ठगी कर लेते थे।
डीसीपी यमुना प्रसाद ने बताया कि फेज-वन थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने संयुक्त कार्रवाई की है। सूचना के आधार पर सेक्टर-दो में वेबबिज सर्विस एलएलसी नाम की कंपनी में छापा मारा। मौके से छह लोगों को हिरासत में ले लिया। इनकी पहचान सेक्टर-82 स्थित केंद्रीय विहार में रहने वाली तनिष्का, वृंदावन निवासी अनिल बघेल, गौरव, राधा बल्लभ, योगेश बघेल और बिहार के सारन जिला निवासी मनीष कुमार के रूप में हुई।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह लोग ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से विदेशों में रह रहे भारतीय नागरिकों को भारतीय, पाकिस्तानी और अन्य देशों के ओटीटी प्लैटफॉर्म का सब्सक्रिप्शन कम दामों में अवैध रूप से उपलब्ध कराते हैं। आरोपी अपनी कंपनी के नाम पर विदेश में रहने वाले भारतीय नागरिकों को ओटीटी प्लैटफॉर्म के विभिन्न सब्सक्रिप्शन चैनलों के कंटेंट को बिना किसी लाइसेंस के रिकॉर्ड करते हैं। इसके बाद उसकी कॉपी को प्रसारित करते हैं, जैसे कि उपभोक्ता को वैध रूप से सब्सक्रिप्शन दिया जा रहा हो। कुछ समय बाद आरोपी सब्सक्रिप्शन बंद कर देते हैं और रिनुअल के नाम पर उपभोक्ता से बार-बार पैसों की मांग करते हैं।
हर सब्सक्रिप्शन को 100 डॉलर से 300 डॉलर तक में बिक्री करते हैं। आरोपियों के पास से 20 मोबाइल फोन, पांच सीपीयू, पांच कंप्यूटर मॉनिटर, एक लैपटॉप, छह कीबोर्ड, छह माउस, छह हेडफोन, एक आईपीटीवी बॉक्स, दो एयरटेल एक्सट्रीम फाइबर राउटर और तीन मोहर बरामद हुई हैं।
इंटरनेट के जरिये आरोपी करते थे कॉल : पुलिस टीम ने जब छापेमारी की तो पता चला कि कार्यालय में बैठे लोग कंप्यूटर के जरिये कॉलिंग कर रहे थे। पुलिसकर्मियों को देखकर सभी ने कॉलिंग बंद कर दी। कंप्यूटर पर पुलिसकर्मियों ने देखा तो उसमें एक सॉफ्टवेयर के जरिये अमेरिका में बैठे लोगों को इंटरनेट कॉल कर रहे थे। सख्ती से पूछताछ में आरोपी माफी मांगने लगे।
आरोपी ऐसे निकालते थे रकम : पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वह अमेरिकी डॉलर में कंपनी के नाम से बने खाते में रकम ट्रांसफर कराते थे। इसके बाद गिरफ्तार आरोपी अनिल बघेल अपनी कंपनी के खाते में रकम ट्रांसफर करा लेते थे। अमेरिकी लोगों से इसलिए ठगी करते थे, ताकि वह पुलिस द्वारा पकड़े न जाएं।
युवती 24 साल की उम्र में सरगना बनी
पुलिस ने बताया कि गिरोह की सरगना 24 वर्षीय तनिष्का है। उसने स्नातक की पढ़ाई की है। उसने खुद को कंपनी का निदेशक होने का दावा किया। उसने पूछताछ में पुलिस को बताया कि वह लालच में आकर विदेशी नागरिकों को कॉल करके ठगी करते हैं। लोगों को 12 से 27 माह के लिए 100 से 300 डॉलर में सब्सक्रिप्शन देते थे। इसके बाद अल्प अवधि में बंद कर दते थे।
सॉफ्टवेयर के जरिये करते थे फर्जीवाड़ा
डीसीपी ने बताया कि आरोपी ओटीटी का सब्सक्रिप्शन लेकर भारतीय, पाकिस्तान और अन्य देशों के मूल ओटीटी प्लैटफॉर्म कंटेट तक पहुंच बना लेते थे। इसके बाद कैप्चर कार्ड जैसे सॉफ्टवेयर की मदद से एक्सेस लिमिट आदि में सेंधमारी कर फर्जीवाड़ा करते थे। लिंक भेजकर ग्राहकों को दो साल तक का सब्सक्रिप्शन ऑफर देकर झांसे में लेते थे। वह निर्धारित टेलीकॉलिंग प्रक्रिया का पालन नहीं कर रहे थे। कॉलिंग लाइन आइडेंटिफिकेशन नंबर बदल देते थे, ताकि कॉल करने वाले व्यक्ति को कोई दूसरा नंबर दिखाई दे।





