देश में नोएडा एयरपोर्ट सबसे हरा-भरा होगा
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर्यावरण संरक्षण में नए मानक स्थापित करेगा। यह भारत का पहला आईजीबीसी ग्रीन कैंपस प्रमाणित एयरपोर्ट है। यहां प्रदूषण मुक्त संचालन के लिए इलेक्ट्रिक वाहन, सोलर फार्म, और रेन वाटर हार्वेस्टिंग की योजनाएँ हैं। पर्यावरण सुरक्षा के लिए नियमित मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार किया गया है।
ग्रेटर नोएडा, वरिष्ठ संवाददाता। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा। नोएडा एयरपोर्ट भारत का पहला आईजीबीसी ग्रीन कैंपस प्रमाणित हुआ है। यह पूरी तरह से प्रदूषण मुक्त होगा, जिसके लिए विशेष तैयारियां की गई हैं। यमुना विकास प्राधिकरण के एसीईओ शैलेंद्र कुमार भाटिया ने बताया कि एयरपोर्ट का टर्मिनल भवन इस तरह डिजाइन किया गया है कि ऊर्जा, पानी और कचरे की खपत न्यूनतम हो। एयरपोर्ट पार्किंग के 20 प्रतिशत हिस्से में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए स्टैंडर्ड और फास्ट चार्जिंग सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। एयरसाइड संचालन के लिए उपयोग होने वाले वाहन इलेक्ट्रिक होंगे और इनके चार्जिंग प्वाइंट कई स्थानों पर लगाए जाएंगे।
यह वाहन प्रदूषण नहीं करते। परिसर में 82.94 एकड़ में सोलर फार्म विकसित किया जा रहा है, जिसकी क्षमता 51966 मेगावाट होगी। इससे एयरपोर्ट को बड़े पैमाने पर नवीकरणीय ऊर्जा प्राप्त होगी। साथ ही, दो स्थानों पर बनाए जा रहे रेन वाटर हार्वेस्टिंग पौंड टिकाऊ जल स्रोत उपलब्ध कराएंगे। एयरपोर्ट में आरएनजी प्लांट भी लगाने की योजना है, जिससे एयरपोर्ट वाहन, डीजी सेट और अन्य प्रणालियां ग्रीन फ्यूल पर संचालित हो सकेंगी। इसके अलावा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली कचरे के पृथक्करण, रि-साइक्लिंग और वैज्ञानिक उपचार को बढ़ावा देगी। एयरपोर्ट पर पर्यावरण सुरक्षा के लिए एनवायरनमेंट मॉनिटरिंग प्लान भी तैयार किया गया है, जिसके माध्यम से हर महीने वायु, पानी, मिट्टी, कचरा और सीवेज के मानकों की निगरानी की जाएगी।

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