प्री बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर छात्रा ने जान दी

Feb 13, 2026 08:35 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नोएडा
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नोएडा के सेक्टर-22 में कक्षा 12 की छात्रा ने कम अंक आने के कारण मानसिक तनाव से आत्महत्या कर ली। छात्रा के माता-पिता ने बताया कि वह पढ़ाई में कमजोर थी और प्री बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने से वह चिंतित थी। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।

प्री बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने पर छात्रा ने जान दी

नोएडा, संवाददाता। सेक्टर-22 में रहने वाली कक्षा 12 की छात्रा ने गुरुवार शाम घर के कमरे में फंदे पर लटककर आत्महत्या कर ली। छात्रा हाल ही में हुई प्री बोर्ड परीक्षा में कम अंक आने से मानसिक तनाव से जूझ रही थी। सेक्टर-24 थाना पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजन को सौंप दिया। पुलिस के मुताबिक मूलरूप से जिला बागपत निवासी व्यक्ति वर्तमान में सेक्टर-22 के एफ ब्लॉक में किराये के घर में भूतल पर रहते हैं। वह वर्तमान में सेक्टर-3 स्थित एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। परिवार में पत्नी के अलावा एक बेटी और एक बेटा है।

18 वर्षीय बेटी निकट के ही एक ट्रस्ट के स्कूल में कक्षा 12 में पढ़ाई करती थी। बेटा कक्षा आठ में पढ़ता है। गुरुवार शाम पत्नी किसी कार्य से बाजार गई थी और बेटा पांच बजे ट्यूशन पढ़ने गया था। घर पर बेटी अकेली थी। बेटा शाम करीब छह बजे ट्यूशन पढ़कर घर लौटा तो कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। उसने खिड़की से झांककर देखा तो उसकी बड़ी बहन फंदे पर लटकी हुई थी। यह देखकर उसकी चीख निकल गई। आवाज सुनकर मकान मालिक भी पहुंच गए। उन्होंने कॉल करके छात्रा के पिता और पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने फॉरेंसिक टीम की मौजूदगी में दरवाजा तोड़कर छात्रा के शव को उतारा। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला। परिजन ने पुलिस को बताया कि उनकी बेटी पढ़ाई में कमजोर थी। उसके 10वीं और 11वीं कक्षा में कम नंबर आए थे। प्री बोर्ड परीक्षा में भी कम नंबर आने पर उसे बोर्ड परीक्षा में फेल होने का डर सता रहा था। इसको लेकर वह पिछले कुछ दिनों से तनाव में जीवन व्यतीत कर रही थी। एसीपी स्वतंत्र कुमार सिंह ने बताया कि पोस्टमार्टम के बाद शव परिजन को सौंप दिया है। आत्महत्या के सही कारणों की जांच की जा रही है। ---------- बच्चों के साथ समय बिताएं, सही और गलत का फर्क समझाएं मनोचिकित्सक डॉ. आरके बंसल का कहना है कि बच्चे लगातार मोबाइल और टेलीविजन देखते-देखते उसके आदी हो जाते हैं। परिजनों को उनकी आदत छुड़ाने के लिए उसके नुकसान और फायदे के बारे में बताना चाहिए। उनके साथ समय बिताएं। सही-गलत बताएं। बच्चों के दैनिक जीवन में होने वाले हर छोटे-बड़े बदलाव को गंभीरता से लें। --------- शुरू से ही ध्यान रखें मनोचिकित्सक के अनुसार अक्सर मां-पिता घर में खुद मोबाइल और टेलीविजन देखते रहते हैं। उन्हें देखकर बच्चे वीडियो देखना शुरू करते हैं तो परिजन शुरू में उन्हें मना नहीं करते। जब बच्चों के पढ़ाई और सेहत पर असर पड़ना शुरू होता है तो परिजन को होश आता है। इसके बाद बच्चों को टेलीविजन और मोबाइल से दूर करने की कोशिश करते हैं। इससे बच्चों के दिमाग पर सदमा लगता है। --------- अभिभावक डांटें नहीं, उन्हें समझाएं छोटे बच्चे दिमागी तौर पर उतने समझदार नहीं होते हैं। उनके साथ कड़ाई से व्यवहार नहीं करना चाहिए। अगर उन्हें किसी चीज की अधिक आदत लग गई है तो उन्हें मनोचिकित्सक के पास ले जाना चाहिए। काउंसलिंग कराने की जरूरत होती है। बच्चों की बातें सुनें और उनके मन को समझने की कोशिश की जाए। डांटने से वे और जिद्दी हो जाते हैं। उनका ध्यान दूसरी तरफ लगाएं। --------- पूर्व में हुईं आत्महत्या की घटनाएं - 3 फरवरी- सेक्टर-81 स्थित नगला चरणदास गांव में पढ़ाई में कमजोर 12 वर्षीय कक्षा पांच के छात्र ने फंदे से लटककर जान दी। - 8 फरवरी- एक्सप्रेसवे थाना क्षेत्र में बिल्डिंग से गिरकर कक्षा 12 के छात्र ने दी जान। --------- गौरव भारद्वाज

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