DA Image
28 दिसंबर, 2020|11:34|IST

अगली स्टोरी

ग्रेनो प्राधिकरण के बाहर धरने पर बैठे किसान

ग्रेनो प्राधिकरण के बाहर धरने पर बैठे किसान

ग्रेटर नोएडा। मुख्य संवाददाता

ग्रेटर नोएडा के लीजबैक मामले को लेकर सैकड़ों किसानों की भीड़ सोमवार की दोपहर विकास प्राधिकरण पहुंच गई। किसानों ने प्राधिकरण, सरकार और स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्राधिकरण कार्यालय के बाहर किसान धरना देकर बैठ गए। किसानों का कहना है कि जब तक एसआईटी की रिपोर्ट रद्द नहीं की जाएगी, तब तक धरना जारी रहेगा। किसानों ने प्राधिकरण पर मनमानी करने और किसानों को तबाह करने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

किसान सेवा संघर्ष समिति के बैनर तले करीब 50 गांवों के सैकड़ों किसान विकास प्राधिकरण के कार्यालय पहुंचे हैं। समिति के प्रवक्ता मनवीर भाटी ने कहा कि प्राधिकरण ने एसआईटी के सामने सही और पूरे तथ्य नहीं रखे हैं। जानबूझकर किसानों के खिलाफ रिपोर्ट बनवाई गई है। बाहरी पूंजीपति व्यक्तियों की आबादियों को हरी झंडी दे दी गई है। ग्रेटर नोएडा के मूल किसानों की आबादी के साथ उनको मिल चुके 6% प्लॉट को भी खत्म करने की सिफारिश की गई है।

उन्होंने कहा कि हम एसआईटी की जांच रिपोर्ट और सिफारिशों का पुरजोर विरोध करेंगे। किसानों के साथ धोखाधड़ी और हितों के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। किसानों ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की सरकारों के 10 वर्ष के कार्यकाल में लंबे संघर्ष के बाद अपने परिवारों की सामाजिक सुरक्षा हासिल की थी। जिसे विकास प्राधिकरण ने तबाह कर दिया है। इसके खिलाफ किसान एकजुट हैं। प्राधिकरण की तानाशाही को स्वीकार नहीं करेंगे। हम यहां विकास प्राधिकरण के बाहर आकर बैठ गए हैं। हमारी बस एक ही मांग है। एसआईटी की रिपोर्ट को रद्द किया जाए। जब तक प्राधिकरण और शासन यह रिपोर्ट खारिज नहीं करेंगे, हमारा धरना जारी रहेगा।

किसानों ने प्राधिकरण के बाहर टैंट लगाया

किसानों ने विकास प्राधिकरण के बाहर टेंट लगा दिया है। सैकड़ों की संख्या में किसान रजाई-गद्दे लेकर धरने पर बैठे हुए हैं। दूसरी ओर किसानों को धरने से उठाने के लिए पुलिस अधिकारियों ने बातचीत की है। पुलिस का कहना है कि जिले में धारा 144 लागू है। कोरोना वायरस संक्रमण के चलते महामारी अधिनियम भी लागू है। भीड़ एकत्र करने पर पाबंदी लगाई गई है।

क्या है पूरा मामला

ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के बिसरख गांव में बहुजन समाज पार्टी और फिर समाजवादी पार्टी की सरकारों के कार्यकाल में लीजबैक घोटाले का आरोप लगाते हुए सरकार से शिकायत की गई थी। इस मामले पर सरकार ने एक विशेष जांच दल एसआईटी का गठन यमुना एक्सप्रेस-वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डॉ.अरुण वीर सिंह की अध्यक्षता में किया था। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि लीजबैक के नाम पर व्यापक रूप से अनियमितताएं और धांधली की गई है।

क्या कहती है एसआईटी

एसआईटी का कहना है कि जिन किसानों ने आबादी छुड़वा ली है, उन्हें गलत ढंग से 6% के रेजिडेंशियल प्लॉट दिए गए हैं। एसआईटी ने सिफारिश की है कि आबादी छुड़वाने वाले किसानों को 6% भूखंड और भविष्य में प्राधिकरण की आवासीय योजनाओं में आरक्षण नहीं दिया जाना चाहिए। यही इस जांच रिपोर्ट की सबसे बड़ी सिफारिश है।

  • Hindi News से जुड़े ताजा अपडेट के लिए हमें पर लाइक और पर फॉलो करें।
  • Web Title:Farmers sitting on strike outside Greno Authority