
किसानों ने महापंचायत कर मांगें रखी
प्राधिकरण के अधिकारों को ज्ञापन सौंपा किसान संगठनों ने धरने को समर्थन दिया रों को ज्ञापन सौंपा किसान संगठनों ने धरने को समर्थन दिया
प्राधिकरण के अधिकारों को ज्ञापन सौंपा किसान संगठनों ने धरने को समर्थन दिया रबूपुरा, संवाददाता। भाकियू लोकशक्ति का 11 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले साढ़े तीन माह से धरना चल रहा है। इसे लेकर फैलेदा कट पर बुधवार को पंचायत का आयोजन कर अपनी मांगें रखीं। मौके पर पहुंचे प्राधिकरण के अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। महापंचायत में पहुंचे दो दर्जन से अधिक किसान संगठनों के प्रतिनिधियों ने पहुंचकर धरने को अपना समर्थन दिया। महापंचायत में भाकियू लोकशक्ति के अध्यक्ष मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि प्राधिकरण या जिला प्रशासन उनकी सुनने को राजी नहीं हैं। इस रवैए को हरगिज बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि 2009 में भूमि अधिग्रहण से जुड़ी समस्याओं का आजतक समाधान नहीं किया गया। जेवर एयरपोर्ट से प्रभावित किसान परिवार सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। विस्थापित किए गए लोगों को पुनर्वास के तहत मिलने वाले भूखंडों की रजिस्ट्री नहीं कराई गई। महापंचायत के दौरान किसानों के बीच पहुंचे यमुना प्राधिकरण के एसडीओ शैलेंद्र सिंह, एसडीएम जेवर अभय कुमार सिंह को किसानों ने अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन दिया। अधिकारियों ने किसानों की सभी मांगों पर प्रभावी कार्रवाई का आश्वासन दिया। मास्टर श्यौराज सिंह ने कहा कि धरना प्रदर्शन की बाबत अंतिम निर्णय 18 नवंबर को सभी किसान संगठनों की सहमति से रौनिजा में लिया जाएगा। किसानों की मांगें स्थानीय लोगों के लिए क्षेत्र में स्थापित होने वाले शिक्षण संस्थानों, चिकित्सालयों और कंपनियों में पचास प्रतिशत कोटा निर्धारित किया जाए नए भूमि अधिग्रहण कानून 2013 का लाभ देने, जमीन अधिग्रहण करते समय आबादी के लिए गांव के चारों तरफ 500 मीटर जगह छोड़ा जाए अधिग्रहण के बदले मिलने वाले भूखंडों को सेक्टर में दिए जाने, गांवों में चल रहे विकास कार्यों में गुणवत्ता का ख्याल रखें और सभी गांवों में घरौनी की व्यवस्था की जाए किसानों और पुलिस के बीच हुई नोंकझोंक महापंचायत के बीच में किसानों ने पुलिस प्रशासन पर आरोप लगाया कि जगह-जगह उनके साथियों को महापंचायत में आने से रोका जा रहा है। इससे नाराज किसानों ने हंगामा शुरू कर दिया और यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ने की कोशिश भी की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान किसानों और पुलिस के बीच नोकझोंक भी हुई। अधिकारियों के समझाने के बाद सभी किसान वापस महापंचायत में आकर बैठ गए।

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