ई-साइकिल चलाने वाली एजेंसी पर जुर्माना
नोएडा की ई-साइकिल योजना एक बार फिर चर्चा में है। प्राधिकरण ने एजेंसी टर्बन मोबिलिटी का अनुबंध समाप्त कर दिया है और दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। ई-साइकिलों की कमी और खराब स्थिति के कारण आम जनता को इस योजना का लाभ नहीं मिला। इसके साथ ही प्राधिकरण की छवि भी धूमिल हुई है।

नोएडा, विक्रम शर्मा। तीन साल पहले शुरू हुई ई-साइकिल योजना एक बार फिर चर्चा में है। घपलों से संबंधित शिकायतें मिलने पर प्राधिकरण ने ई-साइकिल चलाने वाली एजेंसी से अनुबंध समाप्त कर दिया। साथ ही उसको एक साल के लिए काली सूची में डालकर दो लाख रुपये का जुर्माना लगाया। नोएडा के स्थापना दिवस के दिन 17 अप्रैल 2023 को ई-साइकिल सेवा शुरू की गई थी। अनुबंध के तहत 62 स्टैंड से 620 ई-साइकिल चलाने का निर्णय लिया गया। शुरुआत 20 स्टैंड से की गई थी। कुछ महीने बाद भी चुनी गई एजेंसी ई-साइकिल की सुविधा देने में फेल साबित हुई।
ऐसे में प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल के अफसरों ने एजेंसी को मुनाफा देने के लिए नियमों में बदलाव कर दिया। अनुबंध के समय तय हुईं शर्तों को दरकिनार करते हुए एजेंसी को अधिक क्षेत्र में विज्ञापन लगाने का अधिकार दे दिया। मामले की शिकायत मिलने पर पिछले साल जांच समिति गठित की गई थी।अब प्राधिकरण के वरिष्ठ प्रबंधक आर.के शर्मा ने पत्र जारी कर एजेंसी टर्बन मोबिलिटी के खिलाफ कार्रवाई की। पत्र में बताया गया है कि एजेंसी के साथ दो एमओयू 31-31 स्थान के लिए किए गए। निर्धारित समयावधि के बाद भी एजेंसी द्वारा इन जगहों पर ई-साइकिल का संचालन नहीं किया गया। इससे शहर के आम जनमानस कोई इस परियोजना का कोई लाभ नहीं मिला। इसके साथ ही प्राधिकरण की छवि भी धूमिल हुई। यह भी बताया गया है कि समय-समय पर किए गए निरीक्षण में अधिकांश स्टैंड पर तीन से पांच ई₹-साइकिल ही मिलीं। अनुबंध की शर्तों के तहत हर स्टैंड पर 10 ई-साइकिलें होनी चाहिए थीं। ई-साइकिलों के टायर और सीट फटी हुईं व लाइटें टूटी मिलीं। सभी स्टैंड पर ताला लगा मिला। विज्ञापन के बोर्ड ई-साइकिल स्टैंड से दूर लगाए गए। किसी भी स्टैंड पर उपयोगर्ता को जानकारी देने के लिए कोई कर्मचारी नहीं पाया गया। पत्र में 24 मई 2023 से 12 नवंबर 2024 तक एजेंसी को जारी किए 10 पत्रों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें 2024 में जारी छह पत्रों का जवाब संतोषजनक न दिए जाने की बात कही गई है। यह भी लिखा गया है कि उक्त पत्र सक्षम स्तर से अनुमोदन के बाद जारी किया गया है।-------------एजेंसी पर मेहरबान रहे अफसरई-साइकिल योजना के लिए 91 पेज की बनी आरएफपी के पेज नंबर-15 पर मानक निर्धारित करते हुए कहा गया था कि ई-साइकिल स्टैंड का 25 प्रतिशत क्षेत्र अधिकतम 50 वर्ग फीट की जगह पर विज्ञापन का अधिकार दिया जाएगा। आरएफपी के हिसाब से पहला अनुबंध 30 सितंबर 2022 को प्राधिकरण के तत्कालीन ट्रैफिक सेल के उपमहाप्रबंधक और मौजूदा महाप्रबंधक एस.पी सिंह और एजेंसी टर्बन मोबिलिटी के बीच हुआ। इसके नौ महीने बाद दूसरा एमओयू 10 जुलाई 2023 को एजेंसी के साथ हुआ। इस दौरान तक भी ई-साइकिलों का संचालन शुरू नहीं हुआ। आरोप है कि दूसरे एमओयू में विज्ञापन अधिकार की जगह के मानक बदल कर दोगुने कर दिए गए। इसके बाद एजेंसी ने बड़ी-बड़ी होर्डिंगें लगवाईं इन होर्डिंग्स से निजी ब्रांड के प्रचार के जरिए एजेंसी कमाई कर रही है। एमओयू में यूनिपोल लगाकर होर्डिंग्स लगाए जाना भी स्पष्ट नहीं था।------------नौ महीने से जांच के नाम पर हो रही थी खानापूर्तिई-साइकिल चलवाने के नाम पर एजेंसी को विज्ञापन का अधिक क्षेत्र देने की शिकायतें मिलने पर अगस्त 2025 में प्राधिकरण के तत्कालीन सीईओ डॉ. लोकेश एम ने एसीईओ सतीश पाल के नेतृत्व में एक जांच समिति गठित की थी। इसमें सदस्य के तौर पर ओएसडी महेंद्र प्रसाद और महाप्रबंधक आरपी सिंह बनाया गया। समिति जांच के नाम पर अब तक खानापूर्ति करती रही।---------------
लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।


