केजरीवाल को क्लीनचिट देने वाले फैसले में HC को क्या गलत लगा, कहा- विचार करना जरूरी
दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई केस में 27 फरवरी को जब ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल,मनीष सिसोदिया समेत 23 को आरोप मुक्त किया तो जांच एजेंसी के खिलाफ कई बड़ी टिप्पणियां भी कीं। यहां तक कि जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दे दिया था।

दिल्ली के कथित शराब घोटाले से जुड़े सीबीआई केस में 27 फरवरी को जब ट्रायल कोर्ट ने अरविंद केजरीवाल,मनीष सिसोदिया समेत 23 को आरोप मुक्त किया तो जांच एजेंसी के खिलाफ कई बड़ी टिप्पणियां भी कीं। यहां तक कि जांच अधिकारी के खिलाफ जांच का आदेश दे दिया था। अब हाई कोर्ट ने इन 'टिप्पणियों' को लेकर कहा है कि 'पहली नजर में त्रुटिपूर्ण' प्रतीत होती हैं। सीबीआई की ओर से ट्रायल कोर्ट के फैसले को दी गई चुनौती पर अदालत ने सभी आरोपियों को नोटिस जारी किया है। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
जस्टिस स्वर्ण कांत शर्मा ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर भी 16 मार्च तक रोक लगा दी जिसमें सीबीआई के जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच का निर्देश दिया गया था और टिप्पणियां की गईं थीं। अदालत ने कहा कि ये टिप्पणियां 'प्रथम दृष्टया मूल रूप से गलत प्रतीत होती हैं, खासकर तब जब उन्हें आरोप तय करने के चरण में ही किया गया हो।' जस्टिस शर्मा ने इस मामले में ईडी केस पर भी सुनवाई टालने को कहा है।
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, उनके डिप्टी रहे मनीष सिसोदिया, तेलंगना की नेता के कविता समेत सभी 23 आरोपियों को यह निष्कर्ष निकालते हुए आरोप मुक्त कर दिया कि उन्हें यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि सीबीआई की सामग्री से प्रथम दृष्टया मामला भी नहीं बनता, गंभीर संदेह की बात तो दूर की है। 601 पन्नों के आदेश में राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष जज जितेंद्र सिंह ने उस 'जांच अधिकारी' के खिलाफ विभागीय जांच का निर्देश दिया था, जिसने जिसने पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किए। अदालत ने कहा कि जांच अधिकारी ने अनुचित जांच करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया।
HC ने कहा- पहली नजर में त्रुटिपूर्ण
हालांकि जस्टिस शर्मा की राय इससे अलग है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, ‘इस अदालत का मत है कि आदेश में इंगित की गई कुछ तथ्यात्मक विसंगतियां, आरोप के चरण में ही ट्रायल कोर्ट की ओर से गवाहों के बयानों को लेकर की गईं टिप्पणियां, पहली नजर में त्रृटिपूर्ण है और स्थापित कानूनी सिद्धांतों की पृष्ठभूमि में विचार करना आवश्यक है कि क्या ऐसी टिप्पणियां आरोप तय करने के चरण में ही की जा सकती थीं।’
16 मार्च तक देना है जवाब
अदालत ने कहा कि इन परिस्थितियों में सभी 23 प्रतिवादियों को सभी माध्यमों से, जिनमें इलेक्ट्रॉनिक माध्यम भी शामिल हैं, और संबंधित जांच अधिकारी के माध्यम से नोटिस जारी किया जाए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य से कहा कि वे ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी के आदेश को चुनौती देने वाली सीबीआई की अपील पर 16 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई तक अपना जवाब दाखिल करें।
अदालत ने और क्या कहा
अदालत ने कहा, 'जहां तक जांच अधिकारी के संबंध में की गई टिप्पणियों पर रोक लगाने की दलील का सवाल है, यह अदालत इस तथ्य पर ध्यान देती है कि आदेश में दर्ज की गई ऐसी तीखी टिप्पणियां और उनके लिए दिए गए कारण- जिनमें यह निष्कर्ष भी शामिल है कि जांच अधिकारी ने अनुचित जांच करने के लिए अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग किया- प्रथम दृष्टया मूल रूप से गलत प्रतीत होते हैं, खासकर तब जब ये टिप्पणियां आरोप तय करने के चरण में ही की गई हों। जांच अधिकारी से संबंधित टिप्पणियों, उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश करने वाले निर्देश पर अगली सुनवाई तक रोक लगाई जाती है।'
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Sudhir Jhaसुधीर झा | वरिष्ठ पत्रकार और स्टेट टीम लीड
(दिल्ली-एनसीआर, झारखंड, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान, गुजरात, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश)
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