
खुद को मरा घोषित किया, नाम-पहचान बदली; दिल्ली में पकड़े गए ISI जासूस की पूरी कहानी
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने आदिल हुसैन और उसके भाई अख़्तर हुसैन को फर्जी पासपोर्ट बनाने और विदेशी एजेंसियों को परमाणु डिजाइन जैसी संवेदनशील जानकारी बेचने के आरोप में गिरफ़्तार किया है, जिससे देश में बड़े जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है।
दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने जिस आदिल हुसैनी को गिरफ्तार किया, उसने पूछताछ में ऐसी कहानियां उगलीं कि जासूसी फिल्में फीकी लगने लगें। ये शख्स और उसका भाई अख्तर हुसैन विदेशों में अपनी काली करतूतों की वजह से 'वांटेड' बन गए थे। बचने के लिए नाम बदल-बदलकर नए पासपोर्ट बनवाए, और तो और खुद को 'मृत' घोषित कर दिया ताकि कोई ट्रेस न कर सके। लेकिन किस्मत ने साथ नहीं दिया। अब दोनों भाई पुलिस की गिरफ्त में हैं।

ईरान से हुई धोखेबाजी की कहानी
इन दोनों भाइयों की धोखेबाजी की कहानी ईरान से शुरू होती है। कुछ साल पहले दोनों ने तेहरान और इस्लामाबाद की सैर की, फिर लीबिया पहुंचे। वहां ईरानी न्यूक्लियर एजेंट्स को रूसी वैज्ञानिक से मिले फर्जी न्यूक्लियर डिजाइन बेच डाले। पुलिस वाले बताते हैं, "75% डिज़ाइन तो सही थे, लेकिन बाकी में जानबूझकर खामियां डाल दीं।" पैसे लिए डॉलरों में, फिर तेहरान से दुबई भागे। ईरानी एजेंट्स भड़क गए, अनौपचारिक दबाव डाला, और दुबई से दोनों को डिपोर्ट कर दिया गया।
नाम बदलकर छिपते फिरे
टीओआई की एक रिपोर्ट के मताबिक, गिरफ्तारी के बाद आदिल ने कबूला कि भाई अख्तर फिजिक्स का शौकीन है। हाल ही में उसने 'अलेक्जेंडर पाल्मर' का रूप धारण किया, जो अमेरिका के मशहूर थिंक टैंक 'सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' में 'वॉरफेयर, इरेगुलर थ्रेट्स एंड टेररिज्म' प्रोग्राम का फेलो है। अख्तर पिछले हफ्ते मुंबई में धर लिया गया। इसके खिलाफ मेरठ के कंकर खेड़ा थाने में राजद्रोह का केस भी दर्ज है।
'न्यूक्लियर ऑफिसर' का बनाया रूप
इतना ही नही आदिल कनाडा की ओंटारियो पावर जनरेशन प्लांट का 'न्यूक्लियर ऑफिसर' बन बैठा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि VPN से की गईं कुछ संदिग्ध चैट्स विदेशी इंटेलिजेंस एजेंसी ने पकड़ी। दोनों भाइयों ने विदेशी डील्स से कमाए पैसे उड़ा दिए। इसके बाद पैसों की तंगी में ISI एजेंट से संपर्क किया। यही एक गलती दोनों भाइयों के लिए घातक साबित हुई।





