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नोएडा

लचर स्वास्थ्य सेवाओं से गांवों में हालात भयावह

हिन्दुस्तान टीम,नोएडाPublished By: Newswrap
Tue, 18 May 2021 09:10 PM
लचर स्वास्थ्य सेवाओं से गांवों में हालात भयावह

लचर स्वास्थ्य सेवाओं से गांवों में हालात भयावह

नोएडा | निशांत कौशिक

कोरोना संक्रमण इस बार शहर के साथ गांवों में भी तेजी से फैल रहा है। गांवों में बुखार से पीड़ित लोगों की संख्या निरंतर बढ़ रही है। मगर लचर स्वास्थ्य सेवाओं से गांवों में हालात भयावह हैं। कहने को तो गांवों में स्वास्थ्य केंद्र चल रहे हैं, मगर वहां पर न तो चिकित्सक हैं और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी पहुंच रहा है।

जिले में कई गांव ऐसे हैं, जहां पर अभी तक लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण भी नहीं हो सका है। गांवों में बीमार लोग खुले आसमान के नीचे झोलाछाप चिकित्सकों से ही इलाज कराने को विवश हैं। आपके अपने अखबार ‘हिन्दुस्तान ने मंगलवार को क्षेत्र के कई गांव का दौरा किया तो यह सच्चाई सामने आई। कोरोना काल में गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं वेंटिलेटर पर हैं व ग्रामीण अच्छे इलाज के बिना ही दम तोड़ रहे हैं।

गांव रामपुर खादर

‘हिन्दुस्तान टीम सबसे पहले दनकौर क्षेत्र के गांव रामपुर खादर स्थित स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची। यह स्वास्थ्य केंद्र लगभग खंडहर में तब्दील हो चुका है। देखने से ही लगता है कि पिछले काफी समय से वह खुला नहीं है। यहां बेड के गद्दे भी फटे हुए थे और उन पर धूल की मोटी परत जमी हुई थी, वहां के खिड़की दरवाजे भी टूटे हुए थे और कहीं से भी यह स्वास्थ्य केन्द्र नहीं लग रहा था। ग्रामीणों का कहना था कि इस स्वास्थ्य केन्द्र पर कभी कोई चिकित्सक नहीं आता, यहां पर कभी-कभार सिर्फ एक महिला स्वास्थ्यकर्मी आती है। इस केंद्र का कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है। गांव में अभी तक कोरोना की जांच के लिए कोई शिविर नहीं लगा है और न ही गांव में कोरोना की रोकथाम के लिए टीकाकरण की व्यवस्था की गई है। इस गांव में अभी तक सेनेटाइजेशन भी नहीं किया गया है। गांव में अनेक लोग बीमार हैं और वे गांव के ही एक निजी चिकित्सक से इलाज करा रहे हैं।

मच्छरों से भी ग्रामीण परेशान : रामपुर खादर में ग्रामीण मच्छरों से भी परेशान हैं, ग्रामीणों का आरोप है कि यहां पर खुले में पानी जमा है और इस पानी में बड़े पैमाने पर मच्छर पनप रहे हैं। ग्रामीणों ने हिन्दुस्तान की टीम को गांव में खुले जमा पाने में पैदा हो रहे मच्छरों के झुंड भी दिखाये और मांग की कि सरकार गांव में विशेष अभियान चलाकर ग्रामीणों को मच्छरों से मुक्ति दिलाये और गांव में जांच के लिए भी विशेष अभियान चलाया जाए।

दूसरी लहर में बढ़ रहे मरीज : कोरोना की पहली लहर का ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभाव नहीं पड़ा था। मगर इस बार गांवों में कोरोना का प्रकोप बढ़ रहा है और वहां पर कोरोना संक्रमित मरीज तो बड़ी संख्या में सामने आ रहे हैं। साथ ही बुखार के मरीज भी बड़ी संख्या में हैं, जिनकी कोरोना की जांच नहीं हो सकी है। इसने स्वास्थ्य विभाग की बेचैनी बढ़ा दी है। जिले में दादरी, दनकौर और जेवर ब्लॉक मेंअब तक 10 हजार से ज्यादा कोरोना के मामले मिल चुके हैं।

मुख्यमंत्री ने दिए थे गांवों में स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने के निर्देश : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को जिले के दौरे पर आये थे। उन्होंने गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार करने के निर्देश दिए थे। गांवों में कोरोना के खतरे को देखते हुए वहां पर विशेष अभियान चलाने की बात कही गई थी, इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं बदतर हैं। इसे लेकर गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है।

पारसौल : खुले आसमान के नीचे चल रहा इलाज

दनकौर का गांव पारसौल जिले के चर्चित गांवों में से एक है। यहां जमीन अधिग्रहण को लेकर बड़ा किसान आंदोलन चला था। पारसौल में भी हालात बदतर हैं। यहां स्थित स्वास्थ्य उपकेन्द्र पर ताला लटका हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यह उपकेन्द्र सप्ताह में सिर्फ बुधवार के दिन खुलता है, मगर इसका कोई लाभ ग्रामीणों को नहीं मिलता, क्योंकि यहां पर कोई संसाधन नहीं हैं। गांव में बहुत से ग्रामीण बुखार से पीड़ित है, जिनका इलाज गांव का ही एक निजी चिकित्सक अपनेे घर में कर रहा है। वहां खुले में खाट पर लिटाकर मरीजों को ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में सेनेटाइजनेशन अभियान नहीं चलाया गया है। हालांकि, कुछ्र ग्रामीणों का टीकाकरण हो चुका है।

रोज 40 से 60 गांवों में लगा रहे कैंप : जिलाधिकारी

जिलाधिकारी सुहास.एल.वाई ने कहा कि प्रतिदिन 40 से 60 गांवों में कैंप लगा कर ग्रामीणों की जांच की जा रही है। यदि पारसौल और रामपुर खादर में कैंप नहीं लगा है तो बुधवार को ही इन गांव में कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच कराई जाएगी। आज मैंने सैनी, पटवारी और शाहबेरी गांव में लगे कैंप का निरीक्षण किया है। यह अच्छी बात है कि गांवो में अब कोरोना या बुखार के नए केस सामने नहीं आ रहे हैं। वहीं, जिले में बंद पड़े स्वास्थ्य केंद्रों की रिपोर्ट तैयार हो रही है और उन्हें फिर से चालू करने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि झोलाछाप चिकित्सकों को लेकर लोगों सतर्क रहें। ग्रामीण सरकारी स्वास्थ्य केद्रों और निजी अस्पतालों में ही इलाज कराएं, जिसके लिए उनके पास आयुष्मान कार्ड भी हैं।

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