
बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों को ठगने वाले कॉल सेंटर का पर्दाफाश
300 से अधिक लोगों के साथ जालसाजी कर चुके आरोपी - सरगना समेत 13
नोएडा, वरिष्ठ संवाददाता। साइबर क्राइम और सेक्टर-63 की पुलिस ने नामी कंपनियों की बीमा पॉलिसी देने और बंद पॉलिसी का नवीनीकरण कराने का झांसा देकर देशभर के लोगों से ठगी करने वाले कॉल सेंटर का मंगलवार को पर्दाफाश कर 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। सेक्टर-63 में यह कॉल सेंटर बीते पांच साल से संचालित हो रहा था। आरोपी 300 से अधिक लोगों के साथ जालसाजी कर चुके हैं। आराोपियों के पास से लैपटॉप, मोबाइल और डायरी समेत अन्य सामान बरामद हुआ। एडिशनल डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि बीते दिनों महाराष्ट्र की महिला ने जिले की पुलिस से संपर्क कर बताया कि नामी बीमा कंपनी की पॉलिसी का नवीनीकरण कराने का झांसा देकर उसके साथ कुछ लोगों ने ठगी की है।
साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और यह जानकारी जुटानी शुरू कर दी कि महिला के पास कॉल कहां से की गई थी। सारा इनपुट एकत्र करने के बाद पुलिस की दो टीमों ने मंगलवार को सेक्टर-63 स्थित ग्रो अप नाम के कॉल सेंटर पर छापा मारा। प्रारंभिक जांच में कॉल सेंटर सही पाया गया और बीमा पॉलिसी के लिए दो नामी कंपनियों के साथ कॉल सेंटर के संचालक का टाईअप मिला। इस संबंध में उसके पास दस्तावेज भी मौजूद मिले। हालांकि, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, परत दर परत ठगी का पता चलता गया। पुलिस की जांच में सामने आया कि कॉल सेंटर से उन बीमा कंपनियों के ग्राहकों को भी कॉल किया जाता था, जिनसे संचालक का टाईअप नहीं था। सही कॉल सेंटर के अंदर ही एक फर्जी कॉल सेंटर संचालित होता मिला। इसमें ठगी के लिए फर्जी सिम और म्यूल खातों का इस्तेमाल किया जा रहा था। अनुमान के मुताबिक ठगों ने अब तक 300 से अधिक लोगों के साथ बीमा पॉलिसी का नवीनीकरण, बोनस, सरेंडर वैल्यू, मैच्योरिटी राशि और पुराने बीमा पर अतिरिक्त लाभ दिलाने का झांसा देकर ठगी की है। आरोपियों के पास बीमा कंपनियों का डाटा कहां से आया, इसकी भी जानकारी जुटाई जा रही है। लुभावनी स्कीम बताकर फंसाते थे पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे बीमा पॉलिसी के नाम पर लोगों को फर्जी नाम और पते बताकर कॉल करते। बंद बीमा पॉलिसी को रिन्यू कराने, बोनस दिलाने का लालच देने और नई पॉलिसी करने के नाम पर रुपये अपने बताए हुए खातों मे डलवा लेते। उनकी कंपनी केवल दो बीमा कंपनियों के लिए काम करती, लेकिन इनकी आड़ मे अन्य कंपनियों का डाटा मार्केट से प्राप्त करके उनसे संबंधित बीमा धारकों एवं नए ग्राहकों को लालच देकर फर्जी लुभावनी स्कीम बताकर अलग-अलग फर्जी नंबरों से कॉल करके कई फर्जी बैंक खातों में रुपये लेते। अवैध तरीके से जो रकम मिलती थी, उसे सदस्य आपस में बांट लेते। मुख्य आरोपी एमबीए पास छापेमारी के दौरान जिन आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, उनकी पहचान हापुड़ निवासी छत्रपाल शर्मा, बिहार निवासी सत्यम सिंह, राज सलाउद्दीन, दिल्ली निवासी समीर अहमद, ईश्वर कर्माली, मोहम्मद आसिफ और सुहैल, बुलंदशहर निवासी सुहैल खान, गाजियाबाद निवासी विवेक कुमार, नोएडा निवासी सुमित, कासगंज निवासी राजीव कुमार, बहराइच निवासी मिथिलेश और कुशीनगर निवासी हरिओम के रूप में हुई। छत्रपाल गिरोह का मुख्य सदस्य है। उसने एमबीए किया है। समीर ने बीकॉम और राजीव ने बीएससी की है। सुहैल और हरिओम ने बीए किया है। अन्य आरोपी दसवीं से 12वीं तक पढ़े हैं। छापेमारी के बाद 12 खाते फ्रीज कराए पुलिस अधिकारियों ने बताया कि ठगी में इस्तेमाल होने वाले 12 खातों को फ्रीज कराया गया है। जिन दस्तावेजों को आधार बनाकर बैंक खाते खुलवाए गए थे, उसका भी पता लगाया जा रहा है। कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी सुदूर प्रदेशों में रहने वाले लोगों को ज्यादा कॉल करते थे। ऐसा इसलिए किया जाता था कि दूर के लोग बार-बार नोएडा आने में सक्षम नहीं हो पाते। ऐसे में ठगे जाने के बावजूद वे कुछ समय बाद शांत हो जाते हैं। कम ही लोग ऐसे होते हैं, जो मामले को लेकर थाने और चौकी पर पहुंचते हैं। आरोपियों की गिरफ्तारी पूरे साक्ष्य एकत्र करने के बाद की गई है। आरोपियों की डायरी से राज खुलेगा आरोपियों के पास से दो लैपटॉप, 31 मोबाइल, चार्जर, सिम कार्ड, कॉल स्किप्ट और बीमा संबंधी दस्तावेज बरामद हुए। दो डायरी भी कॉल सेंटर के अंदर से मिलीं। इसमें लेनदेन समेत कई अन्य जानकारियां हैं। पुलिस इसमें लिखे हर शब्द का अवलोकन कर रही है। आशंका है कि डायरी से ठगी से संबंधित कई अहम जानकारी निकल कर सामने आएगी। पुलिस उन लोगों से संपर्क करने का प्रयास कर रही है, जिन लोगों के साथ कॉल सेंटर में काम करने वाले आरोपियों ने ठगी की। जिस पर कॉल सेंटर में छापेमारी की गई, ज्यादातर आरोपी ठगी करने में व्यस्त थे। कॉल सेंटर जहां पर चल रहा था, उसे 40 हजार रुपये महीने किराये पर लिया गया था।

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