
दिल्लीवालों पर डबल अटैक! हवा ही नहीं ध्वनि प्रदूषण भी लोगों की सेहत बिगाड़ रहा
केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत में ध्वनि प्रदूषण से लोगों की सुनने की क्षमता कम होने, तनाव और उच्च रक्तचाप जैसी स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ रही हैं।
भारत में न केवल वायु प्रदूषण बल्कि ध्वनि प्रदूषण भी लोगों को बीमार कर रहा है। इससे न केवल लोगों की सेहत बल्कि उनकी कार्यक्षमता भी प्रभावित हो रही है। लंबी अवधि तक ध्वनि प्रदूषण में रहने वाले लोगों के सुनने की क्षमता कम हो रही है। इससे नींद प्रभावित होना, तनाव, उच्च रक्तचाप और दिल से संबंधित बीमारी भी हो रही हैं। ध्वनि प्रदूषण से सबसे ज्यादा प्रभावित हाइवे के पास रहने वाले लोग हैं।

केन्द्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान के निदेशक प्रो. मनोरंजन परिदा ने बताया कि सीआरआरआई द्वारा किए गए अध्ययन से पता चला है कि शहरी इलाकों में यातायात के द्वारा मचाए जाने वाला शोर लोगों के स्वास्थ्य पर भी बड़ा असर डाल रहा है। इससे न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। ध्वनि प्रदूषण से नींद प्रभावित होने की शिकायतें भी आ रही है।
ध्वनि बैरियर लगाए जाएं
डा. नसीम ने हाइवे पर ऐसी जगह ध्वनि रोधक बैरियर लगाने की सलाह दी है, जहां अधिक लोग रहते हैं। उन्होंने बताया कि एक किलोमीटर क्षेत्र में बैरियर लगाने का खर्च 5 करोड़ रुपये आता है और यह 20 साल तक चलता है। अगर इस एक किलोमीटर में 1000 लोग रहते हैं तो उन पर ध्वनि बैरियर का खर्च प्रतिदिन 5600 रुपये आता है। वहीं अगर ध्वनि बैरियर नहीं लगा है तो इसी जगह रहने वाले 1000 लोगों पर प्रतिदिन स्वास्थ्य पर खर्च लगभग 1.56 लाख रुपये आता है।
सख्ती के लिए जुर्माने का प्रस्ताव दिया गया
डॉ. नसीम अख्तर ने अध्ययन के आधार पर सरकार को ध्वनि प्रदूषण फैलाने वालों पर जुर्माना लगाने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि मानक से पांच डेसिमल अधिक आवाज करने पर 250 रुपये का जुर्माना होना चाहिए। वहीं 6 से 10 डेसिमल पर 500 रुपये, 11 से 15 डेसिमल अधिक होने पर 1000 रुपये, 16 से 20 डेसिमल अधिक होने पर 2000 रुपये, 21 से 30 डेसिमल अधिक आवाज पर 2500 रुपये और 30 डेसिमल से अधिक पर 3000 का चालान होना चाहिए।
दिए गए सुझाव
- बड़े हाइवे के पास तीन से पांच मीटर के ध्वनि रोधक बैरियर लगाए जाने चाहिए।
- संवेदनशील जगह जैसे स्कूल, अस्पताल आदि में नो हांकिंग जोन बनाए जाने चाहिए।
- वायु प्रदूषण की तरह सरकार को ध्वनि प्रदूषण मापने के यंत्र भी लगाने चाहिए।
- लोगों को ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले असर के बारे में जागरूक करना चाहिए।





