मतदाता सूची में 11 हजार से अधिक मतदाता संदिग्ध होने का आरोप
नोएडा, राजेश शर्मा। समाजवादी पार्टी ने नोएडा विधानसभा में 11,596 संदिग्ध मतदाताओं के नाम होने का आरोप लगाया है। इन मतदाताओं के नाम एक, दो या इससे भी अ

नोएडा, राजेश शर्मा। समाजवादी पार्टी ने नोएडा विधानसभा में 11,596 संदिग्ध मतदाताओं के नाम होने का आरोप लगाया है। इन मतदाताओं के नाम एक, दो या इससे भी अधिक बार सूची होने का दावा किया गया है। इसकी शिकायत साक्ष्यों के साथ चुनाव आयोग से की है। इस बारे में बुधवार को सेक्टर-33 में सपा नेताओं ने प्रेसवार्ता कर जानकारी दी। मतदाता सूची में गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए सपा नेताओं ने मतदाता सूची तैयार करने के लिए किए गए अभियानों पर भी सवाल खड़े किए। समाजवादी पार्टी नोएडा महानगर के अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने आरोप लगाया कि नोएडा विधानसभा क्षेत्र-61 की मतदाता सूची में व्यापक एवं गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं।
पार्टी ने स्थानीय स्तर के मतदाता सूचियों की जांच और सत्यापन किया। अभी तक 11,596 संदिग्ध मतदाता प्रविष्टियों की पहचान की गई है। इनमें अनेक ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां एक ही व्यक्ति के नाम पर एक से अधिक मतदाता पहचान पत्र जारी पाए गए हैं।उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जांच में ऐसे कई उदाहरण मिले हैं, जहां एक ही व्यक्ति के नाम पर तीन, चार, पांच और यहां तक कि छह-छह वोटर आईडी दर्ज हैं। कई मामलों में मतदाता का नाम, आयु, पिता का नाम एवं अन्य विवरण समान पाए गए, जबकि उनका पंजीकरण अलग-अलग बूथों पर दर्ज है। कुछ मामलों में एक ही बूथ संख्या पर भी एक से अधिक बार नाम मिले हैं। आश्रय गुप्ता ने बताया कि यह स्थिति निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (एसएसआर) एवं तकनीकी रूप से सुदृढ़ एवं पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने के दावों पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने बताया कि शुरुआत से ही इस प्रक्रिया पर संदेह था, लेकिन अब उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों ने उन आशंकाओं को और मजबूत कर दिया है। समाजवादी पार्टी निर्वाचन आयोग से इस पूरे मामले में लिखित स्पष्टीकरण मांगेगी। विस्तृत शिकायत स्पीड पोस्ट के माध्यम से भेज दी गई है। प्रेसवार्ता में सुनील चौधरी, विकास यादव, बबलू चौहान , गौरव कुमार यादव , मनोज गोयल, बाबूलाल बंसल आदि मौजूद रहे।सपा ने निर्वाचन आयोग से ये प्रश्न पूछेनोएडा समाजवादी पार्टी ने चुनाव आयोग से सवाल किया है कि यदि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और तकनीकी रूप से सुदृढ़ थी, तो इतनी बड़ी संख्या में नकल प्रविष्टियां कैसे बन रहीं। अगर यह प्रशासनिक त्रुटि है, तो इसके लिए जिम्मेदार निर्वाचन अधिकारियों के विरुद्ध क्या कार्रवाई की गई है या की जाएगी। एक ही व्यक्ति के नाम पर अनेक वोटर आईडी तथा विभिन्न बूथों पर पंजीकरण कैसे संभव हुआ। क्या निर्वाचन आयोग पूरी मतदाता सूची का स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पुनः परीक्षण कराएगा। अगर ऐसा होगा तो दोषपूर्ण प्रविष्टियों को हटाने की समय-सीमा क्या होगी। सपा ने इसके अलावा भी चुनाव आयोग से कई प्रश्न पूछे हैं।
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