नोएडा में जो हुआ, वह श्रमिकों की आखिरी पुकार थी : राहुल गांधी
नोएडा, निशांत कौशिक। नोएडा में जो हुआ, वह श्रमिकों की आखिरी पुकार थी : राहुल गांधी नोएडा, विशेष

नोएडा में जो हुआ, वह श्रमिकों की आखिरी पुकार थी : राहुल गांधी नोएडा, निशांत कौशिक। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन को सही ठहराते हुए कहा है कि आसमान छूती महंगाई के साथ मजदूरी बढ़ाने की बात वाजिब है और उनकी इस मांग पर संवेदनशीलता के साथ ध्यान दिया जाना चाहिए। नोएडा की सड़कों पर जो हुआ, वह श्रमिकों की आखिरी पुकार थी।राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि जिस तरह से महंगाई बढ़ रही है, उसके अनुसार श्रमिकों की न्यूनतम मजदूरी भी बढ़नी चाहिए।
श्रमिकों की हर आवाज को अनसुना किया गया, जो मांगते-मांगते थक गया। नोएडा में काम करने वाले एक मजदूर की 12,000 रुपये महीने की तनख्वाह में 4,000-7,000 रुपये किराये में चला जाता है। जब तक 300 रुपये की सालाना वेतन बढ़ोतरी मिलती है, मकान मालिक 500 रुपये किराया बढ़ा देता है। आय बढ़ने से पहले ही यह बेलगाम महंगाई जीवन का गला घोंट देती है और कर्ज की गहराई में डुबो देती है। इन लोगों ने शायद इस गैस संकट के दौरान अपने घर का चूल्हा जलाने के लिए 5,000 रुपये तक का गैस सिलेंडर खरीदा होगा। यह सिर्फ नोएडा की बात नहीं है और न ही सिर्फ भारत की। दुनियाभर में ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं। पश्चिम एशिया में युद्ध की वजह से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है, मगर अमेरिका के शुल्क युद्ध, वैश्विक महंगाई और बाधित आपूर्ति शृंखला का बोझ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मित्र उद्योगपतियों पर नहीं पड़ा। इसकी सबसे बड़ी मार रोज कमाकर खाने वाले मजदूरों पर पड़ा है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि सरकार ने चार श्रम संहिताएं जल्दबाजी में बिना संवाद किए नवंबर 2025 से लागू कर दी और कार्य अवधि 12 घंटे तक बढ़ा दी। नोएडा का मजदूर 20,000 रुपये मांग रहा है। यह कोई लालच नहीं, यह उसका अधिकार है। अंत में उन्होंने लिखा कि वह देश की रीढ़ हर मजदूर के साथ खड़े हैं।
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


