औद्योगिक-आवासीय सेक्टरों में डेढ़ दशक बाद भी सड़के अधूरी
ग्रेटर नोएडा के यमुना सिटी में डेढ़ दशक बाद भी आंतरिक सड़कें अधूरी हैं। इससे भूखंड लेने वाले आवंटी और उद्यमी परेशान हैं। कई बार शिकायतों के बावजूद, सड़क निर्माण में प्रगति नहीं हुई है। यीडा ने समस्या का संज्ञान लिया है लेकिन स्थिति में सुधार की जरूरत है।

ग्रेटर नोएडा, वरिष्ठ संवाददाता। यमुना सिटी के औद्योगिक और आवासीय सेक्टर में आंतरिक सड़कें डेढ़ दशक बाद भी अधूरी हैं। इससे यहां भूखंड लेने वाले आवंटी और उद्यमी परेशानियों का सामना कर रहे हैं। यहां निर्माण सामग्री की आवाजाही प्रभावित कर रही है। 13 से 16 वर्ष पुराने सेक्टरों में आधारभूत सुविधाओं की कमी है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) ने वर्ष 2009 में 300, 500, एक हजार, दो हजार और चार हजार वर्गमीटर के 21 हजार भूखंडों की पहली आवासीय योजना शुरू की थी। ये सभी भूखंड सेक्टर-18 और 20 में हैं। इन सेक्टरों को बने करीब 16 वर्ष से अधिक समय हो चुका, लेकिन अब तक सेक्टरों में सड़कें अधूरी हैं।
प्राधिकरण के मुताबिक इन दोनों सेक्टरों में 1100 से अधिक आंवटियों को कंप्लीशन दिया जा चुका। अब भी हजारों आवंटियों के सामने मकान बनाना चुनौती बना हुआ है। गुरुवार को ही सेक्टर-20 के आवंटी ने यीडा पहुंचकर सड़क पूरी करने की मांग की। आवंटी ने खुद को रिटायर्ड कर्नल बताते हुए कहा कि वह कई बार मामले की शिकायत कर चुके हैं। उन्हें हर बार किसी कर्मचारी का नंबर थमा दिया जाता है, जो कभी फोन नहीं उठता। लंबे समय से मांग करने के बावजूद सड़क निर्माण पूरा नहीं किया जा रहा। हालांकि, एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने मामले का संज्ञान लेते हुए मौके पर वरिष्ठ प्रबंधक को बुलाकर उनकी समस्या के समाधान के आदेश दिए। --- औद्योगिक सेक्टर-33 का मुख्य मार्ग ही नहीं बना यमुना सिटी में सेक्टर-24ए, 28, 29, 32 और 33 को औद्योगिक के रूप में विकसित किया गया है। इन सभी सेक्टरों में कुल 3,113 भूखंडों का आवंटन हो चुका है। वर्तमान में 52 कंपनियों को कंप्लीशन जारी हुआ है। इनमें से 27 में उत्पादन शुरू होने का दावा है। हालांकि, उद्यमियों की मानें तो सेक्टर-32 और 33 की हालत बेहद खराब है। यहां यीडा ने वर्ष 2013 में पहली औद्योगिक भूखंड योजना शुरू की थी, लेकिन आजतक शत प्रतिशत उद्यमियों को उनके प्लॉट पर कब्जा नहीं दिया। यीडा सेक्टर-33 में 350 प्लॉट आवंटित कर चुका, लेकिन एक भी कंपनी शुरू नहीं हो सकी। सेक्टर का मुख्य मार्ग ही आजतक अधूरा पड़ा है। उद्यमी गांव के रास्ते से सेक्टर में आते हैं। इसी तरह से सेक्टर-32 में 1800 भूखंडों का आवंटन हो चुका है। सेक्टर की कोई ऐसी सड़क नहीं है, जो पूरी हो। सड़क के सामने यह तो खेत है या फिर गडढे। वहीं, प्राधिकरण नोटिस जारी कर उद्यमियों को कंपनियां शुरू करने के लिए दबाव बना रहा है। --- यह बोले उद्यमी यमुना सिटी में अभी औद्योगिक इकाई लगाने के लिए मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं। सेक्टर-33 की मुख्य सड़क ही पूरी नहीं हो सकी। उद्यमियों को अपने भूखंड तक गांव के रास्ते से पहुंचना पड़ता है। - इमरान गनी, सचिव, यमुना एक्सप्रेसवे उद्यमी संघ --- सड़क न बनने से सामान पहुंचाने में दिक्कत होती है। शहर में कुछ बड़े उद्योग शुरू हो चुके हैं। प्राधिकरण को कई बार सेक्टर-32 और 33 की सड़के पूरी करने के लिए पत्र लिखा जा चुका, लेकिन अबतक कार्य पूरा नहीं हो सका। इस कारण उद्योग लगाने में दिक्कत आ रही है। - रिषभ निगम, अध्यक्ष, यमुना एक्सप्रेसवे उद्यमी संघ ---कोट: कुछ सेक्टरों में सड़कें अधूरी हैं। जमीन का विवाद सुलझाने के बाद सड़क निर्माण तेजी से पूरा किया जा रहा है। काफी अधूरी सड़कें पूरी हो चुकी है। शेष सड़कों को पूरा करने के लिए प्राधिकरण हर स्तर पर कार्य कर रहा है। - शैलेंद्र भाटिया, एसीईओ, यीडा
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